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ट्रंप ने किया 300 अरब डॉलर डील का एलान, रिलायंस के साथ साझेदारी के इस सौदे से किसे असल फ़ायदा?
- Author, दीपक मंडल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
ईरान युद्ध की वजह से तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सस में ऑयल रिफ़ाइनरी लगाने का एलान किया है.
ट्रंप के मुताबिक़ अमेरिका फ़र्स्ट रिफ़ाइनिंग की ओर से लगाई जाने वाली इस रिफ़ाइनरी में भारतीय कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ सहयोग करेगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे अमेरिकी एनर्जी सेक्टर के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है.
ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी.
लेकिन ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि 'ईरान युद्ध पूरा' हो चुका है.
इसके बाद कच्चे तेल की कीमत घटकर 90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई.
हालाँकि कच्चे तेल की ये कीमत भी 28 फ़रवरी से शुरू हुए युद्ध से पहले की कीमतों से काफ़ी ज़्यादा है. फ़रवरी में इंडियन बास्केट में कच्चे तेल की कीमत 69 डॉलर प्रति बैरल थी.
बीबीसी वेरिफ़ाई के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही में बाधा डाली गई तो उस पर 20 गुना अधिक ताक़त के साथ हमला करेंगे.
इस रास्ते से पूरी दुनिया की तेल सप्लाई का 20 फ़ीसदी हिस्सा गुजरता है.
ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर टेक्सस में रिफ़ाइनरी प्लांट लगाने की योजना का एलान करते हुए लिखा, '' अमेरिका फिर से असली एनर्जी वर्चस्व की ओर लौट रहा है. आज मुझे यह एलान करते हुए गर्व हो रहा है कि 'अमेरिका फर्स्ट रिफ़ाइनिंग' टेक्सस के ब्राउन्सविले में रिफ़ाइनरी खोल रही है. यहां पिछले 50 साल में उसकी ओर से खोली जाने वाली पहली रिफ़ाइनरी होगी. यह 300 अरब डॉलर की ऐतिहासिक डील है. ये अमेरिका के इतिहास की सबसे बड़ी डील है. यह अमेरिकी कामगारों, ऊर्जा क्षेत्र और दक्षिण टेक्सस के शानदार लोगों के लिए एक बड़ी जीत है.''
''मैं भारत में हमारे साझेदारों और वहां की सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को इस बड़े निवेश के लिए धन्यवाद देता हूं.''
ट्रंप के इस एलान को अंतरराष्ट्रीय तेल मार्केट में सप्लाई सुनिश्चित करने की अमेरिकी कोशिशों से जोड़कर देखा जा रहा है.
इससे पहले अमेरिका ने भारत को रूस से तेल ख़रीदने के लिए 30 दिन की छूट दी थी.
ट्रंप का ये क़दम इसलिए भी अहम माना जा रहा है कि भारत में ऑयल रिफ़ाइनरी इंडस्ट्री की क्षमता काफी ज़्यादा है.
भारत ऑयल रिफाइनिंग क्षमता के मामले में दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल है.
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की सप्लाई बरकरार रखने में भारत की रिफ़ाइनिंग इंडस्ट्रीज़ की अहम भूमिका समझी जाती है.
विश्लेषकों का मानना है कि भारत को कच्चा तेल मिलता रहे तो अंतरराष्ट्रीय मार्केट में ऑयल सप्लाई बेहतर रहेगी.
किसे होगा फ़ायदा
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ रिफ़ाइनरी अमेरिकी-मेक्सिको सीमा पर मौजूद ब्राउन्सविले पोर्ट में लगाई जाएगी. इसकी हर दिन की रिफ़ाइनिंग क्षमता 1.68 लाख बैरल होगी.
अमेरिका फ़र्स्ट के चेयरमैन जॉन वी. कैल्स ने कहा पिछली 50 साल में अमेरिका पहली बार नई रिफ़ाइनरी लगा रहा है.
इसमें अमेरिकी शेल ऑयल की रिफ़ाइनिंग होगी.
अमेरिका के गल्फ कोस्ट के कई रिफ़ाइनरी फ्रैकिंग से निकले हल्के और कम सल्फर वाले कच्चे तेल को प्रोसेस नहीं कर पाते.
पिछले लगभग 40 वर्षों में इन रिफ़ाइनरियों को सस्ते, भारी और अधिक सल्फर वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए तैयार किया गया था. इसका घनत्व ज़्यादा होता है और उसमें सल्फर भी ज्यादा होता है.
विश्लेषकों का मानना है इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की रिफ़ाइनिंग विशेषज्ञता और क्षमता इस मामले में अमेरिका की मददगार साबित हो सकती है.
एनर्जी पॉलिसी विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि अमेरिका के पास आधुनिक रिफ़ाइनरी नहीं है. जबकि रिलायंस के पास मॉडर्न और वर्ल्ड क्लास रिफाइनरीज हैं.
वो कहते हैं कि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ बड़ी मात्रा में पेट्रोल, डीजल और टरबाइन फ़्यूल का निर्यात करती है.
रिलायंस के लिए ये फ़ायदे का सौदा इसलिए हो सकता है कि उसकी रिफ़ाइनरी टेक्सस और मेक्सिको खाड़ी के नज़दीक लग जाएगी, जहां काफ़ी मात्रा में कच्चा तेल उपलब्ध है.
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक और इसका उपभोक्ता, दोनों है.
नरेंद्र तनेजा कहते हैं, ''अमेरिका को बड़ी मात्रा में पेट्रोल, डीजल और टरबाइन फ़्यूल (विमान ईंधन) आयात करना पड़ता है. मेक्सिको खाड़ी और टेक्सस के नज़दीक मिलने वाले भारी कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता अमेरिका की रिफ़ाइनरियों के पास नहीं है. इसमें रिलायंस की रिफाइनिंग विशेषज्ञता मददगार होगी.''
''अमेरिका को इसका सबसे बड़ा फ़ायदा होगा कि उसे पेट्रोल, डीजल और टरबाइन फ़्यूल जैसे रिफाइंड ऑयल के बहुत ज़्यादा आयात पर निर्भर नहीं रहना होगा.''
''इसका इस्तेमाल वो घरेलू बाज़ार में सप्लाई, यूरोप और दूसरे देशों को निर्यात के लिए कर सकेगा.''
प्रोजेक्ट पर क्यों उठ रहे हैं सवाल
डोनाल्ड ट्रंप ने रिफ़ाइनरी लगाने का एलान भले ही किया होगा लेकिन अभी तक रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से इस पर कोई बयान नहीं आया है.
नरेंद्र तनेजा कहते हैं, ''ट्रंप साहब के इस टिप्पणी के आधार पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी. रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से इस पर कोई बयान नहीं आया है.''
वो कहते हैं, ''अभी इस पर कुछ भी साफ़ नहीं है कि इसके लिए निवेश कहां से आएगा. अगर ये ज्वाइंट वेंचर होगा तो इसमें अधिकतम हिस्सेदारी किसकी होगी. रिफ़ाइनरी कितनी बड़ी होगी और इसकी क्षमता कितनी होगी. इसमें किस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा. रिलायंस जो पूंजी लगाएगी वो अमेरिकी बैंकों का कर्ज होगा या उसका अपना पैसा.''
नरेंद्र तनेजा कहते हैं, ''अगर रिलायंस इसमें पैसा लगाती है तो ये भारत के बाहर उसका पहला रिफ़ाइनिंग वेंचर होगा. हालांकि अभी इस पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता. ''
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ विश्लेषकों को इस बात पर संदेह है कि अमेरिका के गल्फ कोस्ट पर नई रिफ़ाइनरी की वास्तव में जरूरत है भी यानहीं.
क्योंकि यहां पहले से ही अमेरिका की दस सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से आठ मौजूद हैं. इनमें से सबसे बड़ी पांच रिफाइनरियां टेक्सस में हैं.
रिफाइंड फ़्यूल एनालिटिस्क के मैनेजिंग डायरेक्टर जॉन ऑयर्स ने रॉयटर्स कहा, "ट्रंप प्रशासन की इस तरह की शुरुआती घोषणाओं में अक्सर बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर बातें कही जाती हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.