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पुरुषों के लिए पेशाब बैठकर करना ज़्यादा सही है या खड़े होकर
- Author, फ़र्नान्डो डुआर्टे
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
पुरुषों के लिए पेशाब करने का सही तरीक़ा क्या है? यह ऐसा सवाल है, जिस पर पुरुषों के बीच बहस होती रहती है.
हालांकि मेडिकली अभी तक कोई पक्का सबूत नहीं मिला है कि बैठकर पेशाब करने से सेहत को फ़ायदा होता है.
हालांकि इस पर एक किस्म की सहमति है कि बैठकर पेशाब करना ज़्यादा ठीक तरीक़ा है.
ब्रिटेन की यूरोलॉजी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉक्टर मैरी गार्थवेट ने बीबीसी को बताया, "पेशाब करने का कोई एकदम सही या ग़लत तरीक़ा नहीं है, यह हर शख्स पर निर्भर करता है. लेकिन अगर टॉइलेट साफ़ हो तो बैठकर करना ज़्यादा सुरक्षित है."
डॉक्टर मैरी गार्थवेट कहती हैं कि जिन्हें चलने-फिरने या बैलेंस करने में दिक्क़त है, या रात को नींद खुलने पर सीधे टॉइलेट भागना पड़ता है, उनके लिए बैठना कहीं ज़्यादा सुरक्षित रहता है.
2014 में नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में डाक्टरों ने यह देखा कि बॉडी पोजिशन पेशाब की गति और ब्लैडर ख़ाली होने के समय को कैसे प्रभावित करती है.
इस स्टडी में पाया गया कि जिन पुरुषों का प्रोस्टेट बढ़ा हुआ था, वे बैठकर पेशाब करने से ब्लैडर तेज़ी से और पूरी तरह ख़ाली कर पाते थे. लेकिन हेल्दी पुरुषों में इसका कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं दिखा.
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सच तो यह है कि ज़्यादातर पुरुषों के लिए खड़े होकर पेशाब करना बहुत आसान और व्यावहारिक तरीक़ा है.
इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पब्लिक टॉइलेट में लड़कियों की तुलना में लड़कों की लाइन कितनी तेज़ चलती है.
लेकिन खड़े होकर पेशाब करने से छींटे पड़ने का डर ज़्यादा रहता है और यह किसी और के लिए बड़ा गंदा अनुभव हो सकता है.
यहां बात सिर्फ़ सीट या फर्श पर ग़लती से पड़ने वाली बूंदों की नहीं है. 2013 में अमेरिकी इंजीनियरों ने देखा कि खड़े होकर पेशाब करते वक़्त माइक्रोस्कोपिक बूंदें बहुत अलग-अलग कोणों में और बहुत दूर तक उड़ती हैं. इतनी कि पास में रखा टूथब्रश उनसे नहीं बच पाता.
हालांकि कुछ संस्कृतियों में बैठने की सलाह दी जाती है. उदाहरण के लिए, इस्लाम में इसे सुन्नत का हिस्सा माना जाता है, जो पैग़ंबर मोहम्मद के समय से चली आ रही परंपराओं और तरीक़ो में से एक है.
लेकिन पुरानी आदतें आसानी से कहाँ जाती हैं. ज़्यादातर पुरुष आज भी खड़े होकर ही 'एक नंबर' करते हैं.
2023 में यूगॉव (YouGov) ने 13 देशों में सर्वे किया था कि पुरुष अपना ब्लैडर खाली करने के लिए कौन सा तरीक़ा पसंद करते हैं.
इसके नतीजे हैरान करने वाले थे. जर्मनी में 40% पुरुषों ने कहा कि वह हर बार बैठकर पेशाब करते हैं, सिर्फ़ 10% ने ही कहा कि वह हमेशा खड़े होकर करते हैं.
ब्रिटेन में सिर्फ़ 9% हर बार बैठते हैं, 33% हमेशा खड़े रहकर पेशाब करते हैं.
हैरानी की बात तो यह है कि जर्मनी में बैठकर पेशाब करने वाले को 'ज़िट्ज़पिंकलर' (एक आदमी जो बैठकर पेशाब करता है) कहकर चिढ़ाया जाता है, जिसे मर्दों जैसा बर्ताव नहीं माना जाता.
ब्राज़ील में तो पुरानी कहावत है कि "बैठकर पेशाब करना औरतों और मेंढकों का काम है".
'सदियों पुरानी वजह'
क्या पुरुषों को पेशाब करने का तरीक़ा बदलने के लिए सदियों पुरानी आदतों से लड़ना पड़ता है? ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के विकासवादी मनोविज्ञान के विशेषज्ञ डॉक्टर रॉबर्ट डनबार कहते हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है.
वह कहते हैं, "खड़े होकर पेशाब करने की कोई भी सदियों पुरानी वजह नहीं है."
यानी बैठकर पेशाब करने के विचार को ही नापसंद करने वाले पुरुषों के लिए बहाना बनाने की गुंजाइश ख़त्म.
डॉक्टर गार्थवेट कहते हैं, "सच तो यह है कि कुछ पुरुषों को खड़े होकर पेशाब करना आरामदायक लगता है, कुछ को बैठकर."
तो जब तक डॉक्टर साफ़-साफ़ न कह दे, दुनिया भर के आदमियों के लिए ये उनकी मर्ज़ी का मामला रहेगा.
हाँ, अगर बीवी-गर्लफ्रेंड दबाव डाल रही हों या टॉइलेट की दीवार पर जर्मन स्टाइल में लिखा हो 'कृपया बैठ जाएं', तो शायद थोड़ा सोचना पड़े.
लेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं. ये किसी संस्था के नज़रिये को प्रदर्शित नहीं करते
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.