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15 दिनों में 300 किमी कैसे सफ़र करते हैं स्पेन के चरवाहे?
- Author, एंटोलिन एवज़ुएला
- पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
- प्रकाशित
गायों का झुंड 300 किलोमीटर का सफ़र महज 15 दिनों में तय करता है. हर साल गर्मियों में दक्षिणी स्पेन के मैदानों में पशु प्रवासन शुरू होता है. इसे ट्रांसह्यूमेंस कहा जाता है.
चरने के लिए घास की तलाश में पशु एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र की लंबी दूरी तय करते हैं.
चराई करने वाले पशु पालतू बनाए जाने से पहले भी एक जगह से दूसरी जगह जाते थे, लेकिन यहां वे चरवाहे की निगरानी में यात्रा करते हैं.
इस साल 3 गोशालाओं की 547 गायों ने दक्षिणी स्पेन के सूखे मैदानों से सिस्टेमा पहाड़ी श्रृंखला के हरे-भरे चरागाह तक की लंबी यात्रा की. 15 दिनों के सफ़र में ये गायें 300 किलोमीटर चलीं.
सदियों पुरानी विरासत
ट्रांसह्यूमेंस का संबंध स्पेन की सांस्कृतिक विरासत से है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है. 52 साल के जोस पेड्रो बचपन से ही यह सब देखते आ रहे हैं.
20 साल पहले उन्होंने अपने भतीजों- डिएगो (39) और आंद्रेस (30) को इस पुरानी परंपरा के बारे में बताना शुरू किया था.
इस साल पेड्रो और उनकी 130 गायों ने उनके भतीजों के साथ उत्तरी पहाड़ की तराई तक की यात्रा की.
सर्दियों में जब पहाड़ बर्फ से ढंक जाएंगे तब वे दक्षिण के गर्म मैदानों में लौट आएंगे.
जीवट गाय
मवेशियों के लिए प्रवासन चुनौतियों से भरा है. चराई के लिए घास और पानी की तलाश में उन्हें हर दिन लंबी दूरी तय करनी पड़ती है.
लेकिन स्पेन की स्थानीय काली गाय एविलेना-नेग्रा इबेरिका इतनी जीवट नस्ल की होती है कि उसके बछड़े केवल एक हफ्ते की उम्र में भी प्रवासन के लिए तैयार हो जाते हैं.
सबसे अहम है पानी
गर्मियों के सफ़र के लिए सबसे ज़रूरी है पानी. कहां रुकना है, कहां सोना है और हर दिन कितनी दूरी तय करनी है, ये सारी बातें पानी की उपलब्धता से तय होती हैं.
गायों का ये झुंड रोजाना 15 हजार लीटर पानी पी जाता है. इसके अलावा चरवाहों और उनके घोड़ों को भी पानी की ज़रूरत होती है.
गर्मियों में छोटे जलाशय और तालाब जल्दी सूख जाते हैं, इसलिए पानी का स्रोत रास्ते से दूर हटकर भी हो सकता है. ऐसा होने पर गर्मियों में सफ़र के लिए बहुत लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है.
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मददगार हैं कुत्ते
प्रवासन के दौरान अक्सर गायें खो जाती हैं, इसलिए चरवाहों को उन पर ध्यान देना पड़ता है.
कोई गाय पीछे न छूट गई हो, इसके लिए उनकी नियमित गिनती करनी पड़ती है.
झुंड को साथ रखने में कुत्ते मददगार होते हैं. एलानो नस्ल का कुत्ता अपनी बहादुरी और मवेशियों को चराने की क्षमता के लिए मशहूर है.
एक बार प्रशिक्षित कर देने पर इन कुत्तों को आदेश देने की ज़रूरत नहीं होती.
इनके मालिक इनका बहुत ही ख्याल रखते हैं. सोने के लिए इनको सबसे अच्छी जगह मिलती है और ये वही खाना खाते हैं जो इनके मालिक चरवाहे खाते हैं.
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संरक्षित सड़कें
स्पेन में ट्रांसह्यूमेंस को मुमकिन बनाती हैं यहां की वे सड़कें जो सदियों से सिर्फ़ मवेशियों (भेड़ों और गायों) के लिए संरक्षित हैं.
1273 ईस्वी में कैस्टाइल के राजा ने भेड़पालकों का संगठन 'दि मेस्टा' बनाया था.
मेस्टा ने प्रवासन के रास्तों के लिए कानूनी मान्यता हासिल की ताकि उन रास्तों के इर्द-गिर्द खेती करने वाले किसानों से मवेशियों की रक्षा हो सके.
प्रवासन के दौरान चरवाहों को चरागाहों के इस्तेमाल के अधिकार की गारंटी मिली.
ये रास्ते अधिकतम 75.22 मीटर और न्यूनतम 20.89 मीटर चौड़े हैं. इतना चौड़ा रास्ता सिर्फ़ इसलिए छोड़ा गया ताकि सफ़र के दौरान मवेशियों को घास मिलती रहे.
हालांकि अब इन रास्तों का इस्तेमाल बहुत कम होता है, लेकिन स्पेन की सरकार ने इनको बचाने के लिए 1995 में नया कानून बनाया.
इन रास्तों की कुल लंबाई 1,24,000 किलोमीटर है जो स्पेन के रेल नेटवर्क का आठ से नौ गुना है.
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कैंप में आराम
1960 तक इन रास्तों पर चरवाहों के लिए सरायें और मवेशियों के लिए बाड़े बने हुए थे, लेकिन अब वहां बस कुछ खंडहर बचे हैं.
19वीं सदी में रेल लाइन बिछ जाने और बड़े ट्रकों के आ जाने के बाद 15 से 30 दिनों का पैदल सफ़र अब सिर्फ़ एक दिन में पूरा होने लगा है, इसलिए ये रास्ते इस्तेमाल नहीं होते.
फिर भी टॉरेस परिवार और तीन अन्य पशुपालक पश्चिमी स्पेन में ट्रांसह्यूमेंस अपनाते हैं. रात में रुकने के लिए सरायों का इस्तेमाल करने की जगह वे कैंप लगाते हैं.
रात में आग के लिए वे बलूत के पेड़ों की लकड़ियां जलाते हैं और दिन में दोपहर की गर्मी से बचने के लिए पेड़ों की छांव में आराम करते हैं.
दोपहर के भोजन के बाद चरवाहे और उनकी गायें, दोनों कुछ घंटे आराम करते हैं और फिर सूरज ढलने तक सफ़र पर निकल पड़ते हैं.
बड़ी क़ीमत चुकाना
मवेशियों के प्रवासन का आधुनिकीकरण हो रहा है, लेकिन इसकी क़ीमत पर्यावरण को चुकानी पड़ी है.
स्पेन जैसे अर्ध-शुष्क देशों में मवेशियों का प्रवासन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अहम है.
गायें बीज खाती हैं और गोबर के जरिये कई किलोमीटर दूर तक उनको फैला देती हैं. इससे इस क्षेत्र की जैव विविधता बनाए रखने में मदद मिलती है.
मिसाल के लिए, प्रवासन के रास्तों पर प्रति वर्गमीटर क्षेत्र में 40 तरह के पौधे हो सकते हैं. ट्रांसह्यूमेंस न हो तो यह संख्या बहुत गिर जाएगी.
एक और ख़तरा यह है कि जब गायें पैदल प्रवासन नहीं करती हैं तब रेल या ट्रक से भेजे जाने तक उनको चरने के लिए छोड़ दिया जाता है. इससे वे अधिक चराई करके घास के मैदानों को उजाड़ देती हैं.
पशुपालन व्यवसाय
कुछ उम्मीद बची हुई है. ट्रांसह्यूमेंस और टिकाऊ खेती के तरीकों की वापसी हो रही है.
पिछले कुछ दशकों में स्पेन की ग्रामीण आबादी तेज़ी से बूढ़ी हुई है और युवा आबादी शहरों की ओर पलायन कर गई है.
इसके बावजूद कुछ युवाओं (जैसे टॉरेस बंधु) में इन कृषि परंपराओं को लेकर नये सिरे से रुचि जग रही है.
डिएगो और आंद्रेस ने गाय पालने का अपना पारिवारिक व्यवसाय शुरू किया और अब वे भेड़, कुत्ते और घोड़े भी पालते हैं.
नई तकनीक का इस्तेमाल करके वे पशुपालन के पुराने तरीकों में बदलाव कर रहे हैं.
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फेसबुक और जीपीएस
आंद्रेस ट्रांसह्यूमेंस की परंपरा को कैसे निभा रहे हैं, यह दुनिया को दिखाने के लिए वह अपनी यात्रा के बारे में फेसबुक पोस्ट करते हैं.
इससे उनके पशुपालन प्रोफाइल में भी इजाफ़ा होता है. उनको अपने गोमांस और अन्य उत्पादों को बेचने में मदद मिलती है.
आम तौर पर मोबाइल फ़ोन और सोशल मीडिया स्पेन के पशुपालकों के बीच बहुत पसंद किया जाता है क्योंकि ये उनको अपनी प्रथाओं और जीवनशैली को दुनिया भर के लोगों के साथ साझा करने के मौके देता है.
जीपीएस ट्रैकिंग के सहारे रात में खो जाने वाली गायों का आसानी से पता लगाया जा सकता है.
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शौकिया काउबॉय
कुछ युवा शौक में चरवाहे बने हैं और खाली समय में इसमें शरीक हो रहे हैं. आंदोलन में मदद कर रहे हैं.
पेड्रो के मुताबिक मवेशियों की दुनिया से जुड़े लोगों में "पुराने फ़ैशन" के प्रति रुचि बढ़ रही है.
37 साल के पेड्रो स्पेन की सबसे बड़ी टायर निर्माता कंपनी में टेक्निकल ऑपरेटर हैं.
घोड़ों के प्रति उनका जुनून उनको टॉरेस परिवार के करीब लाया और कुछ साल पहले वह उनके साथ मवेशियों के सफ़र में शामिल होने लगे.
आज उनको टीम का अभिन्न सदस्य माना जाता है. वह साल में दो बार होने वाले सफ़र की तारीखों को ध्यान में रखकर ही अपनी छुट्टियां प्लान करते हैं.
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अमिट परंपराएं
पशु प्रवासन की जीवनरेखा पुराने लोग ही हैं. वे सब कुछ साथ रखते हुए सफ़र का नेतृत्व करते हैं और जानकारियां साझा करते हैं.
डिएगो और आंद्रेस के पिता जोस आंद्रेस टॉरेस (67 साल) टीम के "सपोर्ट ड्राइवर" हैं.
वह आगे-आगे मोटरकार में चलते हैं और जिन जगहों पर सामान्य यातायात वाली सड़कें पशुओं के लिए संरक्षित रास्तों पर मिलती हैं, वहां ट्रैफिक रुकवाते हैं ताकि मवेशी आसानी से सड़क पार कर लें.
कहीं-कहीं दोनों सड़कें एक ही रास्ते पर साथ-साथ चलती हैं. उन जगहों पर मवेशियों को वरीयता मिलती है.
टॉरेस ही यात्रा के दौरान सप्लाई के लिए ज़िम्मेदार हैं और कैंपग्राउंड बनाने के प्रभारी भी वही हैं.
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दोस्ताना माहौल
चरवाहे की उम्र से कोई फर्क नहीं पड़ा. सभी साथ मिलकर काम करते हैं. सभी के अपने-अपने काम हैं, लेकिन वे एक दूसरे की मदद करना भी जानते हैं.
सूरज ढलने पर वे अपना कैंप लगा लेते हैं. वे मवेशियों के पास ही रहते हैं, लेकिन रात में भगदड़ न मच जाए, इसलिए वे सपोर्ट कार के पीछे सोते हैं.
उनके सामने रोज़मर्रा की और अप्रत्याशित चुनौतियां आती रहती हैं. लेकिन चरवाहे जानते हैं कि ज़िंदगी में एक-दूसरे के साथ का कैसे आनंद लिया जाए और कैसे खिलखिलाकर हंसा जाए.
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.)
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