सीजेपी प्रोटेस्ट: नेता हिरासत में, पुलिस कार्रवाई पर यूएन ने उठाए सवाल, अब आगे क्या?

सारांश
  • अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को पुलिस ने फ्लाइट से ही हिरासत में ले लिया
  • नेहा बोरा, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और दीपांकर भट्टाचार्य को हिरासत में लिया गया
  • विपक्ष के नेताओं में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी हिरासत में लिया गया
  • ध्रुव राठी को विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले पुलिस ने हिरासत में लिया
  • जंतर मंतर पर प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था
  • राजधानी में पुलिस और अर्द्धसैनिकों बलों के 25 से 30 हजार जवान तैनात
  • सीजेपी समेत कई संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली में 10 अक्तूबर को प्रोटेस्ट की कॉल दी थी
  • संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन ने पुलिस कार्रवाई पर चिंता ज़ाहिर की
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दिल्ली में शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हुई पुलिस की कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन ने चिंता जताई है.

इस प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें होने की ख़बरें सामने आईं.

यूएन ह्यूमन राइट्स ने हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल और बिना शर्त रिहा किए जाने की मांग की है.

एक्स पर एक बयान जारी में संगठन ने कहा, "दिल्ली में आज बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, प्रदर्शन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को बड़ी संख्या में हिरासत में लिए जाने की ख़बरों को लेकर हम चिंतित हैं."

"हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि शांतिपूर्ण तरीके से सभा करने के अधिकार का पूरी तरह सम्मान किया जाए और इसे सुनिश्चित किया जाए."

देर शाम नेताओं की रिहाई

जंतर-मंतर के आसपास के इलाक़ों में शनिवार का पूरा दिन हंगामाखेज़ रहा. सीजेपी और विपक्ष के कई नेताओं के साथ बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया गया.

शाम तक दिल्ली पुलिस ने कई नेताओं को रिहा कर दिया. इनमें आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल समेत अन्य लोग शामिल हैं.

जिन वकीलों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें भी सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद छोड़ दिया गया.

हालांकि, विमान से ही हिरासत में लिए गए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास के साथ-साथ ध्रुव राठी की रिहाई को लेकर ख़बर लिखे जाने तक कोई जानकारी नहीं मिली थी.

इस बीच, राजधानी में मेट्रो और ट्रेनों का संचालन प्रभावित होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना याचिका दाख़िल की गई. सुप्रीम कोर्ट रविवार को इस पर विशेष सुनवाई करेगा.

प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर हिंसा की ख़बरें आईं. सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो भी सामने आए, जिनमें कुछ अज्ञात लोग प्रदर्शनकारियों पर हमला करते दिखे.

हिरासत में लिए गए कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उनके साथ ज़्यादती की गई, जबकि दिल्ली पुलिस ने इससे इनकार किया है.

उधर, ममता बनर्जी ने कहा है कि सोमवार यानी 12 अक्तूबर को विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक का प्रदर्शन होगा. उन्होंने कहा कि वह कोलकाता लौटने के बजाय इसमें शामिल होंगी.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि सोमवार को दिल्ली में एक बड़ा प्रदर्शन मार्च निकाला जाएगा.

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में नहीं थे. इस पर कुछ सवाल भी उठे. हालांकि, शाम को उन्होंने एक संदेश जारी कर प्रदर्शनकारियों के समर्थन की बात कही.

इस बीच शनिवार रात को सीजेपी प्रदर्शन की नई ज़िम्मेदारी संभालने वाले अजिंक्य शिंदे ने रविवार को सुबह 11 बजे जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है.

दिन भर क्या क्या हुआ?

दिन भर प्रदर्शनकारियों को हिरासत लिए जाने की ख़बर आती रही और इस दौरान कई जगहों पर हिंसा की ख़बरें भी सामने आईं.

वहीं कनॉट प्लेस में ही प्रदर्शन कर रहे सीजेपी के समर्थकों और एंटी सीजेपी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई.

बीबीसी संवाददाता विष्णुकांत तिवारी ने बताया कि सीजेपी विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सीजेपी सपोर्टर्स के साथ धक्का-मुक्की की, उनके ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की और आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया.

इस दौरान पुलिस एंटी सीजेपी प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोई कोशिश करती नहीं दिखी. जब बीबीसी ने पुलिस से इस बारे में पूछना चाहा तो मौक़े पर मौजूद पुलिस के जवानों ने कोई जवाब नहीं दिया.

बीबीसी से बात करते हुए एक सीजेपी प्रदर्शनकारी ने कहा, "वे लोग हमारे ख़िलाफ़ भद्दी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. हिंसक नारे लगा रहे हैं. हमें पीट रहे हैं और पुलिस उन्हें कुछ नहीं कर रही है. ये कैसा दोहरा रवैया है. हमें तो पुलिस रोक रही है. आगे नहीं बढ़ने दे रही है और उन लोगों को खुली छूट है."

बीबीसी संवाददाता राघवेंद्र राव के मुताबिक़, कनॉट प्लेस में शांतिपूर्वक धरना दे रहे सीजेपी के कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने अचानक घेर लिया. पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर बसों में ले जाने की कोशिश करने लगी.

इस बीच, एक वकील ने युवा प्रदर्शनकारियों को ले जा रही बस को रोका. इसके बाद कई प्रदर्शनकारी बस से उतरकर पुलिस हिरासत से भागने में कामयाब रहे.

राघवेंद्र राव ने सीजेपी के कई प्रदर्शनकारियों से बात की.

उनमें से एक ने कहा कि 'जब तक ज्ञानेश कुमार को हटाया नहीं जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा.'

वहीं, एक बुज़ुर्ग महिला ने कहा, "जो आज हुआ, वैसा हमने आज तक नहीं देखा. बच्चों, महिलाओं और युवाओं को टॉर्चर किया जा रहा है. जो लोग हमारी ज़िंदगी से खेल रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाओ तो हमें दबाया जा रहा है."

एक अन्य महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, "हमारे सभी लीडर्स को डिटेन कर लो, तब भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा. हर एक कॉकरोच अपने आप में एक लीडर है. हम सब अपनी ज़िम्मेदारी जानते हैं और डटे रहेंगे."

सीजेपी और कई वामपंथी संगठनों के कॉल पर राजधानी दिल्ली में 10 अक्तूबर, शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है.

इस बीच सीपीआईएमएल ने दावा किया है कि आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली के मैदान गढ़ी डिटेंशन सेंटर ले जाया गया है.

सीपीआईएमएल के दिल्ली स्टेट कमेटी मेंबर एडवोकेट सूर्य प्रकाश ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "नेहा और आइसा कार्यकर्ता निरमा के फ़ोन उनसे ले लिए गए हैं. उन्हें अलग कमरे में रखा गया है."

उन्होंने मांग की कि नेहा और उनकी साथी से वकीलों को मिलने दिया जाए.

इस बीच सीजेपी ने अपने तीनों नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास की सुरक्षा को लेकर चिंता ज़ाहिर की है. तीनों को शनिवार को दिल्ली पहुंचते ही विमान से ही हिरासत में ले लिया गया था.

इसके कुछ देर बाद सीजेपी ने एक्स हैंडल पर लिखा, "तीनों नेताओं की सुरक्षा को लेकर हम बेहद चिंतित हैं. दिल्ली पुलिस को इस तरह की जानकारी प्रेस में लीक करने के बजाय अभिजीत के परिवार और वकीलों को उनसे बात करने की अनुमति देनी चाहिए और उन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए."

सीजेपी ने समाचार एजेंसी एएनआई की उस ख़बर का हवाला दिया जिसमें दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना दी है.

इस ख़बर के अनुसार, "अब यह फैसला उन्हें करना है कि वह हिरासत में रहते हुए अपना विरोध जारी रखना चाहते हैं या अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वापस जाना चाहते हैं."

बाद में देर शाम दिल्ली पुलिस ने एक्स पर लिखा कि मानवीय आधार पर दीपके को उनके घर जाने के लिए संभावित मदद की पेशकश की गई है.

इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग के लिए सीजेपी का घोषित प्रदर्शन स्थल जंतर मंतर था लेकिन नेहा बोरा समर्थकों समेत पुलिस को चकमा देकर एम्स केपास दिल्ली हाट पहुंचकर प्रदर्शन करती दिखीं.

बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा के अनुसार, नेहा बोरा के साथ सीपीआई-एमएल के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, सीनियर वकील प्रशांत भूषण और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव को सफ़दरजंग फ़्लाईओवर से हिरासत में ले लिया गया.

हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने एक्स पर पोस्ट किया, "मैं हिरासत में हूं. आंदोलन नहीं. लोग अभी सफ़दरजंग फ़्लाईओवर पर जुट रहे हैं. अगर पहुंच सकते हैं, तो पहुंचिए. अगर आपको रोका जाए, तो वहीं बैठ जाइए और डटे रहिए. हमें हिरासत में लिया गया है. लेकिन इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता."

"मेरे साथी जेन ज़ी, यह हमारा 1942 है. उनकी जेलों में हममें से कुछ लोग तो समा सकते हैं, लेकिन हम सब नहीं. आज हममें से किसी को भी जहां रोका जाए, वहीं बैठकर शुरुआत कर दें. हर नुक्कड़ जंतर-मंतर बन जाएगा."

मार्च निकालने से पहले उन्होंने लोगों से दिल्ली हाट आने की अपील की थी और कहा था कि अब यही जंतर-मंतर होगा.

नेहा बोरा पिछले कुछ महीनों के प्रदर्शनों के दौरान कई बार पुलिस से आमना-सामना कर चुकी हैं. जबकि दीपके के सामने ये पहला मौका था जब पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन से पहले ही हिरासत में ले लिया.

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया और गोपाल राय को भी पुलिस ने हिरासत में लिया.

शनिवार सुबह, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका जब हवाई जहाज़ से मुंबई से दिल्ली पहुंचे तो उन्हें विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया गया.

हिरासत में लिए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने सीजेपी के एक्स हैंडल पर एक वीडियो अपलोड करके कहा कि आंदोलन का नेतृत्व अब अजिंक्य शिंदे करेंगे.

इससे पहले लोकप्रिय यूट्यूबर ध्रुव राठी और सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह को हिरासत में लिया गया था.

इस बीच, मध्य दिल्ली में जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को चुन-चुनकर हिरासत में लिया गया और बसों में भरकर ले जाया गया.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन को रोकने के लिए हर तरफ़ पुलिस बलों का पहरा शुक्रवार रात से ही था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, दिल्ली में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के 25 हज़ार जवानों को तैनात किया गया है.

साथ ही दिल्ली के अंदर 45 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है. जंतर-मंतर और इससे चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट बंद कर दिया गया है.

देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली आने वाली 245 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है.

समाचार एजेंसी एएनआई और आईएएनएस की ओर से शेयर किए गए वीडियो में दिल्ली पुलिस सड़कों पर कीलें बिछाती भी दिख.

सुबह कीलें लगाने पर पॉलिटिकल एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने एक्स पर लिखा, ''मोदी सरकार ने किसान आंदोलन वाली नुकीली कीलें जनता के स्वागत में आज फिर दिल्ली की सड़कों पर बिछा दी हैं.''

लोगों को हिरासत में लिए जाने की ख़बरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने एक्स पर लिखा, ''सरकार अपने ही नागरिकों से जंग लड़ रही है.''

सीजेपी ने वामपंथी छात्र संगठनों, किसान संगठनों और अन्य समूहों के साथ मिलकर शनिवार को जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था.

ये संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

इनका कहना है कि चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी की है, जिसकी वजह से 13 करोड़ से ज़्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं.

हालांकि चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 में कुछ बदलावों की घोषणा की थी, जिसे विपक्षी पार्टियों ने अवैधानिक बताया था.

शॉर्ट वीडियो देखिए

रविवार को सुप्रीम कोर्ट करेगा विशेष सुनवाई

लीगल मामलों की न्यूज़ वेबसाइट लाइव लॉ के अनुसार, शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई.

सुप्रीम कोर्ट इस पर रविवार को विशेष सुनावाई करेगा.

दरअसल इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशन बंद कर दिए गए, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि परिवहन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए.

यह अवमानना याचिका गृह मंत्रालय के सचिव आईएएस गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त आईपीएस अनुराग कुमार और डीएमआरसी की अध्यक्ष आईएएस डी. थारा के ख़िलाफ़ दायर की गई.

याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों की ओर से अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने के कारण दिल्ली में जनजीवन ठप हो गया है.

शुक्रवार से ही सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की 120 से ज़्यादा कंपनियों की तैनाती की बात बताई जा रही है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, रणनीतिक रूप से अहम जगहों पर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है.

सुरक्षा तैयारियों और इमरजेंसी हालातों में कार्रवाई की व्यवस्था का आकलन करने के लिए कई जगहों पर मॉक ड्रिल की गई.

नई दिल्ली ज़िले को निगरानी के लिए 20 ज़ोन में बांटा गया है. इनकी निगरानी संयुक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त स्तर के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे हैं.

अलग-अलग इकाइयों के प्रमुख विशेष पुलिस आयुक्त भी घटनाक्रम पर कड़ी नज़र रख रहे हैं.

संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने शुक्रवार को कहा था कि 10 अक्तूबर को होने वाले प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन 7 अक्टूबर को दिया गया था. यानी प्रस्तावित प्रदर्शन से महज़ तीन दिन पहले, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत कम से कम 10 दिन पहले सूचना देना ज़रूरी है.

गिरफ़्तारी से पहले दीपके ने क्या कहा

शनिवार को प्रदर्शन शुरू होने से पहले अभिजीत दीपके ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा था, "मुझे हैरानी होती है कि प्रधानमंत्री इस देश के युवाओं और जनता से इतने डरे हुए क्यों हैं. सभी रेलवे सेवाएं और मेट्रो स्टेशन बंद करने की क्या ज़रूरत थी? उन्होंने इंटरनेट बंद कर दिया और सड़कें रोक दी हैं."

दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद गिरफ़्तारी की आशंका को लेकर उनका कहना था, "अगर वे मुझे हिरासत में लेना या गिरफ़्तार करना चाहते हैं, करें. मैं इसके लिए तैयार हूं. इससे मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. यूएपीए लगा दें, एनएसए लगा दें. लेकिन हम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों तथा इस देश की लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ते रहेंगे."

सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया

अंग्रेज़ी अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक़, कॉकरोच जनता पार्टी और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की ओर से बुलाए गए विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली में रातभर में कम से कम 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया.

दिल्ली पुलिस के एक सूत्र ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि शनिवार रात 12:30 बजे तक हिरासत में लिए गए लोगों में से क़रीब 250 दिल्ली के दक्षिण-पूर्वी ज़िले से थे.

इनमें ख़ास तौर पर शाहीन बाग के आसपास के इलाक़ों के लोग शामिल थे. साल 2020 में सीएए विरोधी प्रदर्शनों का केंद्र शाहीन बाग ही था.

दिल्ली पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि 100 से अधिक लोगों को शाहदरा और पूर्वी दिल्ली ज़िले से हिरासत में लिया गया है. ये दोनों ज़िले उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हैं.

अधिकारियों के मुताबिक, ये हिरासत एहतियातन की गई हैं. ऐसे लोगों की पहचान करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया है, जिनका पहले प्रदर्शनकारियों को जुटाने और 'ग़ैरक़ानूनी' स्थिति पैदा करने का इतिहास रहा है.

प्रदर्शन से पहले हर ज़िले में निर्धारित किए गए 13 प्रमुख हिरासत केंद्रों में इन लोगों को ले जाया जाएगा.

द हिंदू एक रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार दोपहर तक लगभग 5,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया.

इससे पहले 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि मौक़े पर 30,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे जबकि दिल्ली के सभी सीमावर्ती इलाक़ों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी.

तैनाती योजना के मुताबिक़, इन स्थानों पर पहली पाली में पुलिस इंस्पेक्टरों के साथ पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों की प्लाटून और टुकड़ियां तैनात होंगी.

सेंट्रल दिल्ली और नई दिल्ली ज़िले के बीच अंतर-ज़िला सीमा चौकियां स्थापित की गई हैं. इसके अलावा दक्षिण, दक्षिण-पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली ज़िलों को जोड़ने वाले स्थानों पर भी ऐसी चौकियां बनाई गई हैं.

नई दिल्ली के नज़दीकी इलाक़ों, जैसे अशोक रोड और टॉल्स्टॉय रोड को बंद कर दिया गया है. ये इलाक़े पैदल दूरी पर हैं, लेकिन इस मार्ग पर 10 बैरिकेड लगाए गए हैं और दर्जनों अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात हैं.

शुक्रवार रात से ही जंतर मंतर के पास 'लॉकडाउन' जैसी स्थिति

जंतर-मंतर के आसपास पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को देखने पहुंचीं बीबीसी संवाददाता शुभ राणा के मुताबिक़ शुक्रवार रात करीब दस बजे प्रदर्शनकारी चार-पांच लोगों के छोटे-छोटे समूहों में जुटने लगे थे. रात बढ़ने के साथ इन समूहों में लोगों की संख्या बढ़ने लगे थे.

इंटरनेट कनेक्टिविटी में दिक़्क़तों के बीच प्रदर्शनकारियों ने बताया, ''यहां अलग-अलग राज्यों से लोग आए थे. हमारी मुलाक़ात जेन ज़ी के एक ऐसे समूह से हुई, जिसने सीजेपी के प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया था. एसएफ़आई के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने अपने ठहरने की जगह बदल दी है. उनका कहना था कि पुलिस प्रदर्शनकारियों की पहचान कर रही है और उन्हें घरों में नज़रबंद कर रही है.''

शॉर्ट वीडियो देखिए

उन्होंने बताया, ''पुलिस लगातार बैरिकेड बढ़ाती रही और सड़कों के कई किलोमीटर लंबे हिस्से में पाबंदियां लगा दीं. पुलिस सतर्क नज़र आई और उसने हमारी फ़िल्मिंग और हिरासत में लिए गए लोगों से बात करने की कोशिशों पर रोक लगाई.''

''हमने हिरासत में लिए गए दर्जनों लोगों को ले जा रही दो बसें देखीं, लेकिन अधिकारियों ने उनकी संख्या की पुष्टि नहीं की.रात भर जामिया, जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसरों में सुरक्षा बढ़ाए जाने की ख़बरें भी आईं.''

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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