कर्नाटक पुलिस की साइबर कमांड यूनिट ने एक ई-सिम बॉक्स नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है.
इस नेटवर्क का इस्तेमाल देशभर में डिजिटल अरेस्ट, सेक्सटॉर्शन और वित्तीय धोखाधड़ी समेत साइबर अपराधों के लिए किया जाता था.
यह ई-सिम बॉक्स नेटवर्क व्हाइटफील्ड इलाके के दो अपार्टमेंट से संचालित किया जा रहा था. यहां 10 सिम बॉक्स डिवाइस लगाए गए थे और हर डिवाइस में सिम कार्ड लगाने के 32 स्लॉट थे.
इस तरह दोनों ठिकानों पर कुल 320 सिम कनेक्शन की क्षमता थी. धोखाधड़ी करने वालों के पास ई-सिम बॉक्स मिलने का यह पहला मामला है.
कर्नाटक के साइबर कमांड के डीजीपी प्रणब मोहंती ने एक बयान में कहा, ''शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि इस नेटवर्क से जुड़े वित्तीय नुकसान की राशि सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है.''
''हालांकि, पीड़ितों की वास्तविक संख्या, वित्तीय नुकसान और नेटवर्क के विस्तार की पुष्टि की जानी बाकी है. इस संबंध में जांच जारी है और दूसरी एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है.''
साइबर कमांड को इस अवैध टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क के बारे में तब पता चला, जब भारती एयरटेल लिमिटेड के बेंगलुरु स्थित मुख्य सर्किल नोडल अधिकारी ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.
शिकायत में व्हाइटफील्ड और काडुगोडी इलाकों में सिम बॉक्स के भीतर एयरटेल के सिम कार्ड के अनधिकृत इस्तेमाल की आशंका जताई गई थी. यह शिकायत 26 अगस्त को दर्ज की गई थी.
डीजीपी के बयान में ई-सिम बॉक्स नेटवर्क चलाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या नहीं बताई गई है.
हालांकि, महाराष्ट्र के तिरोड़ा के रहने वाले चार लोगों की गिरफ़्तारी का ज़िक्र किया गया है.
इन पर नेटवर्क में इस्तेमाल के लिए सिम कार्ड बेचने और उन्हें ई-सिम प्रोफ़ाइल में बदलने का आरोप है.
इन चार लोगों की गिरफ़्तारी को साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जाने के संदेह वाले ई-सिम संसाधनों की खरीद, उन्हें सक्रिय कराने और नेटवर्क तक पहुंचाने की प्रक्रिया का पता लगाने की दिशा में अहम कदम बताया गया है.
मोहंती ने कहा, ''आगे की जांच में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और पहचान स्थापित करने, इस मामले में शामिल अन्य लोगों का पता लगाने और सिम/ई-सिम की सप्लाई चेन और डिजिटल अरेस्ट, सेक्सटॉर्शन और वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की संदिग्ध गतिविधियों के बीच संभावित संबंध का पता लगाने की कोशिश की जा रही है.''