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अफ़ग़ानिस्तान: 'सेव द चिल्ड्रेन' के दफ़्तर पर हमला
अफ़ग़ानिस्तान के जलालाबाद में चैरिटी संस्था 'सेव द चिल्ड्रेन' के दफ़्तर पर बुधवार को हमला कर दिया गया.
इसमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई है और 12 घायल हो गए. हमले की ज़िम्मेदारी तथाकथित इस्लामिक स्टेट ने ली है.
बताया जा रहा है कि तीनों हमलावरों ने इमारत में दाखिल होने से पहले कार बम और ग्रेनेड का इस्तेमाल किया.
हमलावर इमारत की ऊपरी मंज़िल तक पहुंच गए क्योंकि वहां से गोलीबारी की आवाज़ सुनाई दी.
अधिकारियों के मुताबिक़, हमला शुरू होने के वक़्त इमारत में 'सेव द चिल्ड्रेन' के 50 कर्मचारी मौजूद थे.
मेन गेट पर ग्रेनेड दागा
नांगरहार प्रांत के गवर्नर के प्रवक्ता अताउल्लाह खोगयानी ने बीबीसी को बताया कि 'स्थानीय समय के हिसाब से सुबह 9 बजकर 10 मिनट पर एक आत्मघाती हमलावर ने इमारत के गेट पर खड़ी कार को उड़ा दिया.'
वहां मौजूद एक व्यक्ति ने समाचार एजेंसी 'एएफ़पी' को बताया कि उन्होंने एक बंदूकधारी को मेन गेट पर रॉकेट से ग्रेनेड दागते देखा.
तस्वीरों में इमारत से उठता हुआ गहरा काला धुआं देखा जा सकता है. इस बीच दो हमलावरों की मौत की ख़बर भी सुनने में आई लेकिन इन ख़बरों की पुष्टि नहीं हो सकी.
एएफ़पी ने बताया कि उनके पास इमारत में मौजूद एक कर्मचारी का व्हॉट्सऐप मैसेज है जिसमें लिखा है, "मुझे दो हमलावरों की आवाज़ सुनाई आ रही है... वे हमें खोज रहे हैं. हमारे लिए प्रार्थना कीजिए... सुरक्षा बलों को ख़बर कर दीजिए."
इस इलाक़े में सरकारी दफ़्तरों के अलावा कुछ और मदद करने वाली संस्थाओं के दफ़्तर हैं.
कौन हैं हमलावर?
तथाकथित इस्लामिक स्टेट ने अपनी ख़बरिया एजेंसी अमाक़ पर दिए एक संदेश में हमले की ज़िम्मेदारी क़ुबूल ली है. संदेश में कहा गया है कि 'तीन हमलावरों और बम से लदी एक कार ने जलालाबाद में ब्रिटिश, स्वीडिश और अफ़ग़ान संस्थाओं पर हमला किया.'
पाकिस्तान की सीमा से लगता जलालाबाद शहर अक्सर तालिबान के निशाने पर रहता है.
साथ ही यह तथाकथित इस्लामिक स्टेट का गढ़ भी है जिसके लड़ाके यहां 2015 से सक्रिय रहे हैं.
कुछ दिन पहले तालिब बंदूक़धारियों ने काबुल के एक लग्ज़री होटल पर हमला कर दिया था जिसमें कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई थी.
लेकिन तालिबान ने ट्विटर मैसेज के ज़रिए जलालाबाद के इस हमले की ज़िम्मेदारी लेने से मना कर दिया है.
सेव द चिल्ड्रेन क्या कहता है?
संस्था ने एक बयान जारी करके कहा कि वह इस हमले की ख़बर सुनकर 'बेहद दुखी' है.
बयान के मुताबिक़ "संस्था की पहली प्राथमिकता कर्मचारियों की सुरक्षा और हिफ़ाज़त है. हम अभी अपनी टीम से जानकारी मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं और फ़िलहाल इससे ज़्यादा कुछ नहीं कह सकते."
अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद संयुक्त राष्ट्र मिशन ने कहा, "आम नागरिकों और मदद करने वाली संस्थाओं पर किए जाने वाले हमले साफ़ तौर पर अंतरराष्ट्रीय मानवता क़ानून का उल्लंघन हैं और वॉर क्राइम यानी युद्ध के दौरान किए जाने वाले ग़ुनाह की तरह माने जा सकते हैं."
सेव द चिल्ड्रेन अफ़ग़ानिस्तान में क्या काम करता है?
यह संस्था अफ़ग़ानिस्तान में 1976 से काम कर रही है और फ़िलहाल वहां के 16 प्रांतों में सक्रिय है.
'सेव द चिल्ड्रेन' का दावा है कि उसने अब तक अफ़ग़ानिस्तान में सात लाख बच्चों की मदद की है.
संस्था के मुताबिक़ 'उनका मक़सद दुनिया भर के बच्चों को बेहतर पढ़ाई, स्वास्थ्य सेवाएं और बाक़ी ज़रूरी सामान मुहैया कराना है.'
अफ़ग़ानिस्तान में चैरिटी संस्थाओं पर निशाना
इन संस्थाओं पर लगातार हमले होते रहते हैं, इनके कर्मचारियों का अपहरण कर लिया जाता है लेकिन इतने दबाव के बावजूद मदद करने वाली संस्थाएं अभी तक अफ़गानिस्तान में डटी हुई हैं.
साल 2017 में रेड क्रॉस के सात कर्मचारियों की अफ़ग़ानिस्तान में मौत हो गई, जिसके बाद संस्था ने वहां मौजूद कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती करने का ऐलान किया.
मई 2017: स्वीडन के एक एनजीओ पर हमला, जर्मनी की एक महिला और एक अफ़ग़ान गार्ड की मौत
जुलाई 2014: एक ईसाई मदद एजेंसी की महिला को गोली मार दी गई
अक्तूबर 2010: ब्रिटेन की एक एनजीओ कर्मचारी का अपहरण, छुड़ाते समय मौत
अगस्त 2010: नूरिस्तान प्रांत में एक एनजीओ के दस लोगों को गोली मार दी गई
इसके अलावा अक्तूबर 2015 में कुंडुज़ के एक अस्पताल पर हुई अमरीकी बमबारी में भी 22 लोगों की मौत हो गई थी.
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