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कोरोना लॉकडाउन में लोग ज़्यादा शराब क्यों पी रहे हैं?
जब भारत में लॉकडाउन के बीच, शराब की दुकानें खुलीं तो लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. शराब के शौक़ीन मानो सांसें रोक कर, दिल थाम कर इस घड़ी का इंतज़ार कर रहे थे.
शराब की दुकानों के बाहर, न तो कोरोना वायरस का ख़ौफ़ था, न सोशल डिस्टेंसिंग की परवाह. मय के शौक़ीन तो बस छलकाने के लिए अपने जाम भरना चाहते थे.
वैसे, अगर इस बात से किसी को राहत मिलती हो, तो ख़बर ये है कि लॉकडाउन के दौरान कई अन्य देशों में भी शराब की ख़रीद-फ़रोख़्त बढ़ गई है. मार्च महीने में ही, ब्रिटेन में शराब की बिक्री में 22 फ़ीसद की बढ़ोत्तरी देखी गई थी. जबकि, अमरीका में शराब की बिक्री 55 प्रतिशत तक बढ़ गई थी.
सोशल मीडिया पर शराबनोशी के मीम की बाढ़ सी आ गई है. ये दौर, सामूहिक चिंता का है. किसी को पता नहीं कि आगे क्या होगा? हालात कब सामान्य होंगे? स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा रही हैं.
और अन्य ज़रूरी सेवाओं को छोड़ कर अर्थव्यवस्था के बाक़ी पहिए रुके हुए हैं. लोग डरे हुए हैं. फ़िक्रमंद हैं और उन्हें घर में क़ैद रहने की वजह से खीझ भी हो रही है.
लॉकडाउन के इस मुश्किल दौर में शराब ही लोगों की साथी बन रही है. दुनिया भर में शराब की खपत बढ़ रही है.
शराब पर किताब लिखने वाली एनी ग्रेस कहती हैं कि, 'जब शराब हमारे शरीर में जाती है, तो बड़ी राहत महसूस होती है. ऐसा लगता है कि आसपास का तनाव भाग रहा है. दिमाग़ रिलैक्स हो जाता है.'
मगर, ये राहत वक़्ती होती है. अगले बीस से तीस मिनट के अंदर, हमारा शरीर, अल्कोहल को बाहर निकालना शुरू कर देता है. इसकी वजह से हमें शराब की और तलब होती है. हम बेसब्र होना चाहते हैं. और पीना चाहते हैं.
दिमाग़ का नशा
असल में शराब हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग, दिमाग़ पर असर डालती है. संदेश का आदान-प्रदान करने वाले न्यूरोट्रांसमिटर, अल्कोहल से प्रभावित होते हैं.
इनके काम करने की रफ़्तार धीमी हो जाती है. इसीलिए, लोग शराब पीने के बाद सुकून महसूस करते हैं. अल्कोहल शरीर में जाने के बाद, डोपामाइन नाम का हारमोन निकलता है, जो हमारे भीतर और तलब पैदा करता है.
ऑस्ट्रेलिया के ड्रग और अल्कोहल रिसर्च सेंटर के माइकल फैरेल कहते हैं कि, "लोग अक्सर अपनी चिंता को फ़ौरी तौर पर दूर करने के लिए शराब पीते हैं. मगर, विरोधाभास इस बात का है कि उनकी चिंता दूर होने के बजाय और बढ़ जाती है. शराब न पिएं तो वो और परेशान हो जाते हैं."
शराब क्यों पीते हैं लोग?
बात सिर्फ़ लॉकडाउन तक सीमित नहीं है. दुनिया में तमाम लोग ऐसे हैं, जो अपना हौसला बढ़ाने के लिए शराब पीते हैं. शराब की लत लगने की ये भी एक वजह होती है कि लोग इसे पीने के बाद फ़ौरी तौर पर साहस से भरा हुआ महसूस करते हैं.
लॉकडाउन के कारण घर में बंद लोग इसलिए भी ज़्यादा शराब पी रहे हैं क्योंकि हमारे रुटीन गड़बड़ हो गए हैं. हम जैसे बाक़ी चीज़ों की जमाख़ोरी कर रहे हैं, वैसे ही शराब का हाल है. अब शराब घर में मौजूद है, तो लोग पिएंगे ही.
नियम तोड़ कर शराबनोशी
मनोविज्ञान कहता है कि लोग अपनी बात या बर्ताव को सही ठहराने के लिए आस-पास के लोगों में वही आदत तलाशते हैं. यही बात शराब की लत पर भी लागू होती है.
ऐसे में कभी एक या दो पेग पीने वाले भी आस-पास शराब की बढ़ती खपत को देखते हुए ख़ुद का अधिक शराब पीना जायज़ ठहराने लगते हैं.
ख़तरनाक हो सकता है महामारी के दौरान शराब पीना
शराब पीने से हमारा इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाता है. इससे बीमारियां हम पर आसानी से हमला बोल सकती हैं.
इटली में हाल ही में हुई एक रिसर्च कहती है कि औसत मात्रा में शराब पीने पर भी कोविड-19 का शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है.
क्योंकि, जिन्हें शराब की लत होती है, उनके फेफड़े ठीक ढंग से काम नहीं करते. और कोविड-19 की महामारी फेफड़ों को ही सबसे पहले शिकार बनाती है.
ख़ुद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एडवाइज़री जारी की है कि अगर आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बचाए रखना चाहते हैं, तो शराब से दूर ही रहें.
क्योंकि इससे कोविड-19 का सबसे ख़तरनाक स्तर यानी एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) आपको अपना शिकार बना सकता है.
लगातार घर में रहते हुए शराब पीने से घरेलू हिंसा के मामले बढ़ने का डर रहता है. चीन से लेकर अमरीका और फ्रांस तक में देखा गया है कि लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के मामलों में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा देखा गया.
शराब के इन ख़तरों को देखते हुए ही दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, भारत और ग्रीनलैंड जैसे कई देशों ने लॉकडाउन के दौरान शराब की बिक्री पर रोक लगा दी थी.
लेकिन, कई लोगों को शराब की इतनी लत थी कि उन्होंने थिनर और दूसरे केमिकल पीकर अपनी तलब शांत करनी चाही. नतीजा उन्हें जान से हाथ धोना पड़ा.
हालांकि जहां पर शराब की बिक्री पर रोक नहीं लगी थी, वहां पर भी ये देखा गया कि शराब पीने वाले एक तिहाई लोग औसत से कम ही पी रहे थे.
जबकि 20 प्रतिशत लोग पहले से अधिक शराब का सेवन कर रहे थे. यानी, शराब की बिक्री बढ़ाने वालों की संख्या काफ़ी कम थी. ये बात और भी डराने वाली थी.
माइकल फैरेल और एनी ग्रेस कहते हैं कि शराब की लत कोई अच्छी लत नहीं. ख़ासतौर से अगर आप ख़ुद पर क़ाबू नहीं रख पाते हैं. ऐसे लोगों के लिए ऑनलाइन मदद भी कई जगह मुहैया कराई जाती है.
एनी ग्रेस कहती हैं कि, 'मुश्किल वक़्त में लोगों के इरादे और पक्के होते हैं. दबाव के कारण ही हम कई बार अच्छी आदतें अपना लेते हैं.'
उम्मीद है कि लॉकडाउन हमें शराब और अन्य बुरी लतों से आज़ाद कराएगा.
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