आप इस वेबसाइट का टेक्स्ट-ओनली वर्शन देख रहे हैं जो कम डेटा खर्च करता है. सभी तस्वीरों और वीडियो के साथ वेबसाइट का मुख्य वर्शन देखें.
कौन हैं अशोक गहलोत के 'वैभव', जिनकी जाँच कर रही है ईडी
- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत इन दिनों काफ़ी चर्चा में हैं.
पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने वैभव गहलोत को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया था.
एक दिन की पूछताछ के बाद उन्हें 16 नवंबर को ईडी ने दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है.
मीडिया से बातचीत में वैभव गहलोत ने बताया था कि उन्हें फ़ेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) के तहत समन दिया गया था, लेकिन उनका इससे कोई वास्ता नहीं है.
वैभव ने कहा था, "यह समन फ़ेमा के तहत आया है, लेकिन फ़ेमा के तहत मेरा या मेरे परिवार का कोई ट्रांजैक्शन नहीं है."
उनके पिता और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस मामले में टिप्पणी की थी और कहा था कि क़ानून को अपना काम करने दीजिए. नोटिस में कोई दम नहीं है, यह एक साधारण नोटिस है.
ईडी की कार्रवाई पर राजनीति
इस मामले में ईडी ने प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और कांग्रेस नेता ओम प्रकाश हुडला के यहाँ भी छापेमारी की थी.
लेकिन इन सबमें सबसे ज़्यादा चर्चा वैभव गहलोत की हो रही है.
इसलिए भी क्योंकि वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे हैं. वैभव गहलोत बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं.
वैभव गहलोत लगातार दूसरी बार राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी बने हैं.
वैभव गहलोत को ईडी के समन को सीधे तौर पर सीएम गहलोत से जोड़ कर देखा जा रहा है.
कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी भी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रही है ताकि विधानसभा चुनाव में इसका लाभ ले सकें.
वैभव गहलोत पर क्या हैं आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा उल्लंघन (मनी लांड्रिंग) मामले में हाल ही में वैभव गहलोत से पूछताछ की है.
ईडी वैभव गहलोत से उनकी कंपनी के लेनदेन और पार्टनरशिप के बारे में पूछताछ कर रही है. कंपनी के विदेशों से लेनदेन के आरोप पर भी पूछताछ की गई है.
ईडी ने फ़ेमा के तहत जयपुर, उदयपुर, मुंबई और दिल्ली में भी कई जगह छापेमारी की थी.
हालाँकि वैभव गहलोत इस मामले को पुराना बताते हैं.
कुछ दिनों पहले पत्रकारों से बातचीत में वैभव गहलोत ने कहा था, ''ये बारह साल पुराना मामला है. इन आरोपों का मैं 12 साल पहले जवाब दे चुका हूँ. अब फिर से इनको याद आई है.''
ईडी के समन और वैभव गहलोत पर लगे आरोप पर उनका पक्ष लेने के लिए उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया. लेकिन, उनसे संपर्क नहीं हो सका.
वैभव गहलोत के कार्यालय ने उनका पक्ष बताने का आश्वासन दिया है. वैभव गहलोत का पक्ष मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.
चुनाव पर क्या पड़ेगा प्रभाव
राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए 25 नवंबर को मतदान होना है. चुनाव में एक महीने से कम का समय बचा है.
प्रदेश में लगातार हो रही ईडी की छापेमारी और कार्रवाई को दोनों ही मुख्य दल अपने-अपने अनुसार भुनाने का प्रयास कर रहे हैं.
अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री टीकाराम जूली मानते हैं कि आगामी चुनाव में इसका प्रभाव पड़ेगा और ईडी की कार्रवाई से जनता कांग्रेस के साथ जुड़ेगी.
वे यह भी मानते हैं कि वैभव गहलोत को समन के ज़रिए सीएम अशोक गहलोत पर निशाना साधा जा रहा है.
बीबीसी से बातचीत में वे कहते हैं, "ईडी की इन कार्रवाई को जनता समझ चुकी है. जितना ये ईडी की कार्रवाई करेंगे, जनता उतना ही हमारे साथ जुड़ेगी. जनता हमेशा उस व्यक्ति के साथ रहती है, जिसके साथ अन्याय होता है. आज हमारे साथ अन्याय हो रहा है तो जनता हमारे साथ है."
मंत्री जूली कहते हैं कि ईडी जानबूझकर कांग्रेस नेताओं की छवि ख़राब करने के लिए इस तरह की लगातार कार्रवाई कर रही है. जबकि, इन कार्रवाइयों में आज तक कुछ नहीं मिला है. वे कार्रवाई से लोगों में भ्रम पैदा कर रहे हैं और उन्हें गुमराह कर रहे हैं. यह राजनीति से प्रेरित कार्रवाइयाँ नज़र आती हैं.
कांग्रेस पर बीजेपी का हमला
कांग्रेस के आरोप पर बीजेपी विधायक मदन दिलावर कहते हैं, "चोर की दाढ़ी में तिनका होता है तो उसको लगता है कहीं मेरी चोरी पकड़ी नहीं जाए. ईडी सबूतों, तथ्यों और सूचनाओं के आधार पर खोजबीन करने के बाद ही बड़ी कार्रवाई करती है."
दिलावर ने बीबीसी से कहा कि सूचनाएँ मिलने पर ईडी अपना काम करती है, जाँच के लिए छापेमारी करती है.
वे आगे कहते हैं, "जनता जानती है कि चोर को तो जितना जल्दी हो पकड़ना चाहिए. ज़रूर प्रभाव पड़ेगा, जनता यह बात तो समझेगी ही कि चोरों की धरपकड़ हो रही है और चोरों पर शिकंजा कसा जा रहा है. बीजेपी सरकार और ईडी कभी भी भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेगी."
वरिष्ठ पत्रकार आनंद चौधरी का मानना है कि आगामी चुनाव में ईडी की कार्रवाई का निश्चित रूप से प्रभाव पड़ेगा.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "अभी तक तो ईडी के हाथ कुछ बड़ा लगा नहीं है. ईडी के ख़ाली हाथ रहने से अभी तक तो इससे कांग्रेस को ही फ़ायदा हो रहा है. जनता की सहानुभूति कांग्रेस को मिलेगी."
वे यह भी कहते हैं, ''अगर कोई गिरफ़्तारी होती है या कोई बड़ा तथ्य ईडी पेश करती है तो कांग्रेस को नुक़सान हो सकता है. लेकिन, अभी ऐसा लग नहीं रहा है. क्योंकि वैभव गहलोत को भी 16 तारीख़ को बुलाया गया है, जिसमें बहुत समय है.''
आनंद चौधरी का कहना है कि बीजेपी के नेताओं ने गणपति प्लाज़ा, पेपर लीक मामले समेत कई आरोप लगाए, लेकिन कुछ खास मिला नहीं. बीजेपी नेताओं के आरोप के तुरंत बाद ईडी की एंट्री देखी गई है. कांग्रेस इसको लेकर ज़रूर चुनानी मुद्दा बनाएगी.
वहीं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और प्रवक्ता आरसी चौधरी बीबीसी से कहते हैं, ''जब चुनावी प्रचार चरम पर है और एसे समय में सीएम के बेटे को नोटिस दे कर बुलाना कहीं न कहीं उनकी बेदाग़ छवि को नुक़सान पहुँचाने का कुत्सित प्रयास है. इससे किसी को लाभ होगा या नहीं होगा, लेकिन देश का लोकतंत्र ज़रूर कमज़ोर होता है.''
ईडी की कार्रवाई को भुनाने के लिए अब दोनों ही दल प्रयास कर रहे हैं. बीजेपी ईडी कार्रवाई के ज़रिए कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है. जबकि, कांग्रेस ख़ुद के नेताओं को निर्दोष बताते हुए बीजेपी पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग के आरोप लगा रही है.
वैभव गहलोत हैं लॉ ग्रेजुएट
43 साल के वैभव गहलोत लॉ ग्रेजुएट हैं. वे 2006 में युवा कांग्रेस से जुड़े हैं. उन्हें 2014 में प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासिचव बनाया गया था.
राज्य की सत्ता के शीर्ष पर अशोक गहलोत के रहते हुए भले ही वैभव गहलोत आरसीए अध्यक्ष पद की दौड़ में लगातार दो बार अव्वल रहे हैं.
लेकिन, वे दिल्ली की दौड़ के कमज़ोर खिलाड़ी साबित हो चुके हैं.
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में जब सूबे के मुख्यमंत्री की ज़िम्मेदारी संभालते हुए अशोक गहलोत को महज़ पांच महीने ही बीते थे.
वे अपने बेटे वैभव के लिए को जोधपुर संसदीय सीट से कांग्रेस का टिकट दिलाने में कामयाब रहे.
लेकिन अशोक गहलोत अपने बेटे को जिता नहीं सके.
बीजेपी के गजेंद्र सिंह शेखावत ने वैभव गहलोत को दो लाख से ज़्यादा वोट से शिकस्त दी. उस चुनाव में राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी.
इसके बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी की हार का ठीकरा अपने बेटों को चुनाव लड़वाने वाले मुख्यमंत्रियों पर फोड़ा था.
इनमें से एक थे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत. सबसे ज़्यादा सवाल अशोक गहलोत पर ही उठे.
अशोक गहलोत पर ये आरोप भी लगे कि उन्होंने बेटे को जिताने के लिए सारा ध्यान जोधपुर पर ही लगाया.
इसलिए सभी सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है और जोधपुर सीट पर कांग्रेस बुरी तरह से हार गई.
लगातार दूसरी बार आरसीए अध्यक्ष बने वैभव
राजनीति से अलग वैभव गहलोत राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के लगातार दूसरी बार अध्यक्ष हैं.
वैभव गहलोत ने पहली बार 2019 में आरसीए अध्यक्ष पद का चुनाव कांग्रेसी नेता रामेश्वर डूडी के सामने जीता था.
जबकि दूसरी बार दिसंबर 2022 में हुए चुनाव में वैभव ने आरसीए अध्यक्ष पद का चुनाव निर्विरोध जीता.
आरसीए में वैभव गहलोत का वैभव बढ़ाने के पीछे सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डॉ. सीपी जोशी का बड़ा योगदान माना जाता है.
हालाँकि क्रिकेट जगत से जुड़े लोग मानते हैं कि वैभव गहलोत के आरसीए का अध्यक्ष बनने के बाद राजस्थान क्रिकेट को नया जीवन मिला है.
लंबे अरसे बाद यहाँ अंतरराष्ट्रीय मैच खेले गए, आईपीएल के कई मैच आयोजन की ज़िम्मेदारी भी आरसीए ने उठाई है.
देशभर में चर्चित 'लाल डायरी' का ज़िक्र करते हुए गहलोत सरकार से बर्खास्त मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने वैभव गहलोत पर गंभीर आरोप लगाए थे. उनका आरोप था कि आरसीए चुनाव में पैसों का लेनदेन हुआ है.
ईडी कार्रवाई पर कांग्रेस का विरोध
पीसीसी अध्यक्ष पर ईडी के छापे और वैभव गहलोत को समन मिलने के बाद सीएम अशोक गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई.
वैभव गहलोत को जारी हुए समन के विरोध में पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने दिल्ली से प्रेस कॉन्फ़्रेंस की.
उन्होंने ईडी की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया और वैभव गहलोत का बचाव भी किया.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में ईडी कार्यालय पर प्रदर्शन किया.
एनएसयूआई ने पीएम मोदी का पुतला जला कर विरोध दर्ज किया.
इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर राजनीतिक द्वेष से कार्रवाई का आरोप लगाया है.
सीएम अशोक गहलोत ने कहा, "मेरे बेटे वैभव गहलोत को ईडी में हाज़िर होने का समन दिया है. अब आप समझ सकते हैं, जो मैं कहता आ रहा हूँ कि राजस्थान के अंदर ईडी की रेड रोज़ इसलिए होती है क्योंकि भाजपा ये नहीं चाहती कि राजस्थान में महिलाओं को, किसानों को, ग़रीबों को कांग्रेस द्वारा दी जा रही गारंटियों का लाभ मिल सके."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)