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लियो वराडकर: भारतीय मूल के नेता, दूसरी बार बने आयरलैंड के प्रधानमंत्री
तीस महीनों के अंतराल के बाद भारतीय मूल के लियो वराडकर आयरलैंड के प्रधानमंत्री बन गए हैं. वो दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने हैं.
साल 2020 में हुए चुनावों के बाद यहां की फ़ाइन गेल पार्टी, फ़िएना फ़ेल पार्टी और ग्रीन पार्टी के बीच सरकार बनाने के लिए गठबंधन हुआ था.
गठबंधन वाली सरकार बनने से पहले ही ये सहमति बन गई थी कि इनमें से दो पार्टियों के नेता आधे-आधे वक्त के देश के प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभालेंगे.
उस वक्त सहमति बनी थी कि फ़िएना फ़ेल के मीहॉल मार्टिन 16 दिसंबर 2022 तक प्रधानमंत्री की गद्दी संभालेंगे जिसके बाद वो डिप्टी प्रधानमंत्री के पद पर रहेंगे और डिप्टी प्रधानमंत्री का पद संभाल रहे फ़ाइन गेल के वराडकर प्रधानमंत्री पद का कार्यभार देखेंगे.
वराडकर का भारत से संबंध
वराडकर का जन्म 18 जनवरी 1979 में डबलिन में हुआ था. उनकी मां मरियम आयरलैंड की थीं और नर्स का काम करती थीं.
वहीं उनके पिता अशोक भारतीय प्रवासी थे. वो पेशे से डॉक्टर थे और 1960 के दशक में इंग्लैंड की नेशनल हेल्थ सर्विस में काम करते थे. यहीं पर दोनों की मुलाक़ात हुई थी.
अशोक महाराष्ट्र में सिंधुदुर्ग ज़िले के वराड गांव से थे और मुंबई में रहते थे. ये परिवार 1960 के दशक में आयरलैंड में बस गया.
यहीं पर लियो वराडकर का जन्म हुआ. वो अपने पिता अशोक वराडकर के सबसे छोटे बेटे हैं.
उनकी प्रारंभिक शिक्षा सेंट फ्रांसिस नेशनल स्कूल में हुई. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने एक निजी सेकंडरी स्कूल किंग्स हॉस्पिटल में दाखिला लिया.
2003 में डबलिन के ट्रिनिटी कॉलेज से उन्होंने मेडिकल की डिग्री ली जिसके बाद उन्होंने प्रैक्टिस शुरू की. उन्होंने छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम बढ़ा दिए थे. साल 2007 में वो डबलिन वेस्ट से फ़ाइन गेल के टिकट पर चुनाव जीते और काउंसलर बने. उस वक्त वो केवल 24 साल के थे.
2019 में वो अपने परिवार के साथ सिंधुदुर्ग में अपने पैतृक गांव भी आए थे.
2011 में उनकी पार्टी फ़ाइन गेल ने चुनाव जीता और गठबंधन सरकार में शामिल हुई. उस वक्त वराडकर को यातायात, पर्यटन और खेल मंत्री बनाया गया. बाद में 2014 में उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय दिया गया.
2017 में एंडा केनी के इस्तीफ़े के बाद वराडकर पहली बार फ़ाइन गेल पार्टी के प्रमुख चुने गए.
2017 में उन्हें प्रधानमंत्री चुना गया. वो देश के सबसे कम उम्र के पहले समलैंगिक प्रधानमंत्री थे.
2020 फरवरी में उन्होंने इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया लेकिन आने वाले कुछ महीनों तक वो केयरटेकर प्रधानमंत्री बने रहे.
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महामारी के वक्त निभाई अहम ज़िम्मेदारी
जिस वक्त वराडकर प्रधानमंत्री बने थे उस वक्त ब्रिटेन ब्रेक्सिट लागू करने की तैयारी में था और आयरलैंड उसके साथ सीमापार व्यापार को लेकर चर्चा कर रहा था.
वराडकर के नेतृत्व में आयरलैंड ने ब्रिटेन से बात की ताकि दोनों के बीच सीमा पार लोगों के आनेजाने को लेकर सख्त पाबंदियां न लगाई जाएं.
इसके बाद जब 2020 में चुनाव हुआ वराडकर देश के नए डिप्टी प्रधानमंत्री चुने गए. देश इस दौर में कोविड महमारी से जूझ रहा था और वराडकर की चुनौतियां बढ़ गई थीं. उन्होंने पाबंदियां लगाते वक्त कहा था कि वर्क फ्रॉम होम जल्दी ही आम हो जाएगा.
2013 में डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस छोड़ चुके वराडकर महामारी के दौरान मार्च 2020 में एक बार फिर प्रैक्टिस में लौटे. संकट से निपटने के लिए डॉक्टरों की ज़रूरत को देखते हुए उन्होंने सप्ताह में एक बार लोगों का इलाज करने का फ़ैसला किया था. इस दौरान वो फ़ोन पर लोगों को सलाह देते थे.
उनके इस फ़ैसले ने उनकी लोकप्रियता को काफी बढ़ा दिया.
इस दौरान 18 सितंबर 2020 के जब वो डबलिन में लोगों को कोरोना के कारण लगाई पाबंदियों के बारे में विस्तार से बता रहे थे. किसी ने उन पर फल का रस फेंक दिया. इसके बाद वराडकर ने कहा कि उनके पास एक और जोड़ी कपड़े हैं और वो अपना काम चालू रखेंगे. उन्होंने अधिक सुरक्षा लेने की बात से इनकार कर दिया था.
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जब किया गे होने का एलान
वराडकर यूरोप के सबसे रूढ़िवादी देश माने जाने वाले आयरलैंड में उदारवाद का चेहरा बनकर उभरे हैं.
आयरलैंड में 1993 तक समलैंगिकता को अपराध माना जाता था.
2013 में आयरलैंड ने एक जनमतसंग्रह करवाया जिसके बाद वहां 2015 के मई महीने में सेम सेक्स (समलैंगिक) शादी को मान्यता दी.
इसके कुछ महीने पहले जनवरी 2015 में वराडकर खुलकर सामने आए और उन्होंने अपने समलैंगिक होने की बात सार्वजनिक तौर पर घोषित की. उस वक्त वो स्वास्थ्य मंत्री थे.
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उनके साथी मैथ्यू बैरेट डॉक्टर (कार्डियोलॉजिस्ट) हैं.
उन्होंने कहा, "मैं गे हूं और ये कोई राज़ नहीं है. ये मेरी परिभाषा का हिस्सा नहीं है. न तो मैं आधा-भारतीय राजनेता हूं, न तो डॉक्टर राजनेता हूं और न ही गे राजनेता हूं. ये मेरे जीवन का हिस्सा है मेरे चरित्र का हिस्सा है."
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