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सीटों के बंटवारे को लेकर रूठा आरएलडी
राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के साथ समाजवादी पार्टी के गठबंधन पर ग्रहण लगता नज़र आ रहा है.
इससे सपा और रालोद को होने वाले फ़ायदे और नुकसान पर राजनीतिक विश्लेषक शरद प्रधान ने बीबीसी से बात की है.
पेश है उनके साथ बातचीत के अंश:-
फ़ायदे और नुकसान के लिहाज से देखें तो रालोद बहुत छोटी पार्टी है. उनके खाते में कभी भी 15-16 से ज्यादा सीटें नहीं आई हैं.
इसलिए लगता नहीं है कि बहुत फ़र्क इससे पड़ने वाला है, लेकिन अभी जो माहौल है उसमें एक-एक सीट के मायने हैं.
क्योंकि महागठबंधन का सीधा मुकाबला बीजेपी से होगा और कांटे की टक्कर होगी.
सपा के साथ समस्या यह है कि अजित सिंह 30 सीट चाहते हैं और कांग्रेस 100 सीट. अगर ऐसा होता है तो फिर सपा में अंदरूनी कलह शुरू हो जाएगा.
कुछ लोगों का मानना है कि आरएलडी के साथ नहीं होने से होने वाले नुकसान की भारपाई कांग्रेस से हो सकती है.
क्योंकि महागठबंधन के पक्ष में जो मुस्लिम मतदाता आएंगे, उसमें कांग्रेस का भी योगदान होगा.
दूसरी ओर अजित सिंह को अवसरवादी समझा जाता है. वो अब तक सभी पार्टियों के साथ जा चुके हैं. कोई भी पार्टी बची नहीं है.
इसलिए यह मुझे उतना बड़ा नुकसान नहीं दिखता है.
कांग्रेस भले ही अकेले बहुत कुछ करने की स्थिति में ना हो, लेकिन जब वह गठबंधन में साथ आएंगी तब उसका ठीक-ठाक प्रभाव पड़ सकता है.
इनके साथ आने से मायावती की तरफ जो मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव हो रहा था, वो रुक जाएगा.
इससे एक संदेश भी जाएगा कि सिर्फ़ हम ही है बीजेपी के टक्कर में. राजनीति में इस तरह के संदेश की बहुत अहमियत होती है.
(बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन से बातचीत पर आधारित)
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