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जियो के आईपीओ ने खुलते ही बनाया रिकॉर्ड, लिस्टिंग पर कैसा रहा है कई दिग्गज आईपीओ का हाल
दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के टेलीकम्युनिकेशन वेंचर जियो के आईपीओ ने खुलते ही रिकार्ड बना डाला.
बुधवार को इश्यू खुलते ही क्वालिफ़ाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) कैटेगरी दस मिनट में ही दोगुना से भी ज्यादा सब्सक्राइब हो गया.
इस कैटेगरी के लिए 4,90,07,827 शेयर ऑफ़र हुए थे लेकिन आधे घंटे से भी कम वक़्त में डिमांड रिजर्व्ड अमाउंट से दोगुनी हो गई थी.
जियो इस आईपीओ के ज़रिये 30,213 करोड़ रुपये जुटाएगी. कंपनी इस रकम का इस्तेमाल अपना कर्ज़ चुकाने और रिलायंस जियो इन्फ़ोकॉम का विस्तार करने में करेगी.
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट के मुताबिक कुल मिलाकर आईपीओ पहले दिन तीन गुना ओवर सब्सक्राइब्ड हुआ. क्यूआईबी कैटेगरी में 9 गुना बोलियां मिली हीं, जबकि रिटेल निवेशकों का हिस्सा 68 फ़ीसदी सब्सक्राइब्ड हो गया है.
जियो का आईपीओ भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है. सितंबर महीने में आया नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का आईपीओ 22,560 करोड़ रुपये का था.
जियो प्लेटफ़ॉर्म्स ने अपने आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है.
यह इश्यू शुक्रवार को बंद होगा.
यह आईपीओ ऐसे समय में आया है जब भारतीय शेयर बाज़ार उथल-पुथल के दौर से गुज़र रहा है. एनएसई का प्रमुख सूचकांक निफ़्टी-50 इस साल अब तक 12 फ़ीसदी से ज़्यादा गिर चुका है.
निफ़्टी-50 में भारत की 50 प्रमुख कंपनियों के शेयर शामिल हैं.
जियो के आईपीओ को मिला जबरदस्त रेस्पॉन्स इस मायने में अहम है क्योंकि अब तक 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के 13 आईपीओ में से आठ ने शेयर बाज़ार वैसी शुरुआत नहीं की, जिसकी ज़्यादातर निवेशक उम्मीद कर रहे थे.
केजरीवाल रिसर्च एंड इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के अरुण केजरीवाल ने बीबीसी से कहा कि शेयर बाज़ार में सुस्ती के बावजूद आईपीओ बाज़ार में लगातार हलचल है. आकर्षक वैल्यूएशन और आने वाले समय में कारोबार में विस्तार की क्षमता रखने वाली टेक्नोलॉजी कंपनियों में दिलचस्पी के कारण संस्थागत और छोटे निवेशक, दोनों आईपीओ में निवेश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि आईपीओ की क़ीमतें इस तरह तय की जा रही हैं कि वे पहले से शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध कंपनियों के मुक़ाबले कम वैल्यूएशन और कम प्राइस-टु-अर्निंग (पी/ई) रेशियो को दर्शाती हैं. इससे आईपीओ निवेशकों के लिए आकर्षक बन रहे हैं.
पी/ई रेशियो से पता चलता है कि निवेशक किसी कंपनी की कमाई के हर एक रुपये के लिए कितनी क़ीमत चुकाने को तैयार हैं.
पांच बड़े आईपीओ का क्या हाल रहा
एनएसई
इसी साल सितंबर महीने में एनएसई का शेयर भारतीय शेयर बाज़ार में लिस्ट हुआ था. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया के शेयर अपने इश्यू प्राइस से महज़ 0.84 फ़ीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे.
ह्यूंदै मोटर्स इंडिया
अक्तूबर 2024 में ह्यूंदै मोटर्स इंडिया के 27,858 करोड़ रुपये के आईपीओ की शुरुआत भी फीकी रही थी.
इसके शेयर 1,960 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 1,934 रुपये प्रति शेयर पर लिस्ट हुए थे.
एलआईसी
देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी की शेयर बाज़ार में लिस्टिंग भी निवेशकों के लिए निराशाजनक रही थी.
मई 2022 में एलआईसी के शेयर 949 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 867.20 रुपये पर लिस्ट हुए थे. यह इश्यू प्राइस से 8.62 फ़ीसदी कम था.
पेटीएम
पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस के 18,300 करोड़ रुपये के आईपीओ का सफ़र नवंबर 2021 में लिस्टिंग के बाद से कई बड़े उतार-चढ़ाव से भरा रहा है.
पेटीएम के शेयर 2,150 रुपये के आईपीओ प्राइस के मुकाबले 1,950 रुपये पर लिस्ट हुए थे. यह इश्यू प्राइस से 9.3 फ़ीसदी कम था.
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया का आईपीओ अक्तूबर 2025 में आया था और इसे भी निवेशकों का भारी समर्थन मिला था. इसके शेयर इश्यू प्राइस से 50 फ़ीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे.
इस लिहाज से देखें तो बड़े आईपीओ के बीच लिस्टिंग के दिन यह सबसे बड़ा उछाल था.
जियो के सामने क्या है चुनौतियां
सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जियो मजबूत नेटवर्क के मामले में काफ़ी आगे है.
बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे और लगातार गहराते डिजिटल इकोसिस्टम के दम पर जियो मध्यम से लंबी अवधि में ग्रोथ की अच्छी संभावना बनाए रख सकती है.
हालांकि, विश्लेषकों ने यह भी आगाह किया है कि कंपनी के लिए प्रतिस्पर्धा तेज बना रहेगा. इसमें सर्विस की क़ीमतों को लेकर जंग और ग्राहकों के दूसरी कंपनियों की ओर जाने का संभावित जोखिम शामिल है.
हाल ही में टेक्नोलॉजी क्षेत्र के अरबपति एलन मस्क ने कम कीमत वाली सेवाओं के लिए पहचाने जाने वाले रिलायंस जियो को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी थी.
उन्होंने एलान किया कि उनकी कंपनी स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भारत में किफ़ायती कीमत पर उपलब्ध कराई जाएगी.
भारत में व्यावसायिक सेवा शुरू करने के लिए अंतिम मंज़ूरी मिलने में हो रही देरी के बीच मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अंबानी की आलोचना की थी.
यह आलोचना तब और तेज़ हो गई, जब मस्क ने सवाल उठाया कि क्या अंबानी ही "भारत के असली बॉस" हैं.
अंबानी या रिलायंस ने इन हमलों पर सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया.
रिटेल निवेशक लंबे समय से रिलायंस समूह की कंपनियों को संपत्ति बनाने वाली कंपनियों के तौर पर देखते आए हैं और समूह की कंपनियों के आईपीओ का इंतज़ार करते रहे हैं.
रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी शेयरधारकों को मशहूर तौर पर "रिलायंस परिवार" का हिस्सा कहते थे.
यह परंपरा आगे भी जारी रही है और इससे रिटेल निवेशकों का एक वफ़ादार बेस तैयार हुआ है.
जियो प्लेटफ़ॉर्म्स का आईपीओ दो दशक में रिलायंस समूह का पहला पब्लिक इश्यू है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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