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रूस ने कैसे दिया सऊदी अरब को झटका?
इसी साल मार्च महीने में सऊदी अरब और रूस में तेल की क़ीमतों को लेकर तनातनी हुई थी.
सऊदी अरब चाहता था कि रूस तेल का उत्पादन कम करे ताकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की गिरती क़ीमतों को संभाला जा सके. लेकिन रूस उत्पादन कम करने को तैयार नहीं था.
रूस के इस रुख़ से खीझ कर सऊदी अरब ने भी उत्पादन बढ़ाने और तेल की क़ीमतों में छूट देकर बेचने का फ़ैसला ले लिया था.
सऊदी अरब ने यह फ़ैसला तब लिया था जब पूरी दुनिया में कोविड 19 की महामारी के कारण सारे कारोबार ठप थे. दोनों देश एक दूसरे पर क़ीमतों में गिरावट के लिए इल्ज़ाम लगा रहे थे.
रूस के सरकारी टेलीविज़न सऊदी अरब को अपनी मुद्रा रुबल में आई गिरावट के लिए ज़िम्मेदार बता रहे थे.
दूसरी तरफ़ सऊदी अरब भी पलटवार करने का फ़ैसला कर चुका था. एक अप्रैल को सऊदी की राष्ट्रीय तेल कंपनी अरामको ने कहा कि वो हर दिन एक करोड़ 20 लाख बैरल तेल का उत्पादन करेगा.
स्टोरीः रजनीश कुमार
आवाज़ः विशाल शुक्ला
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