यूएन में अमेरिका और क्यूबा के बीच तीखी नोक-झोंक, ये थी वजह

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संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज और क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पैरिला के बीच बहस हो गई.
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइकल वॉल्ट्ज ने आरोप लगाया, "कास्त्रो ने हजारों समलैंगिक लोगों, ईसाइयों, अफ्रीकी मूल के क्यूबाई लोगों और अन्य लोगों को यातना शिविरों में भेजा था."
"यह सरकार ही थी, जिसने उनकी संपत्ति छीन ली और उनसे जबरन मजदूरी कराकर मुनाफा कमाया.
"तब से हवाना दुनिया को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करता रहा है कि क्यूबा में सब कुछ ग़ायब हो गया है. लेकिन हम जानते हैं कि वह सब कहां गया और आज हम यहां यह बात दुनिया के सामने रखने आए हैं."
मंच से बोल रहे अमेरिकी राजदूत के इस बयान के बीच में ही क्यूबा के प्रतिनिधि मंडल ने खड़े होकर इस पर आपत्ति दर्ज कराई और इसे वापस लिए जाने की मांग की.
यह हंगामा कुछ देर तक चला और अमेरिकी राजदूत को अपना भाषण रोकना पड़ा.
इसके बाद उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि अध्यक्ष महोदय, हर कोई इस समय प्रतिनिधिमंडल की बात सुन रहा है. कल्पना कीजिए कि जब कोई ये सवाल हवाना में पूछता है, न कि राजदूतों और कैमरों से भरे किसी कमरे में, तो क्या होता होगा. सोचिए, उन लोगों के साथ क्या होता होगा, जब हम यहां भी इस तरह की धमकी और व्यवधान देखते हैं."


