बेंगलुरु में सोमवार को वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे विभिन्न संगठनों और कार्यकर्ताओं के करीब 80 लोगों को मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के पास से हिरासत में लिया गया.
ये सभी एसआईआर के खिलाफ़ा प्रदर्शन के लिए सीईओ ऑफ़िस पहुंचे थे.
ये सभी संगठन "माय वोट, माय राइट" नाम के एक साझा मंच का समर्थन करते हैं. उनकी मांग थी कि एसआईआर को रद्द किया जाए और इससे जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी कार्रवाई की जाए.
पुलिस के अनुसार, ये लोग अचानक मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सामने वाली सड़क से निकलकर वहां पहुंचे और इस दौरान उनकी पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी हुई. इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया.
बेंगलुरु पुलिस के सेंट्रल डिविजन के डीसीपी अक्षय मचिंद्र हकाय ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "उन्हें हिरासत में लिया गया क्योंकि मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सामने प्रदर्शन की अनुमति नहीं है. उन्होंने प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति भी नहीं ली थी."
"माय वोट, माय राइट" मंच की मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, जनवरी 2025 की स्थिति के अनुसार मतदाता सूची को बहाल करना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि किसी भी मतदाता का वोट देने का अधिकार न छिने.
मुख्य चुनाव अधिकारी को सौंपे गए एक ज्ञापन में मंच ने दावा किया है कि जिन एक करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, उनमें बड़ी संख्या में रेहड़ी-पटरी वाले, प्रवासी मज़दूर, सिंग्ल विमेंस, ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्य, दलित और धार्मिक अल्पसंख्यक शामिल हैं.
मंच का कहना है, "अब यह साफ़ होता जा रहा है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, वे फॉर्म-6 के जरिए भी अपने नाम दोबारा जुड़वाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं. फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जोड़ने की दर बेहद कम रही है."
मंच ने यह भी आरोप लगाया कि फॉर्म-7 (मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाला फॉर्म) का दुरुपयोग किया गया है.
उनके अनुसार, इससे राजनीतिक कारणों से मतदाताओं के नाम हटाने की गुंजाइश बनी और खास तौर पर मुस्लिम तथा दलित समुदायों के मतदाता प्रभावित हुए हैं.