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अमरीका-चीन के बीच ट्रेड वॉर की बर्फ पिघली
दुनिया के दो सबसे ताक़तवर देशों के बीच कैसे संबंध हैं, इसका असर सिर्फ़ उन दो देशों के लोगों पर नहीं पड़ता बल्कि दुनिया के दूसरे देश भी इससे सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं.
अमरीका और चीन के बीच एक लंबे समय से व्यापारिक गतिरोध बना हुआ है और इसका असर दुनियाभर के दूसरे देशों पर भी पड़ रहा है. लेकिन अब उम्मीद की जा सकती है कि इन दो मुल्क़ों के बीच की तल्ख़ी शायद कुछ कम हो जाए.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्यापारिक मसलों पर एक नए सिरे से बातचीत करने को लेकर सहमति बन गई है.
जापान के ओसाका में जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे डोनल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच शनिवार को मुलाकात हुई.
इसके बाद अमरीका और चीन व्यापार वार्ता को फिर से शुरू करने पर सहमत हो गए हैं.
इस सहमति से यह अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि एक लंबे समय से चले आ रहे इस गतिरोध के कारण पैदा हुई वैश्विक आर्थिक मंदी से कुछ राहत तो ज़रूर मिलेगी.
अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात की घोषणा की कि वो अमरीकी कंपनियों को चीन की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक हुआवेई को बिक्री जारी रखने की अनुमति देते हैं.
ट्रंप की इस घोषणा को एक बहुत बड़ी छूट के तौर पर देखा जा रहा है.
यह घोषणाएं अपने आप में ख़ास इसलिए हैं क्योंकि इससे पहले अमरीका ने चीन को अतिरिक्त व्यापारिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी.
ट्रंप ने यह भी कहा कि वो आने वाले समय में भी बीजिंग के साथ बातचीत जारी रखेंगे.
इसके बाद ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि अमरीकी प्रौद्योगिकी कंपनियां फिर से हुआवेई की ब्रिकी कर सकती हैं. यह घोषणा बेहद ख़ास इसलिए है क्योंकि अमरीकी वाणिज्य विभाग ने पिछले महीने ही यह प्रतिबंध लगाए थे और अब सीधे तौर पर इसे उलट दिया है.
कैसे बढ़ा चीन और अमरीका विवाद?
अमरीका और चीन के बीच पिछले एक साल से व्यापारिक युद्ध चल रहा है, जिससे दोनों को ही किसी न किसी रूप में नुक़सान उठाना पड़ा है.
ट्रम्प ने चीन पर आरोप लगाया था कि वो उनकी बौद्धिक संपदा चुराने की कोशिश कर रहा है. अमरीका ने ये भी आरोप लगाया था कि चीन, अमरीकी कंपनियों को उनके यहां व्यापार के बदले व्यापार से जुड़ी खुफ़िया जानकारी देने के लिए मजबूर कर रहा है. इसके बदले में चीन ने कहा था कि व्यापार सुधार के लिए अमरीका की मांगें अनुचित हैं.
इससे पहले मई महीने में भी दोनों देशों के बीच वार्ता हुई थी लेकिन उसका कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला था और इस शिखर सम्मेलन से पूर्व दोनों देशों के बीच कड़वाहट काफी बढ़ गई थी.
ओसाका में हुई मुलाक़ात से कुछ बदलेगा?
दोनों देशों के बीच आज इस बात पर सहमति बनी है कि वे व्यापारिक मसलों पर आगे भी बात करेंगे. इसे इस रूप में भले न देखा जाए कि गतिरोध ख़त्म हो गया है लेकिन इसका एक पहलू ये ज़रूर है कि दोनों देशों के बीच लगभग एक साल से चली आ रही इस शत्रुता में एक ठहराव तो ज़रूर आएगा.
उस व्यापारिक दुश्मनी में फिलहाल एक ब्रेक तो ज़रूर लगेगा जिसके चलते बाज़ार में अशांति पैदा हुई और वैश्विक विकास प्रभावित हुआ.
द्विपक्षीय बैठक के बाद ट्रंप ने कहा कि चीन के शीर्ष नेता शी जिनपिंग के साथ उनकी मुलाक़ात शानदार रही. उन्होंने कहा, "हमने बहुत सारे मुद्दों पर बात की और हम दोबारा एक बार पटरी पर लौटने की दिशा में हैं. अब देखते हैं आगे क्या होता है."
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शी जिनपिंग के हवाले से लिखा है, "चीन और अमरीका के एकीकृत हित और व्यापक सहयोग क्षेत्र हैं और उन्हें संघर्ष- टकराव के तथाकथित जाल में नहीं पड़ना चाहिए."
हुआवेई के साथ क्या है स्थिति ?
अमरीका ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि हुआवेई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा है. हालांकि, ट्रंप इसे व्यापारिक मुद्दे से भी जोड़कर बताते हैं.
पिछले महीने, अमरीका ने हुआवेई पर बिना लाइसेंस के अमरीकी सामान खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसमें गूगल भी शामिल था जोकि हुआवेई के कई उत्पादों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
लेकिन अब यू टर्न लेते हुए ट्रंप ने अमरीकी कंपनियों को हुआवेई को बिक्री जारी रखने की अनुमति दे दी है.
जी20 किस ओर जा रहा है?
अगला शिखर सम्मेलन नवंबर 2020 में सऊदी अरब में होने वाला है.
शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से पिछले साल इस्तांबुल में सऊदी पत्रकार जमाल खशोज्जी की हत्या पर लगातार सवाल पूछे जा रहे हैं. आशंका इस बात की भी है कि इस मामले पर हंगामा बढ़ सकता है.
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