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जस्टिन ट्रूडो के आरोप के बाद पंजाब के जालंधर में हरदीप सिंह निज्जर के गांव का हाल
- Author, प्रदीप शर्मा
- पदनाम, बीबीसी पंजाबी
- प्रकाशित
खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले को लेकर भले ही भारत और कनाडा के बीच सियासत गरमाई हुई है लेकिन जालंधर ज़िले में उनके पैतृक गांव भारसिंहपुरा में सन्नाटा पसरा हुआ है.
गांव की सुनसान गलियों को देखकर यह अंदाज़ा लगाना आसान है कि कनाडा सरकार के बयान के बाद गांव के लोग किस तरह के माहौल में होंगे.
दरअसल, पिछले दिनों कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारत सरकार का हाथ होने की आशंका जताई थी.
हालांकि, भारत सरकार ने कनाडा सरकार के आरोपों को खारिज कर दिया है.
इस विवाद के सामने आने के बाद हमने हरदीप सिंह निज्जर के पैतृक गांव भारसिंहपुरा का दौरा किया और लोगों से बात करने की कोशिश की.
भारसिंहपुरा गांव, जालंधर ज़िले में पड़ता है. जब मैंने हरदीप सिंह निज्जर के बारे में गांव वालों से बात करने की कोशिश की तो कोई भी बात करने को तैयार नहीं हुआ.
हरदीप सिंह निज्जर के ताऊ ने क्या कहा?
काफी मशक्कत के बाद गांव में रहने वाले हरदीप सिंह निज्जर के ताऊ (पिता के बड़े भाई) हिम्मत सिंह बात करने के लिए तैयार हुए. वे भी निज्जर की हत्या के लिए सरकार को जिम्मेदार मानते हैं.
भारत सरकार इन आरोपों से साफ़ इंकार कर चुकी है.
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में सिख नेता और खालिस्तान समर्थक 45 वर्षीय हरदीप सिंह निज्जर की इस साल 18 जून को सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
खालिस्तान समर्थक सिखों के लिए एक अलग और स्वायत्त देश की मांग करते हैं. निज्जर के समर्थकों का कहना है कि उनकी गतिविधियों के कारण उनकी जान को पहले से ही ख़तरा था.
हिम्मत सिंह का कहना है कि अगर वो ऐसा काम करता होता, तो इन्होंने पहले उस पर क्यों नहीं कार्रवाई की.
वे कहते हैं, "अब तो हमारी कोई मांग नहीं है, जब हमारी व्यक्ति ही चला गया तो उसकी कोई भरपाई नहीं हो सकती है."
हिम्मत सिंह करीब 80 साल के हैं और समय के साथ उनकी याददाश्त भी धुंधली हो गई है. इस वजह से वे ज्यादा बातचीत नहीं कर सके.
‘परिवार हमारा पड़ोसी था’
हिम्मत सिंह के अलावा भारसिंहपुरा गांव के पंच गुरमुख सिंह ने बीबीसी से कुछ बातें साझा कीं. उन्होंने बताया कि 1994-95 में हरदीप सिंह निज्जर का परिवार यहां से चला गया था.
वे कहते हैं कि जब तक वे लोग गांव में रहते थे, तब ऐसी किसी गतिविधि के बारे में कोई बात सामने नहीं आई थी, लेकिन उनके विदेश जाकर किसी अलगाववादी गतिविधि में शामिल होने के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता.
गुरमुख सिंह बताते हैं, "उनका परिवार हमारा पड़ोसी था. वे खेती और दूध का कारोबार करते थे. निज्जर उस वक्त 8वीं या 9वीं क्लास में पढ़ रहा होगा. उन्होंने यहां ऐसी कोई बातचीत नहीं की. वह अपना काम करते थे. वह स्कूल जाता था और दूध का काम भी करता था."
"उनकी यहां कभी पंचायत नहीं हुई, कभी उसने किसी के साथ यहां लड़ाई नहीं की. जब से वो बाहर गया है, इस बारे में हम कुछ नहीं कर सकते. इस बारे या तो कनाडा वाले जानते हैं या सरकार जानती है कि बाहर गए तो क्या हुआ या क्या नहीं हुआ?"
गुरमुख कहते हैं, "लेकिन हम यह ज़रूर कहेंगे कि उनके साथ गलत हो रहा है. जब वह यहां से गया था तो उसकी उम्र 14-15 साल की थी. हमें तो उसे देखे हुए भी बहुत समय हो गया था."
निज्जर के ख़िलाफ़ अदालत का नोटिस
इसके अलावा एक और चीज़ जो गांव में देखने को मिली वो थी कोर्ट का आदेश, जिसमें हरदीप सिंह निज्जर या उनके परिवार के सदस्य को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया गया था.
दरअसल, मोहाली की एक विशेष सीबीआई अदालत ने अक्टूबर 2021 में संपत्ति जब्त करने के संबंध में एक नोटिस जारी किया था, जिसमें निज्जर या उनके परिवार से किसी को अदालत में पेश होने के लिए कहा गया था.
फिलहाल जो नोटिस गांव में देखने को मिले, उसमें हरदीप सिंह निज्जर या उनके परिवार के किसी सदस्य की कोर्ट में पेश होने की तारीख 11 सितंबर, 2023 लिखी हुई है.
हालांकि, 18 जून 2023 को हरदीप सिंह निज्जर की मौत हो गई थी.
हरदीप सिंह निज्जर कौन थे
भारत सरकार के अनुसार, निज्जर खालिस्तान टाइगर फोर्स के प्रमुख थे और खालिस्तान टाइगर फोर्स के मॉड्यूल सदस्यों को संचालन, नेटवर्किंग, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान करने में सक्रिय रूप से शामिल थे.
पंजाब सरकार के मुताबिक, निज्जर की कुल 11 कनाल 13.5 मरले जमीन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जालंधर के फिल्लौर सब-डिवीजन में उनके पैतृक गांव भारसिंहपुरा में जब्त कर ली थी.
अलग खालिस्तान राष्ट्र के लिए ऑनलाइन अभियान 'सिख रेफरेंडम 2020' मामले में 2020 में पंजाब में निज्जर की संपत्ति कुर्क की गई थी.
निज्जर 1997 में कनाडा चले गए थे. उनके माता-पिता कोविड-19 लॉकडाउन से पहले गांव आ गए थे. निज्जर शादीशुदा थे, उनके दो बेटे हैं. निज्जर कनाडा में प्लंबर का काम करते थे.
भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार, निज्जर साल 2013-14 में केटीएफ (खालिस्तान टाइगर फोर्स) के प्रमुख जगतार सिंह तारा से मिलने के लिए कथित तौर पर पाकिस्तान गए थे.
जगतार सिंह तारा को साल 2015 में थाईलैंड से गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उन्हें भारत लाया गया था.
एजेंसी के मुताबिक निज्जर भारत में प्रतिबंधित संगठन 'सिख फॉर जस्टिस' से भी जुड़े हुए थे. निज्जर को हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान रेफरेंडम के लिए वोटिंग के दौरान देखा गया था.
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