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'हर दिन महीने की तरह बीत रहा है': अमेरिका-इसराइल के हमले के बाद ईरान के लोगों का डर और उम्मीदें
- Author, फ़ारेन ताग़ीज़ादेह
- पदनाम, बीबीसी फ़ारसी
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
अमेरिका और इसराइल के ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध को लगभग एक हफ़्ता हो चुका है. युद्ध की शुरुआत से ही, लगातार हो रहे हवाई हमलों, सुरक्षा बलों की धमकियों और इंटरनेट बंदी के बीच ईरानी लोग अपने परिजनों से संपर्क बनाए रखने की कोशिशें कर रहे हैं.
देश के अंदर लोगों से बात करना मुश्किल है, लेकिन कई ईरानियों ने, जिनकी पहचान सुरक्षा कारणों से बदल दी गई है, बीबीसी न्यूज़ फ़ारसी से अपने अनुभव साझा किए हैं.
तेहरान में रहने वाले सालार ने बताया, “जो हम इस वक़्त झेल रहे हैं, वह पिछले साल जून में हुए 12 दिन के युद्ध से भी कहीं ज़्यादा भयानक है. विस्फोटों की संख्या, तबाही, जो कुछ भी हो रहा है, यक़ीन करना मुश्किल है.”
अमेरिका और इसराइल ने संयुक्त रूप से 28 फ़रवरी को ईरान पर हमले किए थे. ईरान की राजधानी तेहरान तब से ही लगातार हो रहे हमलों की चपेट में है. सालार तेहरान में ही रहते हैं.
हाल ही में हुई एक एयरस्ट्राइक के बारे में बताते हुए सालार कहते हैें, “धमाके की आवाज़ों से खिड़कियां और परदे तक हिल गए. मैंने शीशा टूटने से बचाने के लिए खिड़कियाँ खुली छोड़ दीं. पूरा घर कांप उठा… हर दिन एक महीने जैसा लग रहा है. हमलों की रफ़्तार बहुत तेज़ है.”
तेहरान में ही रहने वाले बाबक कहते हैं कि हमले शुरू होने के साथ ही लोग खाने-पीने का सामान जुटाने बाज़ारों की ओर भागे.
बाबक ने भी महसूस किया है कि इस बार हमलों की तीव्रता 12 दिन के युद्ध के दौरान हुए हमलों से बहुत ज़्यादा है.
उनके मुताबिक़, “पिछली बार तो हम एयर डिफ़ेंस मिसाइलें दाग़े जाने की आवाज़ सुनकर समझ जाते थे कि हमला हो गया है, लेकिन अब अचानक धमाका सुनाई देता है और चारों ओर तबाही फैल जाती है.”
तेहरान से क़रीब 275 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में रहने वाले क़ावेह ने बताया, “हमले के पहले तीन दिनों में हमारे शहर पर भारी बमबारी हुई. हमारे इलाक़े के ऊपर से लगातार लड़ाकू विमान गुज़रते रहते हैं.”
क़ावेह के मुताबिक़ युद्ध के पहले दिन के बाद से ही हवाई हमलों की जगह से उठ रहे धुएं की वजह से आसमान में धुएं के बादल छाए रहते हैं.
क़ावेह कहते हैं, “पहले दिन के बाद से आसमान हमेशा धुएं से ढका रहता है, काले और सफ़ेद धुएँ के गुबारों से. यह दृश्य भयानक़ भी लगता है और ख़ूबसूरत भी.”
सुरक्षा को लेकर चिंतित लोग
सालार अपने दोस्तों और परिजनों, ख़ासकर अपने माता-पिता की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं.
सालार कहते हैं “मैंने उन्हें उत्तर की ओर भेज दिया है.” हालांकि उन्हें नहीं पता कि देश के उस हिस्से में ख़तरा कितना है.
वे कहते हैं, “पता नहीं वहां कितनी सुरक्षा है, लेकिन वहां कम से कम वो तेहरान वाले घर से तो ज़्यादा ही सुरक्षित हैं.”
उनके माता-पिता का घर ऐसे इलाके में है, जहां कई सैन्य ठिकाने हैं जो हवाई हमलों का निशाना बने हैं.
सालार बताते हैं, “मेरी मां बहुत बुरी तरह डरी हुईं थीं.”
वे बताते हैं कि उनकी मां ने 1980 के दशक के ईरान-इराक़ युद्ध के हमले देखे थे और ताज़ा हमले उनसे कहीं ज़्यादा भयानक हैं.
सालार के मुताबिक़, हर दिन और अधिक संख्या में लोग तेहरान छोड़ रहे हैं, हालाँकि सभी के लिए यह संभव नहीं है.
वो कहते हैं, “मेरे दोस्त की दादी बीमार हैं, इसलिए वो उन्हें कहीं नहीं ले जा सकते.”
कावेह बताते हैं कि वह और उनके दोस्त अपने दो घरों के बीच लगातार आ-जा रहे हैं.
कावेह कहते हैं, “उनके घर में खिड़कियां कम हैं, वहां घुटन सी होती है, ऐसा लगता है हम बाहरी दुनिया और जानकारी से पूरी तरह कट गए हों.”
वो कहते हैं, “ज़िंदा रहने के साथ-साथ हमारी सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार और दोस्तों से संपर्क बनाए रखना और विश्वसनीय ख़बरों तक पहुंचने की रही है.”
लेकिन यह उनके लिए बहुत मुश्किल है. युद्ध के पहले दिन ही दोपहर में अचानक उनका इंटरनेट कट गया था, दो दिन बाद इंटरनेट फिर से शुरू हो सका.
कावेह कहते हैं, “जब भी किसी तरह बड़ी मुश्किल से मैं इंटरनेट कनेक्ट कर पाता हूँ, तो मैं विदेश में रहने वाले उन दोस्तों की मदद करने की कोशिश करता हूं जिन्हें अपने परिवारों के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्हें अपडेट देता हूं और उनके संदेश पहुंचाता हूं.”
कावेह और सालार, दोनों ही, वीपीएन का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि सरकार की तरफ़ से ब्लॉक की गई कुछ वेबसाइटों तक पहुंच सकें. लेकिन यह भी आसान नहीं है.
सालार कहते हैं, “इंटरनेट बार-बार कट जाता है, मुश्किल से दोपहर को कभी-कभी वीपीएन चलता है,”
टेक्स्ट मैसेज पर मिल रहीं चेतावनियां
ईरान के भीतर स्वतंत्र जानकारियां तक पहुंचना मुश्किल है लेकिन ईरानी सुरक्षा बल अपनी मांगें लोगों तक स्पष्टता से पहुंचा रहे हैं.
सालार बताते हैं “हर दिन वे एसएमएस भेजते हैं, कहते हैं कि बाहर निकले तो सख़्ती से निपटा जाएगा.”
फ़ोन पर मिले एक टेक्स्ट मैसेज में लिखा था, ‘अगर तुममें से कोई बाहर निकलकर प्रदर्शन करेगा, तो हम तुम्हें इसरायली सहयोगी मानेंगे.’
सालार को पूरा विश्वास है कि इसका मतलब है कि जो आदेश मानेगा नहीं, उसे हिंसक दंड मिलेगा या शायद मार दिया जाएगा.
हवाई हमलों से अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. लोग आर्थिक दवाब में भी हैं.
सरकार के ख़िलाफ़ व्यापक विरोध प्रदर्शनों, इंटरनेट शटडाउन, कामगारों की हड़तालों की वजह से बहुत से साल की शुरुआत में काम ही नहीं कर पाए.
बाबक बताते हैं, “सर्दियों में बहुत से लोग कुछ भी कमा नहीं पाए, केवल सरकारी कर्मचारी ही वेतन पा रहे थे, इसकी वजह से बहुत से परिवार प्रभावित हुए हैं.”
सुप्रीम लीडर की मौत
युद्ध के दौरान रोज़मर्रा की मुश्किलों और ख़तरों के अलावा ईरान के लोग देश के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं. इस युद्ध का ईरान के भविष्य पर क्या असर होगा, लोग इस बारे में सोच रहे हैं.
ख़ासकर शनिवार को हवाई हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई की मौत के बाद ये चिंताएं और बढ़ गई हैं.
कावेह कहते हैं, “शुरू में हमें यकीन ही नहीं हुआ. मैं सोचता था कि मेरे लिए यह ख़ुशी का पल होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ.”
"यह सोचकर मुझे सचमुच ग़ुस्सा आया कि एक व्यक्ति के भ्रम और पागलपन की वजह से मेरी ज़िंदगी के लगभग सभी साल और मेरे जैसे लाखों लोगों की ज़िंदगियां बर्बाद हो गईं, हज़ारों लोगों की जान चली गई, और फिर भी वह ख़ुद एक ही पल में इस दुनिया से हटा दिया गया."
सालार बताते हैं, “जब रात क़रीब साढ़े दस-ग्यारह बजे मौत की ख़बर आई, तो शहर के अलग-अलग हिस्सों से लोगों की खुशियों की आवाज़ें और उलुलेशन (भावनात्मक चीखें) सुनाई दीं.”
सालार कहते हैं, “मैं ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं कर रहा था. हमले के बाद शहर का माहौल बेहद तनावपूर्ण था, सुरक्षाकर्मी तैनात थे, अब भी यह ऐसा ही है.”
फिलहाल युद्ध और भारी सुरक्षा की वजह से ख़ामेनेई की मौत पर ईरान के भीतर की सटीक प्रतिक्रिया जानना मुश्किल है.
ख़ामेनेई की मौत के बाद कुछ लोग सड़कों पर जश्न मनाने उतरे, जबकि कुछ ने सरकारी तौर पर आयोजित मातमी सभाओं में हिस्सा लिया.
भविष्य की अनिश्चितता
ईरान में किसी को नहीं पता कि इस युद्ध का उन पर, उनके परिवार पर और देश पर क्या असर होगा.
सालार कहते हैं, “शायद हममें से कोई भी पहले जैसा नहीं रह जाएगा. सभी लोग मानसिक रूप से थके हुए हैं और तनाव में हैं.”
ईरान के बाहर रह रहे और पूर्व शाही परिवार के समर्थक, जो अमेरिका और इसराइल की सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं पर टिप्पणी करते हुए सालार कहते हैं, “वे लोग जो बाहर हैं, ख़ासकर शाही परिवारवादी, नहीं जानते कि हम क्या झेल रहे हैं. मैं चाहूँगा कि वे कभी ऐसा अनुभव न करें.”
सालार ने कहा, “ट्रंप कह रहे हैं कि उन्होंने अभी सही मायने में हमले शुरू ही नहीं किए. मुझे नहीं पता अब और क्या बचा है जिसे वे तबाह कर सकते हैं.”
बाबक, हालांकि, आशावादी बने हुए हैं, हालांकि, ये युद्ध कितना लंबा चलेगा इसे लेकर उन्हें भी डर है.
बाबक कहते हैं, “मैं अक्सर बाहर निकलता हूँ, पड़ोसियों और दुकानदारों से बात करता हूँ. हर कोई उम्मीद कर रहा है कि यह जल्दी ख़त्म होगा. किसी को नहीं लगता कि यह बहुत लंबा चलेगा या और ख़तरनाक़ होगा.”
बाबक कहते हैं, “मुझे लगता है कि जंग उतनी जल्दी ख़त्म नहीं होगी जितनी हमने सोची थी, फिर भी मेरा हौसला नहीं टूटा है, बल्कि हर दिन और बढ़ता है.”
“मैं एक ऐसे वयस्क की तरह सोचता हूं, जो जानता है कि उसे दर्दनाक सर्जरी से गुजरना है, लेकिन फिर भी जीने की उम्मीद में आगे बढ़ रहा है.”
उन्होंने कहा, “अमेरिका और इसराइल के हवाई हमलों के संदर्भ में वो कहते हैं, मुझे नहीं पता कि इस ‘ऑपरेशन’ के बाद क्या होगा, लेकिन यक़ीन है कि अगर यह नहीं होता, तो कुछ और भी बुरा होता.”
“इस तरह, कम से कम अब भी ज़िंदगी और आने वाले कल की उम्मीद बची है.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.