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राजमोहन: गिरमिटिया मज़ूदरों के दर्द की आवाज़
प्रकाशित
लगभग डेढ़ सौ साल पहले बिहार और उत्तर प्रदेश के गाँवों में घोर ग़रीबी का जीवन जी रहे लोग अपना घर-द्वार छोड़कर पानी के जहाज़ पर सवार होकर सात समंदर पार त्रिनिदाद, टोबेगो और सूरीनाम जैसे उपनिवेशों में मज़दूरी करने चले गए.
ये गिरमिटिया मज़दूर कहलाए. आज भी इनके परिवार भारतीय संस्कृति को सहेजे हुए वहाँ रह रहे हैं.
आज आपकी मुलाक़ात एक ऐसे ही भारतवंशी से करवा रहे हैं जिनके परदादा बिहार के छपरा से निकले और सूरीनाम जाकर बस गए.
राजमोहन, गिरमिटिया मज़दूरों के दर्द के गीत लिखते और गाते हैं. उनसे मुलाक़ात की बीबीसी हिंदी रेडियो के संपादक राजेश जोशी ने.