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पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की की ईरानी नेताओं के साथ मुलाक़ात क्यों रही ख़ास
- Author, असद सोहैब
- पदनाम, बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद से
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
ईरान, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के शीर्ष अधिकारियों की मुलाक़ात के बाद तेहरान की सरकारी समाचार एजेंसी प्रेस टीवी और आईआरएनए ने संयुक्त बयान जारी किया है.
इसमें बताया गया है,'चारों देश आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमत हुए हैं. इसमें क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखना भी शामिल है.'
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसियों ने इस संयुक्त बैठक को चार देशों की 'पहली बैठक' बताया है.
बैठक के बाद सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, 'पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे. संयुक्त बैठक मक्का रक्षा समझौते में शामिल सदस्यों के क्षेत्र के मौजूदा तनाव को कम करने के प्रयासों का हिस्सा है.'
सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा, "इन प्रयासों का मक़सद बातचीत और कूटनीति समाधान को बढ़ावा देना है. साथ ही क़तर और पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे मध्यस्थता के प्रयासों का समर्थन करना है."
बैठक खत्म होने के बाद कुछ ऐसा ही बयान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने भी जारी किया, उन्होंने कहा, "इस बैठक में महत्वपूर्ण और प्रभावशाली इस्लामिक देशों के नेताओं की मौजूदगी क्षेत्र में एकता और आपसी सद्भाव को और मजबूत करने में मददगार होगी."
ईरानी राष्ट्रपति ने इस्लामिक देशों से आग्रह किया कि, 'वो एक साथ आएं और एक साझा रुख़ अपनाएं.'
मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा, "मुसलमान आपस में भाई हैं और मुस्लिम देशों को निशाना बनाने वाले ख़तरों और कदमों के ख़िलाफ़ उन्हें एकजुट होकर एक कतार में खड़ा होना चाहिए.'
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मुस्लिम दुनिया के सामने मौज़ूद चुनौतियों का सामना करने के लिए एकता और एकजुटता बहुत ज़रूरी है.
तेहरान में हुई बैठक की इतनी चर्चा क्यों?
सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने सूत्रों के हवाले से तेहरान में होने वाली इस बैठक की जानकारी साझा की थी, लेकिन बाद में ईरानी अधिकारियों ने खुद ही इसकी पुष्टि कर दी.
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने बताया, "इस साझा बैठक का प्रस्ताव पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपनी हालिया ईरान यात्रा के दौरान दिया था."
आसिम मुनीर पिछले सप्ताह एक दिन के लिए तेहरान पहुंचे थे. इस दौरे में फ़ील्ड मार्शल ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेज़ाई और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ से मुलाक़ात की थी.
सोमवार को तेहरान में हुई इस बैठक में सऊदी अरब और ईरान शामिल थे. सबसे ख़ास ये रहा कि सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस ख़ालिद बिन सलमान प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे थे. ये वो समय है जब हूती हमलों की वजह से ईरान और सऊदी के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है.
पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल में फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ गृह मंत्री मोहसिन नक़वी भी शामिल थे, जबकि तुर्की के ख़ुफ़िया प्रमुख इब्राहिम कालिन अपने देश के प्रतिनिधिमंडल के साथ वहां पहुंचे थे.
ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेज़ाई और विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने इस संयुक्त बैठक में हिस्सा लिया.
ये मीटिंग ऐसे समय में हुई है जब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों और तेल रिफ़ाइनरी को भी निशाना बनाया है. सऊदी ने इन हमलों के लिए ईरान को ज़िम्मेदार भी ठहराया था, लेकिन ईरान ने इन आरोपों से इनकार कर दिया था.
इस बैठक से एक और बात निकल कर आई है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने तेहरान में कतर के प्रतिनिधिमंडल के मौजूद होने की पुष्टि की थी, लेकिन इस बैठक में क़तर शामिल नहीं हुआ.
पाकिस्तानी और तुर्की अधिकारियों ने पहले ही कई बार ईरान का दौरा किया था, लेकिन कुछ विशेषज्ञ सऊदी के रक्षा मंत्री की तेहरान यात्रा को 'असाधारण' मान रहे हैं.
हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बारे में थी ये बैठक?
बैठक में शामिल देशों ने अभी तक कोई भी विस्तृत बयान नहीं जारी किया है. जिससे पता चले कि मीटिंग में किन मुद्दों पर चर्चा हुई है.
ओमान में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत रह चुके इमरान अली ने बीबीसी उर्दू से कहा, "तेहरान में हुई ये बैठक काफी असामान्य है, लेकिन ये ज़्यादा महत्वपूर्ण है कि अमेरिका और इसराइल इस मीटिंग को कैसे देखते हैं."
इमरान अली ने कहा कि हूती विद्रोहियों के हमलों के लिए ईरान पर आरोप लगाने के बावजूद प्रिंस मोहम्मद बिन ख़ालिद का तेहरान जाना एक बड़ी घटना है. पाकिस्तान ने भी यही ज़ोर दिया होगा कि दोनों देश एक टेबल में बैठकर अपने मुद्दों के सुलझाएं.
पाकिस्तान के पूर्व राजदूत ने कहा, "इस बैठक का एजेंडा सिर्फ़ हूती विद्रोहियों और सऊदी के बीच चल रही लड़ाई नहीं रहा होगा, लेकिन ये मुद्दा चर्चा का मुख्य केंद्र ज़रूर रहा होगा. लेकिन पाकिस्तान चाहता है कि हूती विद्रोहियों के मुद्दे पर ईरान और सऊदी अरब के बीच कोई समझौता हो जाए, ताकि सऊदी अरब पर होने वाले हमले रुक जाएं और पाकिस्तान को इस संघर्ष में शामिल न होना पड़े."
ईरान की कम होगी मक्का समझौते से जुड़ी टेंशन?
वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक 'विल्सन सेंटर' में दक्षिण एशिया मामलों के जानकार माइकल कुगेलमैन का कहना है, "ये बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ईरान की ये टेंशन कम होगी की मक्का रक्षा समझौता उसके ख़िलाफ़ है."
बीबीसी न्यूज़ से बात करते हुए माइकल कुगेलमैन ने कहा, 'मीटिंग में ईरान को मक्का समझौते में शामिल देशों ने ये भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि ये समझौता किसी खास देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है. क्योंकि इस समझौते की शुरुआत से ही ईरान में ये धारणा थी कि इसे उनके ख़िलाफ़ दबाव बनाने के लिए तैयार किया गया है."
माइकल कुगेलमैन को लगता है कि तेहरान में हुई बैठक ये दिखाती है कि मक्का समझौते में शामिल सदस्य क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक तंत्र विकसित करना चाहते हैं.
मक्का समझौते में शामिल होगा ईरान?
इस बैठक से पहले ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने सोशल मीडिया साइट 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा की. इसमें मुस्लिम देशों के बीच एकता पर ज़ोर दिया गया.
पोस्ट में लिखा गया था, "हमारे क्षेत्र की सुरक्षा बाहर से आयात नहीं की जानी चाहिए, बल्कि यहाँ के लोग मिलकर ही इसे सुनिश्चित कर सकते हैं."
माइकल कुगेलमैन का कहना है कि सऊदी अरब और ईरान के बीच मौजूदा हालात को देखते हुए, इसकी संभावना बहुत कम है कि ईरान मक्का समझौते में शामिल होगा.
"मौजूदा हालात को देखते हुए मक्का समझौते के सदस्य ख़ासकर सऊदी अरब इस बात पर सहमत है कि ईरान के साथ बातचीत जारी रहनी चाहिए."
इमरान अली कहते हैं, "अगर ईरान को इसमें शामिल कर लिया जाए तो बहुत अच्छा होगा, लेकिन समस्या ये है कि राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि ईरान परमाणु सामग्री हटा लें."
अमेरिका में रहे पाकिस्तान के पूर्व राजदूत जलील अब्बास जिलानी ने इस बैठक के बारे में लिखा, "तेहरान में ईरानी नेताओं के साथ 'मक्का समझौते' से जुड़े नेताओं की ये मुलाकात एक स्वागत योग्य कदम है. क्षेत्र में स्थायी शांति, एकता और स्थिरता के लिए बातचीत, आपसी समझ और भरोसा बहुत ज़रूरी है."
'मुस्लिम देशों के लिए आकर्षण का केंद्र बना मक्का समझौता'
पाकिस्तान के पूर्व सांसद मुशाहिद हुसैन सैयद ने कहा, "पाकिस्तान द्वारा उठाया गया ये एक ऐतिहासिक कदम है, जो मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के बीच एक पुल का काम कर रहा है."
बीबीसी उर्दू से बात करते हुए उन्होंने कहा, "तेहरान में हुई बातचीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये मुसलमानों को बांटने के कथित इसराइली इरादों को नाकाम करती है."
"ये समझौता अब मुस्लिम दुनिया की सुरक्षा के लिए एक आकर्षण केंद्र के रूप में सक्रिय हो गया है."
राजनयिक इमरान अली ने कहा, "अगर पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ईरान को कुछ गारंटी दें, तो ईरान 'मक्का समझौते' में शामिल हो सकता है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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