आप इस वेबसाइट का टेक्स्ट-ओनली वर्शन देख रहे हैं जो कम डेटा खर्च करता है. सभी तस्वीरों और वीडियो के साथ वेबसाइट का मुख्य वर्शन देखें.
शरद पवार के कुनबे में कौन-कौन, किसका कितना रुतबा
प्रियंका झा
बीबीसी संवाददाता
अजित पवार की प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल जैसे बड़े नेताओं के साथ बग़ावत ने शरद पवार की खड़ी की हुई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी को दो धड़ों में बांट दिया है.
हालांकि, जानकार मानते हैं कि केवल पार्टी नहीं बल्कि पवार परिवार भी इस बग़ावत की वजह से दो हिस्सों में बंटा हुआ नज़र आ रहा है.
एक गुट है शरद पवार का, जहाँ उनके साथ उनकी बेटी सुप्रिया सुले और शरद पवार के बड़े भाई अप्पासाहेब के पोते रोहित पवार खड़े दिख रहे हैं.
जबकि सामने हैं अजित पवार और उनके बेटे पार्थ पवार.
फिलहाल एनसीपी पर कब्ज़े के लिए शरद पवार और अजित पवार लगातार अपने-अपने दावे कर रहे हैं.
शरद पवार खुद को अभी भी एनसीपी चीफ़ बता रहे हैं, जबकि अजित पवार अपने चाचा को अब रिटायर होने की सलाह दे रहे हैं.
छह दशक से अधिक समय राजनीति में बिताने वाले शरद पवार की तीसरी पीढ़ी भी अब सक्रिय राजनीति में कदम रख चुकी है.
आइए जानते हैं कि महाराष्ट्र से दिल्ली तक की राजनीति में दबदबा रखने वाले शरद पवार के इस परिवार में कौन-कौन है.
पवार के परिवार में कौन-कौन?
शरद पवार का जन्म 1940 में बारामती के किसान नेता के घर में हुआ. उनके पिता गोविंदराव की इस क्षेत्र में कोऑपरेटिव चीनी मिल लगाने में अहम भूमिका मानी जाती है.
शरद पवार के पिता ने पूरे बारामती के गन्ना उत्पादकों को एकजुट किया और एक सहकारी समिति बनाई.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट कहती है कि शरद पवार गोविंदराव और शारदाबाई पवार के 11 बच्चों में से आठवीं संतान हैं.
पवार का परिवार सूखे की वजह से सतारा से विस्थापित हुआ और बारामती ज़िले के काटेवाडी में आ बसा. यहाँ परिवार ने गन्ने की खेती की और धीरे-धीरे गन्ना उत्पादकों के बीच बड़ा नाम बना.
शरद पवार के अलावा उनके सभी भाई-बहनों का भी अपने-अपने क्षेत्र में नाम है.
साल 1938 में शारदाबाई पुणे लोकल बोर्ड चुनाव में निर्विरोध चुनी गईं. उस समय पुणे ज़िले में गिनी-चुनी महिला नेताओं में उनका नाम गिना जाता था.
शरद पवार अक्सर कहते आए हैं कि कड़ी मेहनत का सम्मान और जनता के हितों के प्रति समर्पण का भाव उन्हें और उनके भाई-बहनों को माँ से ही मिला.
पवार के सबसे बड़े भाई वसंतराव पवार भी एक जाने-माने वकील थे लेकिन एक ज़मीन विवाद में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वसंतराव के अलावा शरद पवार के तीन अन्य भाई अब इस दुनिया में नहीं हैं. इनमें पेशे से किसान दिनकरराव पवार, अनंतराव पवार जो अजित पवार के पिता हैं और माधवराव पवार शामिल हैं, जिन्होंने अपनी कई औद्योगिक इकाइयां लगाईं. शरद पवार के एक भाई सूर्यकांत पवार हैं जो पेशे से आर्किटेक्ट हैं. प्रताप पवार सकल मीडिया ग्रुप के प्रमुख हैं.
शरद पवार की बहनें- सरला, सरोज पाटिल, मीना जगधाने और नीला सासणे राजनीति से दूर रहीं.
हालांकि, सरोज पाटिल महाराष्ट्र में लेफ़्ट मूवमेंट के बड़े नेता दिवंगत नारायण द्यानदेव पाटिल की पत्नी हैं. शरद पवार और एनडी पाटिल हमेशा दो धुर विरोधी विचारधाराओं से जुड़े रहे लेकिन जानकार कहते हैं कि दोनों के निजी रिश्तों पर कभी इसका असर नहीं दिखा.
पवार के पावरफ़ुल बनने की कहानी
पुणे यूथ कांग्रेस के सदस्य के तौर पर साल 1958, यानी महाराष्ट्र राज्य के गठन से दो साल पहले शरद पवार ने अपना राजनीतिक सफ़र शुरू किया था.
इसके चार सालों के अंदर ही वो पुणे ज़िले में यूथ कांग्रेस अध्यक्ष बन चुके थे.
और उसके पाँच साल बाद 1967 से शरद पवार चुनावी राजनीति में सक्रिय हैं.
इसी साल वो पहली बार बारामती से विधानसभा चुनाव जीते थे.
यहां से महाराष्ट्र विधानसभा या संसद में उनका सफ़र बिना रुके तब तक चलता रहा, जब तक साल 2019 में उन्होंने खुद ही चुनावी राजनीति से संन्यास का एलान नहीं किया.
शरद पवार चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे और रक्षा, कृषि जैसे अहम मंत्रालयों का ज़िम्मा संभालते हुए केंद्रीय कैबिनेट में भी उन्होंने अच्छा-ख़ासा समय बिताया.
शरद पवार की शख्सियत ऐसी है कि उनके समर्थक उन्हें 'साहेब' कहकर बुलाते हैं और उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का 'चाणक्य' भी कहा जाता है.
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि अपने राजनीतिक करियर के शुरुआती दिनों में ही पवार को पसोपेश की स्थितियों का सामना करना पड़ा था.
उस समय के कांग्रेस नेता केशवराव जेढे के निधन के बाद बारामती में उपचुनाव का एलान हुआ था. तब संयुक्त महाराष्ट्र समिति ने शरद पवार के भाई वसंतराव को अपना प्रतिनिधि बनाने का फ़ैसला किया था.
दूसरी तरफ़ कांग्रेस पार्टी ने यहाँ से जेढे के बेटे गुलाबराव को उम्मीदवार बनाया और शरद पवार से उनका चुनाव प्रचार करने के लिए कहा.
अपनी आत्मकथा लोक मज़े संगति में शरद पवार ने लिखा है, "परिवार में सब मेरे रुख को दिलचस्पी से देख रहे थे. कांग्रेस, जिसका मैं सदस्य था, ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा वाला बना दिया था. हालांकि, मेरी मां का धन्यवाद जो मेरे परिवार ने परिपक्वता दिखाई और बड़े भाई (वसंतराव) ने भी कांग्रेस उम्मीदवार के लिए काम करने वाले मेरे रुख को समझा."
पत्नी प्रतिभा पवार
जब इसी साल मई में शरद पवार ने एनसीपी अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़े का एलान किया तो वो मंच पर अपनी पत्नी, बेटी और भतीजे अजित पवार के साथ सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बैठे थे.
ये सब शरद पवार की आत्मकथा के दूसरे पार्ट के विमोचन के लिए जुटे थे.
इसी दौरान शरद पवार की पत्नी प्रतिभा पवार को अजित पवार से कुछ बात करते हुए देखा गया.
ये उन दुर्लभ मौकों में से एक था, जब प्रतिभा पवार इस तरह से किसी कार्यक्रम में शामिल हुई हों.
शरद पवार की राजनीति को करीब से देखने वाले राजनीतिक विश्लेषक प्रताप अस्बे बताते हैं कि प्रतिभा पवार कभी राजनीतिक मंचों पर नहीं आईं. यहाँ तक कि वो राजनीतिक बैठकों से भी दूर ही रहती थीं.
लेकिन बहुत कम ही लोग ये जानते हैं कि जब साल 2019 नें अजित पवार ने बीजेपी के साथ सरकार बना ली थी तब प्रतिभा ने उन्हें वापस लाने में अहम भूमिका निभाई थी.
हिंदुस्तान टाइम्स ने एक रिपोर्ट में शरद पवार की किताब के हवाले से इस वाकये के बारे में विस्तार से बताया है.
इसके मुताबिक, "अजित के भाई श्रीनिवास को उनसे बात करने के लिए कहा गया...मेरी पत्नी प्रतिभा और अजित के बीच बहुत गहरा रिश्ता है. प्रतिभा कभी भी राजनीतिक गतिविधियों में नहीं पड़तीं, लेकिन अजित का मामला परिवार से जुड़ा था."
प्रतिभा पवार से मिलने के बाद अजित पवार ने माफ़ी मांगी और तेज़ी से बदलते घटनाक्रम को विराम दिया.
अजित पवार
शरद पवार के बड़े भाई के बेटे अजित पवार ने साल 1982 में अपने राजनितिक जीवन की शुरुआत की थी. उन्होंने सबसे पहले महाराष्ट्र में को-ऑपरेटिव चुनाव लड़ा था जिसमे जीत हासिल कर राजनीतिक सफर में सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ी.
अजित पवार की ज़िन्दगी में साल 1991 में उस समय बड़ा मोड़ आया जब वो पुणे डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमेन नियुक्त हुए.
अजित 1991 में बारामती से सांसद चुने गए, लेकिन चाचा शरद पवार के लिए उन्होंने ये सीट खाली कर दी. बाद में, वह बारामती से विधायक निर्वाचित हुए और छह बार इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया.
प्रताप अस्बे कहते हैं कि बारामती के चुनाव होते तो शरद पवार का सारा काम अजित पवार ही देखा करते थे.
यही कारण है कि अजित पवार को एनसीपी प्रमुख पद का सबसे बड़ा दावेदार माना जाने लगा.
साल 2005 और 2006 के बीच तक सब ठीक चल रहा था.
लेकिन इसके बाद शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले की महाराष्ट्र की राजनीति में एंट्री हुई और चीज़ें पहले सी नहीं रहीं.
अजित पवार की शादी सुनेत्रा पवार से हुई.
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार सुनेत्रा राज्य के पूर्व मंत्री पद्मसिंघ बाजीराव पाटिल की बेटी हैं, जिन्होंने एक दशक पहले तक शरद पवार के अंतर्गत काम किया है.
अजित पवार के भाई श्रीनिवास का एग्रीकल्चर और ऑटोमोबाइल्स का बिज़नेस है. वहीं उनकी बहन का नाम विजया पाटिल है जो मीडिया क्षेत्र से जुड़ी बताई जाती हैं.
अजित पवार ने बीते रविवार को पाँचवीं बार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पद की शपथ ली.
महाराष्ट्र में 1999 से 2014 के बीच 15 साल तक चली कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में अजित पवार हमेशा अहम ज़िम्मेदारी संभालते रहे.
पहली बार अजित पवार साल 2010 में उपमुख्यमंत्री बने, फिर भ्रष्टाचार के आरोपों में इस्तीफ़ा देना पड़ा. लेकिन चाचा शरद पवार के साथ से 2012 में उन्होंने फिर से डिप्टी सीएम पद संभाला.
एक समय में ये माना जाता था कि एनसीपी को असल में अजित पवार ही चला रहे हैं.
इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र की कई सरकारों में वित्त, जल संसाधन, ऊर्जा जैसे अहम मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी भी संभाली.
साल 2019 में चुनाव के बाद अचानक एक सुबह अजित पवार ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ भी ली.
बहुमत न हो पाने की वजह से देवेंद्र फ़डणवीस की ये सरकार तीन दिन चली और फिर उद्धव ठाकरे सीएम बने.
एनसीपी-कांग्रेस और शिवसेना की इस गठबंधन सरकार में एक बार फिर अजित पवार डिप्टी सीएम बने लेकिन उन्हें अपनी ही पार्टी के अंदर साइडलाइन किया जाने लगा.
सुप्रिया सुले
सुप्रिया सुले हमेशा ये कहती आई हैं कि भाई अजित पवार से उनके अच्छे रिश्ते हैं.
दोनों भाई-बहन की शख्सियत भी अलग-अलग बताई जाती है.
अजित पवार को ज़मीन से जुड़ा नेता माना जाता है, जिनकी महाराष्ट्र में पकड़ है तो वहीं सुप्रिया सुले को दिल्ली की राजनीति से जोड़ा जाता है.
प्रताप अस्बे सहित कई जानकारों की नज़र में पवार परिवार में दरार काफ़ी पहले से दिखने लगी थी.
प्रताप अस्बे ये भी कहते हैं कि सियासी दुनिया में जो हो रहा है, उसका असर निजी रिश्तों पर भी होगा, भले ही कोई कुछ भी कहे.
साल 2006 में सुप्रिया सुले राज्यसभा सांसद बनी थीं. तीन साल तक राज्यसभा में रहने के बाद 2009 में उन्होंने पहली बार बारामती से लोकसभा चुनाव लड़ा.
सुप्रिया सुले ने 1991 में बिज़नसमैन सदानंद बालचंद्र सुले से शादी की थी. दोनों का एक बेटा विजय और बेटी रेवती सुले हैं.
पब्लिक लाइफ़ से दूरी रखने वाले सदानंद सुले के पिता बालचंद्र आर. सुले महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर थे.
सुले ने 2009 के बाद 2014 और 2019 में भी बारामती से लोकसभा चुनाव जीता.
साल 2011 में कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ़ सुप्रिया सुले ने एक राज्यव्यापी अभियान शुरू किया और पदयात्रा की थी, जिसको लेकर वो ख़ूब सुर्खियों में रहीं.
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने पार्टी के 25वें स्थापना दिवस यानी 10 जून को ही सुप्रिया सुले और प्रफ़ुल्ल पटेल को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया.
शरद पवार ने कुछ दिन पहले ही पार्टी के अध्यक्ष पद को छोड़ने का एलान किया था. हालांकि, पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के दबाव के बाद पवार पद पर बने रहने को तैयार हो गए थे.
राजनीतिक गलियारों में कार्यकारी अध्यक्षों को लेकर पवार के इस एलान को इस तरह डिकोड किया गया कि अब उन्होंने परोक्ष रूप से ये बता दिया है कि एनसीपी की कमान सुप्रिया सुले के पास होगी.
पवार परिवार की तीसरी पीढ़ी भी राजनीति में सक्रिय
शरद पवार के बड़े भाई अप्पासाहेब पवार के दो बेटे हैं. राजेंद्र और रंजीत.
राजेंद्र पवार एग्रो बिज़नेस से ताल्लुक रखते हैं, वहीं रंजीत वाइन इंडस्ट्री से जुड़ा कारोबार देखते हैं.
राजेंद्र के बेटे हैं रोहित पवार, जिन्हें शरद पवार का करीबी माना जाता है.
अजित पवार की बग़ावत के बाद रोहित कदम-कदम पर शरद पवार के साथ दिख रहे हैं.
सोमवार को पुणे में शरद पवार के साथ उनके आवास पर रोहित थे दे और फिर उसी दिन रोहित कराड में भी दिखे, जहाँ शरद पवार ने शक्ति प्रदर्शन किया.
रोहित फिलहाल कर्जत-जामखेड से विधायक हैं लेकिन उन्होंने 2017 में पुणे ज़िला परिषद का चुनाव रिकॉर्ड वोटों से जीतकर राजनीति में कदम रखा था.
माना जाता है कि रोहित के एनसीपी में बढ़ते कद ने भी अजित पवार को असहज किया.
द प्रिंट की ख़बर के अनुसार, रोहित भी शरद पवार की तरह ही क्रिकेट से जुड़े हुए हैं. इसी साल वो महाराष्ट्र क्रिकेट संघ के अध्यक्ष चुने गए.
एक समय पर शरद पवार भी बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (बीसीसीआई) के चेयरमैन रह चुके हैं. इसके बाद वो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के भी अध्यक्ष रह चुके हैं.
पवार परिवार की तीसरी पीढ़ी में एक और बड़ा नाम पार्थ का है.
पार्थ, एनसीपी में दो फाड़ कर चुके अजित पवार के बेटे हैं.
हालांकि, 2019 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद उनका राजनीतिक करियर ख़ास आगे नहीं बढ़ सका.
बल्कि वो पवार परिवार के अकेले ऐसे सदस्य बन गए, जिसे किसी चुनाव में हार मिली हो.
ये भी पढ़ें:
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)