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एसी ब्लास्ट कैसे हो जाता है और ऐसे हादसों से कैसे बचा जा सकता है?
उत्तर भारत में गर्मी बढ़ने लगी है. कई इलाकों में तापमान 40-45 डिग्री. तक पहुंचने लगा है.
घनी आबादी वाले शहरों में बढ़ती आबादी, ट्रैफ़िक के दबाव और प्रदूषण से गर्मी और कहर ढा रही है.
ऐसे में एयर कंडीशनर्स का इस्तेमाल बढ़ गया है.
लेकिन इसके साथ ही भीषण गर्मी की वजह से अक्सर एसी फटने की घटनाएं भी सामने आने लगती हैं.
लिहाज़ा ये जानना ज़रूरी है कि एसी का सुरक्षित इस्तेमाल कैसे करें.
आख़िर गर्मियों में एसी फटने की घटनाएं क्यों होती हैं ? वो कौन से कदम हैं जिनसे एसी को ब्लास्ट होने से बचाया जा सकता है.
उनके रखरखाव में क्या सावधानी रखनी चाहिए जिससे ऐसे हादसों को रोका जा सके.
क्या बढ़ता तापमान है एसी फटने की वजह?
घरों-दफ़्तरों में लगे एसी में ब्लास्ट होने और बढ़ते तापमान के बीच संबंध है.
लेकिन इस का विज्ञान कैसे काम करता है ये समझने के लिए बीबीसी संवाददाता अरशद मिसाल ने कुछ समय पहले आईआईटी बीएचयू के मैकेनिकल विभाग के प्रोफ़ेसर जहर सरकार से बात की थी .
उनका कहना था कि कूलिंग के लिए एम्बिएंस (कंप्रेसर के आस-पास) का तापमान, कन्डेंसर के तापमान से क़रीब 10 डिग्री सेल्सियस कम होना चाहिए.
उन्होंने कहा, "भारत में आम तौर पर एसी के कंडेंसर का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक होता है. जब एम्बिएंस का तापमान कन्डेंसर के तापमान से अधिक हो जाता है तब एसी काम करना बंद कर देता है. इन हालात में एसी के कंडेंसर पर प्रेशर बढ़ जाता है. इस वजह से कन्डेंसर के फटने की संभावना बढ़ जाती हैं."
और किन वजहों से फट सकता है एसी?
अधिक तापमान के अलावा और भी कुछ वजहें हैं जो एसी से जुड़े हादसों का कारण बन सकती हैं.
गैस लीकेज: जानकार बताते हैं कि कन्डेंसर से गैस लीक होने से भी एसी से जुड़ी दुर्घटना हो सकती है. गैस कम होने से कन्डेंसर पर दबाव ज़्यादा पड़ता है, जिससे वो अधिक गर्म होने लगता है. इससे आग लगने की संभावना बढ़ जाती है.
गंदे कॉइल: एसी की कूलिंग में कन्डेंसर कॉइल अहम भूमिका निभाते हैं. यह हवा से गर्मी को बाहर निकालता है. जब कॉइल गंदगी के चलते जाम हो जाता है तब गैस के सामान्य प्रवाह में दिक्कत होती है, इससे कंडेंसर ज़्यादा गर्म होने लगता है, और आग लगने का ख़तरा बढ़ जाता है.
वोल्टेज का उतार-चढ़ाव: लगातार वोल्टेज के उतार-चढ़ाव से भी कंप्रेसर की परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है. यह भी हादसे का कारण बन सकता है.
एसी को फटने से कैसे बचाएं?
- ज़्यादा गर्मी पड़ने पर एसी के कंप्रेसर को छांव में रखें. कंप्रेसर और कन्डेंसर यूनिट के आसपास सही तरीक़े से वेंटिलेशन हो यानी वहां हवा आती हो ताकि यूनिट अधिक गर्म न हो.
- नियमित समय पर एसी की सर्विस कराएं ताकि किसी भी समस्या को समय रहते ठीक किया जा सके.
- एयर फ़िल्टर और कूलिंग कॉइल्स की सफ़ाई नियमित रूप से करें. इससे कंप्रेसर पर अधिक दबाव नहीं पड़ेगा और यह सही तरीके़ से काम करेगा.
- समय-समय पर कूलिंग फैन की भी जांच करें. अगर इसमें कोई समस्या हो, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं.
जानकार बताते हैं कि ऐसे एसी जिनके कन्डेंसर तांबे के होते हैं, वो एल्यूमीनियम कन्डेंसर वाले एसी से ज़्यादा महंगे ज़रूर होते हैं लेकिन तांबा बेहतर होता है.
तांबा पानी या हवा में नमी के साथ रिएक्ट नहीं करता, यानी वो ज़्यादा नॉन-कोरोसिव (यानी नमी की वजह से वो ख़राब नहीं होते) होता है जिस कारण अधिक मज़बूत होता है.
अपने 'लो स्पेसफ़िक हीट प्रॉपर्टी' की वजह से तांबा जल्दी गर्म नहीं होता और कूलिंग भी तेज़ करता है.
जानकार अक्सर एल्यूमिनियम मेटल वाले एसी की जगह तांबे वाले एसी को तरजीह देते हैं.
भारत में तेजी से बढ़ रही है एसी की बिक्री
भारत पर ग्लोबल वॉर्मिंग का असर साफ़ दिख रहा है. अब लगभग हर साल गर्मी का प्रकोप ज्यादा बढ़ता दिख रहा है.
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत के 30 करोड़ घरों में से केवल 8 फ़ीसदी घरों में ही एयर कंडीशनर हैं, जिनमें से कुछ घरों में एक से अधिक यूनिट हैं. इसके बावजूद, भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता एयर कंडीशनर बाजार है.
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ 2025 में भारत एयरकंडीशनर्स के एक करोड़ 40 लाख यूनिट्स खरीदी गईं.
पिछले साल वैश्विक स्तर पर बेचे गए 17 करोड़ एयर कंडीशनर यूनिटों में से 9 करोड़ यूनिट चीन ने खरीदे, जबकि भारत ने 1 करोड़ यूनिट खरीदे.
पेरिस स्थित ऊर्जा थिंक टैंक, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) का अनुमान है कि 2050 तक देश में घरेलू एयर कंडीशनर के स्वामित्व में नौ गुना वृद्धि होगी, जो टीवी, रेफ्रिजरेटर और वाशिंग मशीन सहित अन्य सभी घरेलू उपकरणों के स्वामित्व में वृद्धि से कहीं अधिक होगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित