आप इस वेबसाइट का टेक्स्ट-ओनली वर्शन देख रहे हैं जो कम डेटा खर्च करता है. सभी तस्वीरों और वीडियो के साथ वेबसाइट का मुख्य वर्शन देखें.
केजरीवाल के चुनावी रणनीतिकार संदीप पाठक के बीजेपी में जाने पर क्यों हैरान हैं विश्लेषक
- Author, दीपक मंडल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
शुक्रवार को जब राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के कई राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने का एलान किया तो पार्टी नेतृत्व को ज़्यादा अचंभा नहीं हुआ. इसके कयास पिछले कुछ दिनों से लगाए ही जा रहे थे.
लेकिन पार्टी को बड़ा झटका दिया संदीप पाठक ने. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक़, बीजेपी में जाने की तो छोड़ ही दीजिए शायद ही किसी ने कल्पना की होगी संदीप पाठक आम आदमी पार्टी छोड़ देंगे.
कहा जाता है कि संदीप पाठक आम आदमी पार्टी के दूसरे नेताओं की तुलना में भले ही सार्वजनिक मंचों पर कम दिखते रहे हों लेकिन साल 2016 में पार्टी में शामिल होने के बाद से ही कोर लीडरशिप में उनका असर बढ़ता ही गया.
संदीप पाठक को आम आदमी पार्टी की चुनावी रणनीति का चाणक्य कहा जाता रहा है. आम आदमी पार्टी पर क़रीबी नज़र रखने वालों का दावा है कि पार्टी को 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव जिताने का श्रेय भी संदीप पाठक को जाता है.
संदीप पाठक की चुनावी रणनीति बनाने की काबिलियत की वजह से ही उन्हें 2022 में पार्टी की राजनीतिक मामलों की कमेटी का जनरल सेक्रेट्री बना दिया गया था.
बीजेपी का दामन क्यों थामा
पार्टी में इतनी मजबूत स्थिति के बावजूद उनका इसे छोड़कर चले जाना राजनीतिक पर्यवेक्षकों को हैरान कर गया.
हालांकि आम आदमी पार्टी के कामकाज पर नज़दीकी नज़र रखने वालों का कहना है देर-सवेर ऐसा होना ही था.
आम आदमी पार्टी को लंबे समय तक कवर करने वाले पत्रकार विक्रांत यादव का कहना है, "संदीप पाठक ने शुरू में आम आदमी पार्टी के लिए अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने आम आदमी पार्टी के लिए 2017 और 2022 के पंजाब चुनावों की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाई."
"कई राजनीतिक सर्वे कराए. 2022 का चुनाव जिताने में भी उनका रोल अहम रहा. लेकिन पिछले एक डेढ़-साल से पार्टी और संदीप के रिश्ते में दूरियां आ गई थीं."
आख़िर चुनावी रणनीति में इतनी अहम भूमिका में रहे संदीप पाठक और पार्टी की दूरियों की वजह क्या थी?
विक्रांत यादव कहते हैं, ''संदीप और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व के बीच दूरियों की असली वजह थी दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार. कहा गया कि चुनाव से पहले करवाए जाने वाले पार्टी के सर्वे ठीक नहीं हुए. इसके लिए संदीप को ज़िम्मेदार ठहराया गया और आख़िरकार पार्टी की करारी हार के लिए भी उन्हें कटघरे में खड़ा किया गया. तभी से संदीप और पार्टी का कनेक्ट कम होता गया.''
विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि इसके बाद भी संदीप पाठक पूरी तरह पार्टी से दूर नहीं हुए थे. पार्टी को उनकी विशेषज्ञता का एहसास था.
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि राघव चड्ढा और अशोक मित्तल के बीजेपी में जाने का अंदेशा तो पार्टी नेतृत्व को था. अशोक मित्तल जैसे नेताओं पर तो बीजेपी आईटी और ईडी रेड का डर दिखाकर दबाव बना रही थी.
लेकिन आम आदमी पार्टी को अंदाज़ा नहीं था कि संदीप भी बीजेपी की राह पकड़ेंगे.
राघव चड्ढा और अशोक मित्तल के बीजेपी में जाने की ख़बर मिलने के बावजूद पार्टी ने उन्हें मनाने की कोशिश नहीं की.
लेकिन आम आदमी पार्टी की ओर से संजय सिंह ने गुरुवार को संदीप पाठक से बात कर उन्हें मनाने की कोशिश की थी.
आम आदमी पार्टी के कामकाज को लंबे समय से देख रहीं पत्रकार रूपाश्री नंदा का कहना है कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने में संदीप पाठक की भूमिका बेहद अहम थी. इसके लिए उन्हें पार्टी के बाहर और भीतर दोनों जगह तारीफ़ मिली.
उनका कहना है कि राज्य में पार्टी के गठन से लेकर उम्मीदवारों के चयन, टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव पूर्व सर्वे की संदीप की भूमिका की वजह से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उन्हें राज्यसभा की सीट के लिए नॉमिनेट किया.
कहा जा रहा है कि केजरीवाल और संदीप पाठक के रिश्ते शुरू में काफ़ी अच्छे रहे. लेकिन 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव और इसके बाद पार्टी में किनारे किए जाने से संदीप पाठक आहत थे. अलगाव के बीज यहीं से पड़ने शुरू हो गए थे.
रूपाश्री नंदा कहती हैं, "विधानसभा चुनाव में अलग-अलग लोग और एजेंसी सर्वे कर रहे थे और रणनीति बना रहे थे. जेल से निकलने के बाद अरविंद केजरीवाल ने खुद ही कमान संभाल ली थी. संदीप पाठक को वो भूमिका नहीं मिली जो वो चाहते थे. इससे वो काफ़ी नाराज थे."
"उन्होंने पार्टी की इस नीति की आलोचना की. इसके बाद उन्हें पार्टी के अंदर कई अहम ज़िम्मेदारियों से हटा दिया गया. पार्टी में उन्हें साइडलाइन कर दिया गया."
वो कहती हैं, "भले ही संदीप पाठक को साइडलाइन कर दिया गया हो लेकिन मैं उनके बीजेपी में जाने को लेकर बेहद आश्चर्यचकित हूं. दूसरे लोगों को आईटी और ईडी रेड का डर था. पंजाब में अशोक मित्तल और संजीव अरोड़ा के ख़िलाफ़ छापेमारी हुई है. संदीप पाठक का वित्तीय मामलों से कोई लेना-देना नहीं था. इसलिए उन्हें ऐसा कोई डर भी नहीं था. फिर भी वो बीजेपी में चले गए.''
रूपाश्री नंदा कहती हैं, "मुझे लगता है कि अरविंद केजरीवाल से मोहभंग होना और पार्टी में बराबरी का दर्जा न मिलना ही उन्हें पार्टी छोड़ने की ओ ले गया. इसके बावजूद मैं इसका विश्लेषण नहीं कर पा रही हूं कि आख़िर वो बीजेपी में क्यों चले गए?"
अब तक का सफ़र
संदीप पाठक ने आम आदमी पार्टी को 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव जिताने में जो अहम भूमिका निभाई इसके लिए उन्हें 'जीत का हीरो' भी कहा गया.
2017 के पंजाब चुनाव में ज़्यादातर एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी की जीत की भविष्यवाणी की गई थी लेकिन पार्टी राज्य में अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रही और 20 सीटें ही जीत पाई.
लेकिन 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए संदीप पाठक ने चुनाव से दो साल पहले ही राज्य में अपना काम शुरू कर दिया था.
उन्होंने गांव के स्तर तक जाकर पार्टी के ढांचे का पुनर्गठन किया. पार्टी को इसका फ़ायदा मिला और उसने 117 सीटों में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई.
आम आदमी पार्टी की पंजाब में जीत से पहले संदीप ने पूर्व चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ मिलकर 2020 के विधानसभा चुनावों के लिए दिल्ली में पार्टी के अभियान की योजना बनाने में भी अहम भूमिका निभाई.
हालांकि पंजाब में जीत के बाद ही वो लाइमलाइट में आए. 2022 में एक इंटरव्यू में संदीप पाठक ने कहा था कि 'उनका दिमाग एक वैज्ञानिक की तरह काम करता है न कि एक राजनेता की तरह.'
पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत के बाद ही उन्हें आम आदमी पार्टी का नेशनल जनरल सेक्रेट्री बनाया गया. कहा गया कि यह पद विशेष रूप से उन्हीं के लिए सृजित किया गया था.
उन्हें पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, राजनीतिक मामलों की समिति का स्थायी आमंत्रित सदस्य भी बनाया गया.
अप्रैल 2022 में राज्यसभा सांसद बनने के बाद बिलासपुर (छत्तीसगढ़) की अपनी पहली यात्रा के दौरान, पाठक ने वहां एक जनसभा को संबोधित किया. उन्होंने खुद को 'छत्तीसगढ़ का बेटा' बताया.
उन्होंने कहा, ''मैं नौ से दस साल तक अमेरिका और इंग्लैंड में रहा. मैं उन देशों में बड़ी-बड़ी नौकरियां छोड़कर भारत वापस आया."
संदीप पाठक ने कहा, "मैं दिल्ली आईआईटी में प्रोफ़ेसर था. सरकारी नौकरी थी और ज़िंदगी सुख-सुविधाओं से भरी थी. लेकिन मैंने वह नौकरी छोड़कर राजनीति में एंट्री ली. मैंने देखा कि हमसे बाद में आज़ादी पाने वाले देश हमसे आगे निकल गए हैं."
"लेकिन भारत भ्रष्टाचार की वजह से पिछड़ा हुआ है. यहां की पॉलिटिक्स में गड़बड़ियां हैं. यहां के स्कूल और अस्पताल ठीक नहीं है. यहां की राजनीति ख़राब है. देश के राजनेताओं ने राजनीति को बिगाड़ कर रख दिया है.''
आम आदमी पार्टी की वेबसाइट के अनुसार, संदीप पाठक का जन्म छत्तीसगढ़ के बाथा गांव में हुआ था.
वो अपनी स्कूली शिक्षा के लिए बिलासपुर चले गए और वहां से बीएससी की डिग्री हासिल की.
इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की. फिर उन्होंने ऑक्सफोर्ड से अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में आगे की पढ़ाई की.
वो 2016 में आम आदमी पार्टी के सदस्य बने.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित