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जजों और वकीलों की जगह क्या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस ले लेगा?
जजों और वकीलों की जगह क्या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस ले लेगा?
प्रकाशित
आपको याद होगा कि इस साल फरवरी महीने में महाराष्ट्र में चली राजनीतिक खींचतान का मुद्दा जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो उस बहस को ट्रांसक्राइब करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया.
वहीं भारत सरकार अदालतों को डिजिटल बनाने के लिए ई-कोर्ट्स प्रोजक्ट की शुरुआत कर चुकी है जिसके लिए 7000 करोड़ रुपए आवंटित भी किए गए हैं और अब काम तीसरे चरण में है, जिसका एक अहम हिस्सा एआई है.
ऐसे में हम सब के ज़हन में एक सवाल ये उठता है कि क्या जजों की जगह एआई ले सकता है?
वीडियो : सेराज अली
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