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अमेरिका और ईरान: किसके पास कितनी ताक़त, लड़ाई लंबी खिंचने का किसे ज़्यादा नुक़सान होगा?
- Author, जोनाथन बील
- पदनाम, रक्षा संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि उनके देश के पास अहम हथियारों की "लगभग असीमित सप्लाई " है.
वहीं ईरान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसके पास "दुश्मन का लंबे समय तक मुकाबला करने की क्षमता" है.
लेकिन सिर्फ़ हथियारों का भंडार और उनकी सप्लाई ही युद्ध का नतीजा तय नहीं करता.
यूक्रेन लंबे समय से रूस की तुलना में कम हथियारों और कम सैनिकों के बावजूद उससे लड़ रहा है.
फिर भी हथियारों का भंडार और सप्लाई युद्ध में अहम भूमिका निभाती है.
इसराइल-अमेरिका और ईरान के बीच इस जंग की शुरुआत में ही हमलों की रफ़्तार बहुत तेज रही है.
दोनों पक्ष जितनी तेजी से हथियार इस्तेमाल कर रहे हैं, उतनी तेजी से उनका उत्पादन नहीं हो पा रहा है.
तेल अवीव स्थित इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज (आईएनएसएस) का अनुमान है कि अमेरिका और इसराइल अब तक 2,000 से अधिक हमले कर चुके हैं, जिनमें कई तरह के हथियार इस्तेमाल हुए हैं.
आईएनएसएस के मुताबिक़, ईरान अब तक 571 मिसाइलें और 1,391 ड्रोन दाग चुका है.
इनमें से कई को हवा में ही मार गिराया गया. लेकिन इस स्तर की लड़ाई को लंबे समय तक जारी रखना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल होता जाएगा.
ईरान की मिसाइल ताक़त
पश्चिमी देशों के अधिकारियों का कहना है कि ईरान की ओर से दागी जा रही मिसाइलों की संख्या में पहले ही कमी देखी गई है.
युद्ध के पहले दिन सैकड़ों मिसाइलें दागी गई थीं, जो अब घटकर दर्जनों रह गई हैं.
युद्ध से पहले अनुमान था कि ईरान के पास कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें 2000 से भी ज़्यादा हैं.
कोई भी देश अपने पास मौजूद हथियारों की सही संख्या सार्वजनिक नहीं करता ताकि दुश्मन को अंधेरे में रखा जा सके.
अमेरिका के शीर्ष सैन्य कमांडर जनरल डैन केन ने कहा कि शनिवार को शुरू हुई जंग के पहले दिन की तुलना में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों की लॉन्चिंग 86 फ़ीसदी घट गई है.
अमेरिकी सेंट्रल कमान (सेंटकॉम) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में ही इसमें 23 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.
युद्ध से पहले माना जाता था कि ईरान ने कई हजार शाहेद 'वन-वे अटैक' ड्रोन मिसाइल बना रखे हैं.
इस तकनीक को उसने रूस को भी दिया, जो यूक्रेन में इनका इस्तेमाल कर रहा है. अमेरिका ने भी इस डिजाइन की नकल की है.
लेकिन जनरल केन के मुताबिक़, संघर्ष के पहले दिन के बाद से ईरान के ड्रोन हमलों में 73 फ़ीसदी की गिरावट आई है.
ऐसा लगता है कि ईरान तेज रफ़्तार से हमले जारी रखने में कठिनाई महसूस कर रहा है.
हालांकि यह भी संभव है कि ईरान अपने भंडार को बचाने के लिए जानबूझकर हमले कम कर रहा हो. लेकिन उत्पादन बनाए रखना अब और मुश्किल होगा.
अमेरिका और इसराइल के लड़ाकू विमान अब ईरान के ऊपर हवाई बढ़त बना चुके हैं.
ईरान का ज़्यादातर एयर डिफ़ेंस सिस्टम अब नष्ट हो चुका है. वायु रक्षा प्रणाली नष्ट हो चुकी है.उसकी वायु सेना भी अब प्रभावी नहीं रह गई है.
सेंटकॉम के मुताबिक़,अब युद्ध का अगला चरण ईरान के मिसाइल और ड्रोन लॉन्चर, हथियार भंडार और उत्पादन फै़क्ट्रियों को निशाना बनाने पर केंद्रित है.
अब अमेरिका और इसराइल के लिए ईरान की लड़ने की क्षमता को कमजोर करना आसान हो सकता है.
लेकिन उसके सभी हथियार भंडार को नष्ट करना मुश्किल होगा.
ईरान का क्षेत्रफल फ़्रांस से लगभग तीन गुना बड़ा है. हथियारों को जमीन में छिपाया जा सकता है.
हाल के इतिहास को देखें तो पाएंगे कि सिर्फ़ हमलों से युद्ध पूरी तरह नहीं जीता जा सकता.
तीन साल से अधिक समय तक भारी बमबारी के बावजूद इसराइल ग़ज़ा में हमास को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाया.
इसी तरह यमन में हूती विद्रोही भी एक साल की अमेरिकी बमबारी के बाद बचे रहे.
अमेरिका के हथियार
अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताक़तवर सेना है. उसके पारंपरिक हथियारों का भंडार किसी भी दूसरे देश से अधिक है.
लेकिन अमेरिकी सेना मुख्य रूप से महंगे और सटीक निर्देशित हथियारों पर निर्भर करती है, जिनका उत्पादन सीमित मात्रा में होता है.
ख़बर है कि ट्रंप ने रक्षा कंपनियों की बैठक बुलाई है ताकि उत्पादन तेज किया जा सके.
इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका के संसाधनों पर भी दबाव हो सकता है.
अब अमेरिका को पास से हमले करने की कुछ आज़ादी मिल गई है, जिससे दबाव कुछ कम हुआ है,
जनरल केन ने कहा कि अमेरिका अब महंगे और लंबी दूरी के हथियारों जैसे टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों के बजाय कम महंगे हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है.
अमेरिकी वायुसेना अब जीडीएएम बमों का इस्तेमाल कर रही है, जिन्हें सीधे लक्ष्य के ऊपर से गिराया जा सकता है.
वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के पूर्व मरीन कर्नल मार्क कैंसियन का कहना है कि शुरुआती लंबी दूरी के हमलों के बाद अब अमेरिका कम ख़र्चीले मिसाइल और बम इस्तेमाल कर सकता है.
उनका मानना है कि अमेरिका इस स्तर की लड़ाई "लगभग अनिश्चितकाल तक" जारी रख सकता है.
जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचता है, टारगेट की सूची भी छोटी होती जाती है. लिहाजा हमलों की रफ़्तार धीरे-धीरे कम हो सकती है.
एयर डिफ़ेंस सिस्टम की अहम भूमिका
मार्क कैंसियन के मुताबिक़ अमेरिका के पास जेडीएएम बमों की संख्या दसियों हजार में है. लेकिन महंगे एयर डिफ़ेंस सिस्टम की संख्या सीमित है.
संघर्ष के शुरुआती चरण में ईरानी जवाबी हमलों को रोकने के लिए इनकी जरूरत पड़ी.
पैट्रियट मिसाइलों की मांग बहुत अधिक है. सिर्फ़ अमेरिका में नहीं, बल्कि उसके अरब सहयोगियों और यूक्रेन में भी.
हर इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत 40 लाख डॉलर से अधिक है और अमेरिका सालाना करीब 700 का उत्पादन करता है.
अगर ईरान बैलिस्टिक मिसाइलें दागता रहता है तो यह सीमित भंडार तेजी से घट सकता है.
सीएसआईएस के विशेषज्ञ कैंसियन का अनुमान है कि अमेरिका के पास क़रीब 1,600 पैट्रियट मिसाइलों का भंडार हो सकता है, जो हाल के दिनों में कम हुआ होगा.
उनका कहना है कि हवाई हमले लंबे समय तक जारी रखे जा सकते हैं, लेकिन वायु रक्षा की लड़ाई "कुछ अनिश्चित" है.
वह कहते हैं, "अगर राष्ट्रपति ट्रंप पैट्रियट मिसाइलों का भंडार घटाने को तैयार हों, तो हम ईरान के साथ युद्ध में ज़्यादा समय तक टिक सकते हैं. लेकिन इससे प्रशांत क्षेत्र में संभावित संघर्ष के लिए जोख़िम बढ़ जाएगा.''
इस हफ़्ते ट्रंप का अमेरिकी रक्षा कंपनियों से मिलने का कार्यक्रम इस बात का संकेत है कि हथियारों के भंडार को लेकर कुछ चिंता जरूर है.
लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का कहना है, "ईरान हमें पीछे नहीं छोड़ सकता."
इस मामले में शायद वो सही हों.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.