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रेल हादसे: अधिकतर मामलों में स्टाफ़ कसूरवार
हर रेलवे हादसे के बाद इसके कारणों को लेकर कई तरह की बातें कही और सुनी जाती हैं. हादसे के बाद सरकार जाँच के आदेश देती है, हालाँकि अधिकतर मामलों में कसूरवार कौन था ये फ़ाइलों में ही दबकर रह जाता है.
कभी रेलवे कर्मियों की लापरवाही पर बात होती है तो कभी कहा जाता है कि बाहरी ताकतों ने इसे अंजाम दिया है.
एक तरफ तो केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु को लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है तो दूसरी तरफ ये आरोप भी लग रहे हैं कि मोदी सरकार में रेल हादसों की संख्या बढ़ गई है.
लेकिन क्या सचमुच ऐसा है? और इस सवाल में कितना दम है कि ज्यादातर रेल हादसे रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से होते हैं.
सरकार का जवाब
रेलवे सेफ्टी और यात्री सुरक्षा से जुड़े एक सवाल के जवाब में सात दिसंबर, 2016 को लोकसभा में सरकार ने इस सवाल का लिखित जवाब दिया था.
सुरेश प्रभु ने बताया, "साल 2014-15 में 135 और 2015-16 में 107 रेल हादसे हुए. 2016-17 में नवंबर 2016 तक 85 रेल हादसे हुए."
रेल मंत्री के मुताबिक, "पिछले दो साल और मौजूदा साल में हुए रेल हादसों की बड़ी वजहें रेलवे स्टाफ़ की नाकामी, सड़क पर चलने वाली गाड़ियां, मशीनों की ख़राबी, तोड़-फोड़ हैं."
संसद में सरकार ने बताया कि 2014-15 के 135 रेल हादसों में 60 और 2015-16 में हुए 107 हादसों में 55 और 2016-17 (30 नवंबर, 2016 तक) के 85 हादसों में 56 दुर्घटनाएं रेलवे स्टाफ़ की नाकामी या लापरवाही की वजह से हुईं.
पटरी से उतरी ट्रेन
शनिवार को हुए मुज़फ़्फ़रनगर के खतौली में हए भीषण हादसे के ठीक एक महीने पहले रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने 19 जुलाई को संसद में बताया था कि बीते पांच सालों (2012-17) में देश में 586 रेल हादसे हुए हैं और इनमें 308 बार ट्रेन पटरी से उतरी है.
इस दौरान इन हादसों में 1011 लोग मारे गए और सिर्फ पटरी से उतरने वाली ट्रेनों ने 347 जानें लीं.
खतौली में भी यही हुआ कि पुरी से हरिद्वार जा रही उत्कल एक्सप्रेस पटरी से उतर गई.
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