नेपाल: ग्लोबल वार्मिंग का 'ज़िम्मेदार' नहीं फिर भी आपदाओं का शिकार, क्या ये है वजह

बेटे के अंतिम संस्कार के दौरान रोतीं एक महिला
इमेज कैप्शन, नेपाल में पिछले हफ़्ते आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक क़रीब एक हज़ार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है
प्रकाशित
पढ़ने का समय: 7 मिनट

नेपाल पर जलवायु संकट का गंभीर असर पड़ा है. वह बाढ़, भूस्खलन, जंगल की आग और सूखे जैसी घटनाओं से सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों में शामिल है.

हालांकि नेपाल का कहना है कि वह ऐसे जलवायु संकट का शिकार है, जिसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है.

अपने इस तर्क के समर्थन में नेपाल अक्सर वैश्विक स्तर पर कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में अपने हिस्से का ज़िक्र करता है. कुछ अध्ययनों के अनुसार यह 0.05% से भी कम है.

ग्रीनहाउस गैसें ग्लोबल वार्मिंग की मुख्य वजह हैं.

लेकिन नेपाल अक्सर विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की वजह से सुर्खियों में रहता है. ख़ास तौर पर नेपाल-चीन के सीमावर्ती इलाक़े में अक्सर ऐसी आपदाएं आती रहती हैं.

नेपाल ख़ुद एक पहाड़ी देश है जिसकी आबादी क़रीब तीन करोड़ है. नेपाल दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देशों की सीमा पर बसा है. इसके उत्तर में चीन तो पूर्व, पश्चिम और दक्षिण सीमा की ओर भारत है.

बीबीसी संवाददाता नवीन सिंह खड़का कहते हैं, "नेपाल में एक पुरानी कहावत है कि यहां के 'लोगों को वह ज़हर पीना पड़ता है, जो उन्होंने नहीं बनाया है.' इस बात के पीछे उनका तर्क है कि कार्बन के वैश्विक उत्सर्जन में नेपाल का योगदान 0.05 फ़ीसदी से भी कम है."

यानी नेपाल की ग्लोबल वार्मिंग में भूमिका नहीं के बराबर है, फिर भी उसे इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं.

ग्रीन एनर्जी पर ज़ोर

नेपाल के रसुवा में भांगे वाटरफ़ॉल के पास मौजूद कुछ पर्यटक. यह तस्वीर 10 अगस्त, 2026 की है
इमेज कैप्शन, नेपाल के रसुवा में भांगे वाटरफ़ॉल के पास मौजूद कुछ पर्यटक. यह तस्वीर 10 अगस्त, 2026 की है
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
दिनभर
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

नवीन सिंह खड़का बताते हैं कि पानी के प्रचुर संसाधनों के कारण नेपाल में बिजली का लगभग पूरा उत्पादन जलविद्युत (हाइड्रोइलेक्ट्रिक) से होता है, जो मूल रूप से हिमालय के ग्लेशियरों से मिलने वाले पानी पर निर्भर है.

उनका कहना है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ आयात करने के मामले में भी नेपाल काफ़ी आगे है.

नेपाल सोलर और विंड एनर्जी जैसी अन्य स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को भी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

इसके अलावा अधिकारियों का कहना है कि नेपाल ने अपनी 46 प्रतिशत से अधिक ज़मीन को जंगलों के रूप में संरक्षित किया है, जो 'कार्बन सिंक' का भी काम करते हैं.

ये जंगल जलवायु संकट से निपटने की दुनिया की कोशिश में एक अहम साधन हैं.

'कार्बन सिंक' का मतलब ऐसी कोई भी प्राकृतिक या इंसानी व्यवस्था, जो वायुमंडल से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड गैस को अवशोषित करता हो. यानी नेपाल का दावा है कि वह वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता नहीं है बल्कि वायुमंडल से उसे ले लेता है.

नवीन सिंह खड़का कहते हैं, "इन संदर्भों में देखें तो नेपाल बाढ़, जंगल की आग, लैंड स्लाइड या जिस हिसाब से सूखा हो रहा है, लोगों की जान जा रही है, उससे प्रभावित होता है. नेपाल के लोग कहते हैं कि यह पर्यावरण का अन्याय है, न्याय नहीं हैं."

बार-बार आ रही आपदाएं

नेपाल की नदियां

एक तरफ नेपाल क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) के दुष्परिणामों का शिकार रहा है वहीं इसकी भोगौलिक स्थिति भी इसे हर वक़्त ख़तरे के क़रीब रखती है.

विशेषज्ञ इसके पीछे नेपाल-चीन सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक बनावट को भी ज़िम्मेदार ठहराते हैं. इसके अलावा ग्लेशियल झीलों की स्थितियों में परिवर्तन की वजह से इस क्षेत्र में बार-बार हादसे होते रहते हैं.

दरअसल तिब्बती क्षेत्र में कई ग्लेशियल लेक (हिमताल) हैं और नेपाल की ओर ढलानदार क्षेत्र में कई बस्तियां होने के कारण इन झीलों के फटने और हिमस्खलन की वजह से नुक़सान की आशंका बनी रहती है.

मॉनसून के दौरान भारी बारिश, ग्लेशियर में होने वाले बदलाव और हिमस्खलन, कम समय में ही बड़ी मात्रा में पानी और पत्थर-मिट्टी निचले तटीय क्षेत्रों तक पहुंचा देते हैं.

वीडियो कैप्शन, नेपाल बाढ़ के बाद अब अपनों को ढूंढ रहे लोग

वैज्ञानिकों के मुताबिक़, शुरुआती जांच में पता चला है कि 26 अगस्त को आई बाढ़ के पीछे भी ग्लेशियर टूटने से बर्फ़ का तेज़ी से पिघलना रहा होगा.

नवीन सिंह खड़का कहते हैं, "हिमालय पर्वत की जो श्रृंखलाएं हैं उसके नीचे बहुत सारी नदियां बहती हैं. यही नदियाँ पहाड़ों पर होने वाली घटनाओं को नीचे की तरफ ले आती हैं. कभी-कभी वह भारत और बांग्लादेश तक पहुंच जाती हैं."

"नेपाल में भूकंप भी बहुत ज़्यादा आता है. साल 2015 का भूकंप तो बहुत भयावह था. लेकिन उसके अलावा भी हिमालय के क्षेत्र में हर दिन कुछ न कुछ होता रहता है."

"वैज्ञानिकों का कहना है कि कंपन से पहाड़ और भी कमज़ोर हो जाते हैं और जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ़ (ग्लेशियर) पिघल रही है. जबकि यही बर्फ़ पहाड़ों में सीमेंट का काम करती है और उन्हें पकड़कर रखती है."

इसलिए इस ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पहाड़ों की यह आपसी पकड़ या मज़बूती कमज़ोर हो रही है, जो अक्सर बारिश के मौसम में लैंड स्लाइड के रूप में सामने आती है.

बाढ़ के बाद नुवाकोट में घर के बाहर मलबे में अपने सामान तलाशते लोग
इमेज कैप्शन, बाढ़ के बाद नुवाकोट में घर के बाहर अपना सामान तलाशते लोग

नेपाल में साल 2024 में भी बाढ़ और लैंडस्लाइड की वजह से बड़ी सख्या में लोगों की मौत हो गई थी.

साल 2023 में अक्तूबर और नवंबर के महीने में देश में भूकंप के झटके महसूस किए गए.

2021 में भी नेपाल में लैंड स्लाइड और बाढ़ की वजह से कई लोगों की मौत हुई थी.

लैंड स्लाइड की घटनाएं नेपाल में साल 2020, 2019, 2017 और साल 2016 में भी देखी गईं.

विशेषज्ञों के मुताबिक, दरअसल नेपाल के लिए इस तरह की आपदाएं एक आम घटना सी हो गई हैं.

नेपाल की तैयारी

नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ कई गांवों, कस्बों और बाज़ारों को अपने साथ बहाकर ले गई
इमेज कैप्शन, नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ कई गांवों, कस्बों और बाज़ारों को अपने साथ बहाकर ले गई

नवीन सिंह खड़का कहते हैं कि लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता की वजह से नेपाल जलवायु परिवर्तन के कुछ न टाले जा सकने वाले प्रभावों से निपटने के लिए उतना काम नहीं कर पाया, जितना वह कर सकता था.

उनका कहना है कि नेपाल को पिछले कुछ वर्षों में विकसित देशों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियों से ख़ुद को जलवायु परिवर्तन के मुताबिक़ ढालने के लिए अच्छी खासी रकम मिली है.

वह कहते हैं, "लेकिन आलोचकों का कहना है कि इसका बहुत बड़ा हिस्सा काफ़ी जगह ज़मीनी स्तर पर ज़रूरतमंद समुदायों तक नहीं पहुंच पाया है."

नवीन सिंह कहते हैं, "नेपाल में अभी जो हुआ, तो वहां पहाड़ों पर चेतावनी देने वाले सायरन वगैरह नहीं थे. दो-तीन महीने पहले हमने एक ख़बर में बताया था कि एवरेस्ट जैसी हाई-प्रोफ़ाइल जगह में एक काफ़ी ख़तरनाक झील है, लेकिन वहां का वार्निंग सिस्टम काफ़ी साल से ख़राब पड़ा है."

नेपाल में आई बाढ़ ने कई इलाक़ों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी
इमेज कैप्शन, नेपाल में आई बाढ़ ने कई इलाक़ों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है

इस तरह आपदाओं को लेकर नेपाल की तैयारियों की भी आलोचना होती रहती है. नेपाल में सरकारों की अस्थिरता को भी इसके पीछे ज़िम्मेदार माना जाता है.

नवीन सिंह के मुताबिक़, "राजनीतिक स्थिरता के अभाव में नेपाल में जिस तरह की नीतियाँ या योजनाएं बननी चाहिए, वह नहीं बन पाती हैं."

राजनीतिक ​अस्थिरता के कारण देश के प्रमुख सरकारी पदों पर बार-बार बदलाव होते रहे हैं, किसी भी स्थिर नीति या योजना के लिहाज से यह स्थिति अच्छी नहीं मानी जाती है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.