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पहली बातचीत में ही पूछा जा रहा- सेक्स किया है?
- Author, रजनीश कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
शर्माती हुई लड़की कांपते हाथों से चाय का ट्रे लेकर आती थी, लोग उससे पूछते थे--'खाना बनाना आता है'? उसके बाद शहनाइयाँ बजने लगती थीं.
लेकिन अब शादी से पहले लड़के और लड़कियाँ बातें करते हैं और उनकी बातों में वो सब शामिल होता है जिसे कुछ समय पहले तक टैबू समझा जाता था.
शादी की बात चली तो मुगलसराय की रेणु को राहुल ने फ़ोन किया, घर के सारे लोग सो चुके थे. पहली ही बातचीत में राहुल ने पूछा, "तुमने किसी से प्रेम नहीं किया?"
रेणु टालने की कोशिश करती रही, लेकिन राहुल नहीं माना. उसने आश्वस्त किया कि दोनों को एक-दूसरे को ठीक से जानना चाहिए. राहुल ने कहा कि वह भी अपने संबंधों के बारे में सब कुछ बताएगा.
रेणु ने बता दिया, ''हां, मैं शकील से प्रेम करती थी. उसके लिए दिल्ली आ गई और दो सालों तक साथ रही. हम दोनों साथ में बहुत ख़ुश रहते थे. हम शादी करना चाहते थे. शकील के लिए मैंने घर वालों से बात की पर यह हमारे लिए महंगा पड़ा. मेरे पिता मुझे जबरन मुगलसराय लेकर आ गए. मैं पिछले दो साल से घर में क़ैद हूँ".
इतना कहकर रेणु फ़ोन पर ही रोने लगी. राहुल ने उसी वक़्त फ़ोन काट दिया.
उसने मैचमेकिंग साइट पर जाकर रिक्वेस्ट कैंसल किया और रेणु को हर जगह से ब्लॉक कर दिया. आख़िरी बार रेणु ने राहुल को किसी और नंबर से 13 दिसंबर को मैसेज किया, ''मुझे लगा था कि तुम और लड़कों से अलग हो, लेकिन तुम भी वैसे ही निकले.''
विशाखापट्टनम की डॉ. रंजू की कहानी इससे उलट है. रंजू को उनके पापा ने ही ज्ञानेंद्र का नंबर दिया था.
रंजू ने दूसरी बातचीत में ही ज्ञानेंद्र से पूछ दिया कि तुमने किसी से सेक्स किया है? ज्ञानेंद्र ने कहा पहले तुम बताओ. रंजू ने कहा, ''हां, मैंने किया है. मेरा बॉयफ्रेंड था. एक साल तक साथ रही, लेकिन अब ब्रेकअप हो गया.''
रंजू ने पूछा अब तुम तो बताओ. ज्ञानेंद्र का जवाब था- नहीं. उसने कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ ही सेक्स करेगा. रंजू ने कहा तब तुम्हारी मेरे साथ नहीं बनेगी. कोई और लड़की देख लो.
यह दोनों के बीच आख़िरी बातचीत थी.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के सरोजनी नायडू सेंटर फ़ॉर वुमन स्टडीज़ में असोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. फ़िरदौस अज़मत सिद्दकी के लिए ये दोनों कहानियाँ हैरान करने वाली नहीं हैं.
उन्होंने कहा, ''लड़कों में वर्जिनिटी की ख़्वाहिश ख़त्म नहीं हुई है. इस मामले में लड़कियों का बेबाक होना उनकी मुखरता को दर्शाता है. लड़के जब किसी लड़की से उसके प्रेम संबध के बारे में पूछते हैं तो उनके लिए यह 'अनैतिक' सच जानने की तरह होता है जबकि लड़कियां इस मामले में ज़्यादा ईमानदार होती हैं.''
उन्होंने कहा, ''लड़कियों को लगता है कि उनके संबंधों के बारे में कोई किसी और से पूछे, इससे बढ़िया है कि वह ख़ुद ही साफ़-साफ़ बता दें. जो लड़कियाँ आत्मनिर्भर हैं उन्हें इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि ऐसा कहने से रिश्ता ख़त्म हो जाएगा. वो बराबरी का व्यवहार चाहती हैं और यह हमारे समाज के लिए अच्छा है.''
दिल्ली में जीवनसाथी डॉट कॉम की ईशा ने कहा कि मैट्रिमोनियल साइट पर ज़्यादातर अकाउंट अभिभावक हैंडल करते हैं, लेकिन उन्हें जो लड़का पंसद आता है उसका नंबर वे अपनी बेटी को दे देते हैं.
ईशा ने कहा, ''बात केवल रेणु और रंजू की नहीं है बल्कि बहुत सारी लड़कियां रिलेशनशिप को छुपाना नहीं चाहती हैं. वे अपने बारे में भी खुलकर बताती हैं और लड़कों के बारे में भी सब कुछ जानना चाहती हैं. हालांकि कई बार सच बोलना उल्टा भी साबित होता है. लेकिन यह ज़्यादा ठीक है कि शादी से पहले ही सारी चीज़ें स्पष्ट हो जाती हैं".
(पहचान गोपनीय रखने के लिए लोगों के अनुरोध पर उनके नाम बदल दिए गए हैं)