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#IPL2019FINAL: धोनी के ग़लत दांव से छिनी चेन्नई सुपरकिंग्स के हाथ आई ट्रॉफ़ी?
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
आईपीएल-12 का फ़ाइनल जो मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेला गया वह इतना रोमांचक था कि आधी रात को भी क्रिकेट प्रेमियों की नींद उड़ गई.
दिलों की धड़कनें रोक देने वाले इस फ़ाइनल मुक़ाबले में मुंबई इंडियंस ने चेन्नई सुपर किंग्स को आख़िरी गेंद तक नाको चने चबवाने के बाद आख़िरकार केवल एक रन से मात दी.
यह आख़िरी गेंद थी मुंबई के सबसे अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ और अपनी ख़तरनाक यॉर्कर के लिए जाने जाने वाले लसिथ मलिंगा की.
उनके सामने थे चेन्नई के शार्दुल ठाकुर. हालांकि जीत के लिए 150 रनों की तलाश में शार्दुल ठाकुर जब मैदान में उतरे तो टीम को दो गेंद पर केवल चार रनों की ज़रूरत थी.
मलिंगा की पहली गेंद पर शार्दुल ठाकुर ने दो रन भी बनाए, लेकिन अगली और आख़िरी गेंद पर वह मलिंगा के शानदार ऑफ़ कटर का शिकार हो गए.
शार्दुल को भेजकर धोनी ने ग़लती की
गेंद मिडिल स्टंप के ठीक सामने खड़े शार्दुल ठाकुर के पैड पर जाकर रुकी और अंपायर को अपनी अंगुली उठाने में कोई संकोच नहीं हुआ.
इसके साथ ही मुंबई के डगआउट में बैठे खिलाड़ी जोश और ख़ुशी में भरकर मैदान में दौड़ पड़े.
दूसरी तरफ़ चेन्नई के ख़ेमें में मायूसी छा गई. पैड बांधे हाथ में बैट लिए हरभजन सिंह ग़ुस्से में उठे लेकिन यही समां बता रहा था कि क्या अपने अनोखे निर्णय के दम पर मैच के नतीजे बदलने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने शार्दुल ठाकुर को अंतिम समय में मैदान में भेजकर ग़लती की.
क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली मानते हैं कि वाकई धोनी ने बहुत बड़ी ग़लती कर दी.
शार्दुल ठाकुर के मुक़ाबले हरभजन सिंह चौके-छक्के लगाने के लिए अधिक जाने जाते हैं.
वहीं एक और क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन का मानना है कि शायद प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शार्दुल ठाकुर की बल्लेबाज़ी को ध्यान में रखकर धोनी ने यह निर्णय लिया.
हरभजन को भेजना ठीक रहता
अब धोनी ने जो निर्णय लिया सो लिया लेकिन हरभजन सिंह के पास हर हाल में शार्दुल ठाकुर से अधिक अनुभव था.
अयाज़ मेमन आगे कहते हैं कि हरभजन सिंह के पास दबाव सहने की ताक़त भी अधिक थी.
लेकिन वह यह भी मानते हैं कि धोनी ने शायद यह सोचा होगा कि शार्दुल ठाकुर हरभजन सिंह के मुक़ाबले रविंद्र जडेजा के साथ एक या दो रन अधिक तेज़ी से ले सकते हैं क्योंकि वह युवा हैं. इसके अलावा कोई और कारण समझ में नहीं आता.
जो भी हो लगभग जीती बाज़ी हारने से बड़ी निराशा टीम चेन्नई और कप्तान धोनी के लिए नहीं हो सकती.
वॉटसन का रनआउट होना
इसके अलावा चेन्नई को जीत के दरवाज़े पर लगभग पहुंचाने के बाद सलामी बल्लेबाज़ शेन वॉटसन जिस तरह से रन आउट हुए वह भी चेन्नई की हार की सबसे बड़ी वजह रही.
शेन वॉटसन ने पिछली बार साल 2018 में हैदराबाद के ख़िलाफ़ नाबाद शतक जमाकर अकेले दम पर चेन्नई को तीसरी बार चैंपियन बना दिया था.
बीते रविवार को भी उन्होंने जिस अंदाज़ में बल्लेबाज़ी की उसे देखकर लगा कि वह पिछली पारी को ही दोहरा रहे हैं.
उन्होंने रन आउट होने से पहले केवल 59 गेंदों पर आठ चौके और चार छक्कों की मदद से 80 रन बनाए.
वह लसिथ मलिंगा के आख़िरी ओवर की चौथी गेंद को डीप पॉइंट पर खेलकर पहला रन आसानी से बनाने में कामयाब रहे, लेकिन स्ट्राइक अपने ही पास रखने की कोशिश में वह दूसरे रन के लिए दौड़ पड़े.
उधर गेंद को कृणाल पांड्या ने संभाला और विकेटकीपर क्विंटन डी कॉक की तरफ़ तेज़ी से थ्रो किया. क्विंटन ने विकेट उड़ाने में देर नहीं की लेकिन वॉटसन ने क्रीज़ में पहुंचने में देर कर दी.
जब वह रन आउट हुए तो उनके क्रीज़ के बीच काफ़ी दूरी थी. उनकी इस ग़लती ने चेन्नई के हाथ से मैच लगभग छीन लिया.
कमाल की बात है कि शेन वॉटसन का साथ रविंद्र जडेजा दे रहे थे और वह अच्छे हिटर माने जाते हैं.
शेन वॉटसन के रन आउट होने को लेकर क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली तो साफ़-साफ़ मानते है कि उन्हें वॉटसन से शिकायत है.
विजय लोकपल्ली कहते हैं कि एक तो वॉटसन ने इतना शानदार मैच बनाया और जितना अनुभव उनके पास है उन्हें मैच जिताकर ही वापस आना चाहिए था.
अगर वह मैच जिता देते तो क्रिकेट प्रेमी लम्बे समय तक उन्हें याद रखते कि किस तरह से एक बढ़ती उम्र के खिलाड़ी ने अपने दम पर लगातार दूसरा आईपीएल फ़ाइनल अपनी टीम को जीता दिया.
अब मुंबई की जीत के बाद कहा जा सकता है कि युवा मुंबई ने बूढ़े शेरों को मात दी लेकिन याद रखना चाहिए कि इन्हीं बूढ़े शेरों ने आख़िरी गेंद तक युवा टीम के साथ संघर्ष किया और केवल एक गेंद से हारे.
अब इसे भी इत्तेफ़ाक़ ही कहा जाएगा कि आख़िरी ओवर से पहले अपने पिछले ही ओवर में जो पारी का 16वां ओवर था उसमें 20 रन खाने वाले 35 साल के लसिथ मलिंगा ने ही मुंबई को जीत दिलाई. अब वह भी तो मुंबई के बूढ़े शेर ही हैं.
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