'यौन उत्पीड़न और धर्म बदलने का दबाव', पश्चिम बंगाल में ईसाइयों में कैसा ख़ौफ़

    • Author, पीकॉक मॉन
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ बांग्ला, कोलकाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 10 मिनट

पश्चिम बंगाल राज्य में ईसाई समुदाय के लोगों पर हमलों की कई घटनाओं के आरोप लगे हैं.

पूर्वी मिदनापुर के पांशकुड़ा में एक ईसाई परिवार ने आरोप लगाया है कि विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के सदस्य बताने वाले कुछ लोगों ने उनके घर में घुसकर मारपीट की और सरकारी सुविधाएं बंद कराने की धमकी दी.

हमले में घायल पार्वती हेम्ब्रम सोरेन ने बीबीसी न्यूज़ बांग्ला को बताया कि सोमवार रात उनका परिवार एक साथ प्रार्थना करने की तैयारी कर रहा था. इसी दौरान नशे में धुत 30 से ज़्यादा लोग जबरन उनके घर में घुस आए और उन पर हमला कर दिया.

पार्वती सोरेन ने कहा, "उन्होंने मेरे बाल पकड़कर मुझे पीटा. वे कह रहे थे कि हमें इस घर में नहीं रहने देंगे. वे मेरे पति को बहुत ही भद्दी गालियां दे रहे थे. हमारे रिश्तेदार भी हमारे साथ थे, उन्होंने मेरी बहनों पर भी हाथ उठाया. उन्होंने हमारे फोन छीनने की कोशिश की."

'मेरे बाल पकड़कर पीटा, पति को गालियां दी'

कुछ दिन पहले दुर्गा पूजा के दौरान पश्चिम मिदनापुर के चंद्रकोना में भी बजरंग दल के सदस्य बताए जाने वाले लोगों के एक समूह पर आरोप लगे कि उसने कई ईसाई परिवारों पर हमला किया.

इस साल मई में पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ईसाई समुदाय के लोगों पर हमलों की कई ख़बरें सामने आई हैं.

रिसर्च संस्था 'इंडिया हेट लैब' के विश्लेषण के मुताबिक, 13 मई से 20 सितंबर के बीच राज्य के 13 ज़िलों में ईसाइयों पर हमले की कुल 60 घटनाएं दर्ज की गईं.

हमले के दौरान क्या हुआ?

पांशकुड़ा की रहने वाली पार्वती सोरेन का आरोप है कि इन उपद्रवियों ने पहले भी उनके परिवार को धमकाया था.

उनके मुताबिक, 11 अक्तूबर को भी यही लोग उनके घर आए थे और ईसाई धर्म का पालन करने की वजह से उन्हें धमकी दी थी.

उन्होंने बताया, "रात सात से नौ बजे के बीच वे शराब पीकर चोरों की तरह हमारे घर आए. उस समय अंधेरा इतना था कि किसी बाहरी व्यक्ति के लिए वीडियो रिकॉर्ड करना नामुमकिन था. मैंने अपने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड किया, लेकिन उन्होंने मेरा फ़ोन छीनकर वीडियो डिलीट कर दिया. आख़िरकार, मुझे पुलिस के जरिए अपना फोन वापस मिला."

उन्होंने कहा, "वे हम पर ईसाई धर्म छोड़कर हिंदू धर्म में वापस आने का दबाव डाल रहे हैं. हमने उनसे कहा कि हमने अपनी मर्ज़ी से ईसाई धर्म अपनाया है और उसी का पालन कर रहे हैं. इसी वजह से हमें पीटा जा रहा है."

धर्म न बदलने पर सुविधाएं रोकने की धमकी के आरोप

बंगाल क्रिश्चियन सर्विस के संस्थापक हेरोड मल्लिक ने दावा किया कि संगठन के एक वकील ने मामले की जानकारी लेने के लिए शिकायतकर्ता को फ़ोन किया था. उसी दौरान हमलावरों ने उनका फोन छीन लिया.

आरोप है कि हमलावरों ने ख़ुद को विश्व हिंदू परिषद का सदस्य बताते हुए वकील को भी फ़ोन पर धमकाया. जब उन्हें पता चला कि वे वकील से बात कर रहे हैं, तो उन्होंने फोन काट दिया.

आरोप है कि हमलावरों ने ईसाई धर्म को 'अमेरिकी धर्म' बताया और परिवार से हिंदू धर्म अपनाने के लिए कहा.

पार्वती सोरेन ने बीबीसी न्यूज़ बांग्ला को बताया, "वे हमारे आंगन में तुलसी मंच और मनसा मंदिर बनाने का दबाव डाल रहे थे. हमने उनसे कहा कि हम ईसाई हैं और ऐसा नहीं करेंगे."

"अब वे लोगों को हमें काम देने से भी रोक रहे हैं. उन्होंने हमारी बिजली और पानी की सप्लाई बंद कराने, राशन और 'आयुष्मान भारत योजना' का लाभ रोकने की धमकी दी है. वे सबको धमका रहे हैं ताकि कोई हमारी मदद न करे."

घटना के समय शिकायतकर्ता, उनके पति और दो छोटे बच्चे घर पर थे. उनके तीन रिश्तेदार भी वहां मौजूद थे.

'पुलिस ने अब तक मामला दर्ज नहीं किया'

पार्वती ने कहा, "हमारे प्रार्थना स्थल को जला दिया गया और तोड़फोड़ की गई. हमें घसीटकर बाहर निकाला गया और पीटा गया. उन्होंने मुझ पर हमला किया, मेरी ननद को थप्पड़ मारा और मेरे पति को बहुत गालियां दीं."

उन्होंने बताया, "हमलावरों ने दोबारा आने और फिर हमला करने की धमकी भी दी है, और कहा कि इस बार 50 से 100 लोगों को लेकर आएंगे. हमने शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन पुलिस ने अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया है."

सुरक्षा के मद्देनज़र पार्वती सोरेन और उनका परिवार एक रिश्तेदार के घर में रह रहा है.

उन्होंने कहा, "मेरे पति टोटो (ई-रिक्शा) चलाते हैं. टोटो ख़रीदने के लिए हमने दो लाख रुपये का लोन लिया था. मुझे समझ नहीं आ रहा कि इस हालात में हम ख़ुद को सुरक्षित कैसे रखें और लोन कैसे चुकाएं."

धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने के आरोप

इस घटना से कुछ दिन पहले पश्चिम मिदनापुर के चंद्रकोना में भी कई परिवारों ने बजरंग दल के सदस्यों पर हमले के आरोप लगाए थे. ये घटनाएं 18 से 20 अक्तूबर के बीच हुई थीं.

उन्होंने आरोप लगाया कि एक महिला के साथ यौन उत्पीड़न किया गया, उसके कपड़े फाड़ दिए गए और उसे जबरन एक पूजा मंडप में ले जाया गया, जिसका मकसद उसका धर्म परिवर्तन कराना था.

चंद्रकोना की घटना की शिकायत करने वाली महिला से जब बीबीसी न्यूज़ बांग्ला ने फ़ोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि हमले में घायल होने के बाद से उनकी तबीयत काफ़ी ख़राब है और उनका इलाज चल रहा है.

पुलिस में दर्ज शिकायत में उन्होंने लिखा है, "18 अक्तूबर 2026 को दोपहर बाद क़रीब साढ़े तीन बजे बजरंग दल से जुड़े कुछ लोग मेरे घर आए. उस समय मैं परिवार के सदस्यों के साथ घर पर थी. उन्होंने हम पर प्रभु ईसा मसीह के प्रति अपनी आस्था छोड़ने का दबाव बनाया और हमें धमकाया. हमारे साथ मारपीट भी की."

महिला को अभी भी हमले का डर

महिला का आरोप है कि उस दिन उपद्रवियों ने उनके सिर और कान के नीचे मारा, जिसके बाद वह बेहोश हो गईं. उनका आरोप है कि बेहोशी की हालत में उनके कपड़े फाड़ दिए गए.

उन्होंने शिकायत में कहा, "इसके बाद कथित शुद्धिकरण की रस्म के नाम पर मुझे सार्वजनिक रूप से नहाने के लिए मजबूर किया गया. मेरी मर्ज़ी के बिना मेरे कपड़े उतारे गए और मुझे जबरन इस रस्म में शामिल कराया गया."

शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया कि 20 अक्तूबर को उन्हें और उनके पति समेत कुल चार ईसाई लोगों को उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ गांव के पूजा पंडाल ले जाया गया. वहां उनसे जबरन कुछ धार्मिक रस्में कराई गईं.

शिकायत में उन्होंने लिखा, "वे लोग अब भी मुझे धमकी दे रहे हैं कि अगर मैंने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई, तो वे मुझे ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे. मैं बहुत डरी हुई हूं और मानसिक रूप से परेशान हूं. मुझे डर है कि कभी भी मेरे या मेरे परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई गंभीर घटना हो सकती है."

पुलिस ने कहा- 'सबूतों की कमी है'

दोनों घटनाओं में पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगे हैं.

बीबीसी बांग्ला ने जब पांशकुड़ा थाने के एक पुलिस अधिकारी से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि उन्हें लिखित शिकायत मिली है, लेकिन अब तक एफ़आईआर (प्राथमिकी) दर्ज नहीं की गई है.

उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं है कि शिकायत मिलते ही एफ़आईआर दर्ज कर दी जाती है. मेरा जांच अधिकारी फिलहाल मामले की जांच कर रहा है. इस समय हम इससे ज़्यादा जानकारी नहीं दे सकते."

वहीं, पश्चिम मिदनापुर के चंद्रकोना की घटना में 20 अक्तूबर को एफ़आईआर दर्ज की गई थी.

इस मामले में हत्या की कोशिश, महिला के कपड़े उतारने के इरादे से हमला, घर में घुसना, जानबूझकर चोट पहुंचाना, आपराधिक धमकी और महिला के साथ छेड़छाड़ समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया.

हालांकि, इस मामले की जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि जांच चल रही है, लेकिन पर्याप्त सबूत न होने की वजह से अभी तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है.

उन्होंने कहा, "हमें अब तक बयानों, मेडिकल रिपोर्ट या जमा किए गए दूसरे दस्तावेज़ों में ऐसे पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं, जिनके आधार पर किसी को गिरफ़्तार किया जा सके."

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, एफ़आईआर में नामज़द सभी 13 अभियुक्त स्थानीय निवासी हैं.

'मैं सभी ईसाइयों को हिंदू बनाऊंगा'

पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में विश्व हिंदू परिषद के नेता चंद्रनाथ दास ने बीबीसी न्यूज़ बांग्ला से कहा कि ईसाई समुदाय के लोगों पर हमले करने के बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप ग़लत हैं.

उनका दावा है कि संगठन न तो किसी पर हमला करता है और न ही क़ानून अपने हाथ में लेता है.

हालांकि, उन्होंने कहा कि उनका संगठन पश्चिम बंगाल के गांवों में धार्मिक शिक्षा के ज़रिए ईसाइयों और मुसलमानों को हिंदू धर्म अपनाने के लिए अभियान चला रहा है.

बजरंग दल भी विश्व हिंदू परिषद से जुड़ा एक युवा संगठन है.

चंद्रनाथ दास ने कहा, "हमारा काम सिर्फ़ चंद्रकोना या मिदनापुर में नहीं, बल्कि पूरे भारत और पश्चिम बंगाल में चल रहा है. हमारा लक्ष्य ज़्यादा से ज़्यादा ईसाइयों को हिंदू बनाना है. और वे हिंदू बन जाएंगे. यही हमारा लक्ष्य है. कोई भी ईसाई नहीं बनेगा."

उन्होंने आगे कहा कि 1964 में विश्व हिंदू परिषद की स्थापना के बाद से ही संगठन का मक़सद धर्म परिवर्तन को रोकना और अपने धर्म को छोड़कर दूसरे धर्म में जाने वालों को वापस अपने धर्म में लाना रहा है.

उनका दावा है कि पश्चिम बंगाल में हर साल अलग-अलग धर्मों के हज़ारों लोगों को ''हिंदू बनाया जाता है.'' उन्होंने कहा कि यह काम खुलेआम, दिन के उजाले में और पुलिस को जानकारी देकर किया जाता है.

बीजेपी नेता बोले- अत्याचार के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस नीति

बंगाल क्रिश्चियन सर्विस के संस्थापक हेरोड मल्लिक ने बीबीसी न्यूज़ बांग्ला से कहा, "ऐसे हमले लगातार हो रहे हैं. हमले करने वाले लोग और बेख़ौफ़ होते जा रहे हैं. शायद ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. मुझे समझ नहीं आता कि उन्हें इतनी हिम्मत कहां से मिल रही है और वे इतने बेख़ौफ़ क्यों हैं."

उन्होंने शिकायत की कि सरकार उनकी अपीलों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही है और न ही इन घटनाओं की ठीक से जांच हो रही है. उन्होंने कहा, "इन घटनाओं को अंजाम देने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है."

इन आरोपों पर पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता देबजीत सरकार ने बीबीसी न्यूज़ बांग्ला से कहा कि बीजेपी विधायकों के नेतृत्व वाली नई सरकार ने किसी भी तरह के अन्याय और अत्याचार के ख़िलाफ़ 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है.

उन्होंने कहा, "जिन लोगों को लगता है कि उनके साथ ज़्यादती हुई है, उन्हें क़ानूनी व्यवस्था के पास आना चाहिए और शिकायत दर्ज करानी चाहिए. क़ानून अपना काम करेगा. हम किसी को भी सांप्रदायिक छूट नहीं देंगे और न ही किसी से सांप्रदायिक फ़ायदा लेना चाहते हैं."

उन्होंने कहा कि यह तय करना हमारा काम नहीं है कि कौन कैसा व्यवहार करेगा, कौन किस धर्म का पालन करेगा, या कौन किस समुदाय से जुड़ा होगा या नहीं. हमारे राज्य में धर्म परिवर्तन को मान्यता नहीं है

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने भी पश्चिम मेदिनीपुर में एक ईसाई परिवार पर कथित हमले को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है.

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चंद्रकोना में एक महिला को कथित तौर पर "निर्वस्त्र करने और 'शुद्धिकरण' की रस्म कराने" के लिए मजबूर करने के आरोपों में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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