'बच्चों को भूखा रखो ताकि वो यीशू से मिल सकें', 191 लोगों की हत्या के दोषी पादरी ने ऐसा क्यों कहा था

लाल, काले और सफेद रंग की धारीदार शर्ट पहने पॉल मैकेंजी अदालत में बैठे कैमरे की ओर देख रहे हैं.
इमेज कैप्शन, पॉल मैकेंज़ी नाम का ये पादरी शिक्षा और आधुनिक चिकित्सा का घोर विरोधी है
    • Author, बसमा एल अत्ती
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

कीनिया में एक पंथ के प्रमुख पॉल मैकेंजी को 191 लोगों की हत्या का दोषी ठहराया गया है. उनके सबसे बड़े बेटे का कहना है कि उनके छोटे भाई-बहनों को दो सप्ताह पहले तक भी जबरन उपवास के लिए मजबूर किया जा रहा था.

27 वर्षीय डैन मैकेंजी ने बताया कि उन्होंने पुलिस को इसकी जानकारी दी. पुलिस ने उनकी दादी के घर से उनके पांच छोटे भाई-बहनों समेत आठ बच्चों को बचाया और उन्हें एक बचाव केंद्र में ले गई.

उन्होंने बीबीसी के न्यूजडे कार्यक्रम को बताया, "उन्हें जबरन उपवास कराया गया था. उन्हें करीब तीन दिनों तक खाना नहीं दिया गया था."

सोमवार को उनके पिता को 191 लोगों की हत्या का दोषी पाया गया.

इन लोगों की मौत कीनियाई तट के पास शाकाहोला जंगल में भूख की वजह से हुई. इनमें 190 बच्चे और एक वयस्क था.

पॉल मैकेंजी ने अपने पंथ के सदस्यों को खुद को और अपने बच्चों को भूखा रखकर मरने का आदेश दिया था, ताकि वे "यीशु से मिल सकें".

पंथ के 28 अन्य नेताओं को भी हत्या का दोषी ठहराया गया.

पिता के जुर्म का एहसास बेटे को बाद में हुआ

पादरी पॉल मैकेंज़ी अक्सर बड़ी संख्या में जुटे लोगों के सामने जोशीले उपदेश देता था
इमेज कैप्शन, पादरी पॉल मैकेंज़ी अक्सर बड़ी संख्या में जुटे लोगों के सामने जोशीले उपदेश देता था (फ़ाइल फ़ोटो)

डैन मैकेंजी ने शुरुआत में अपने पिता का बचाव किया था. उन्होंने कहा कि पहले वो अपने पिता के ख़िलाफ़ लगे आरोपों को समझ नहीं पाए. लेकिन अदालत की कार्यवाही के दौरान उन्हें पता चला कि ये कितना भयावह था.

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डैन कहते हैं, "जब मैं 12 साल का था, तो मुझे करीब एक हफ़्ते तक उपवास करने के लिए मजबूर किया गया था." उन्हें यह भी याद है कि बचपन में चर्च के सदस्य उन्हें प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए घंटों तक पीटते थे.

अब वह अपने भाई-बहनों को उस पंथ से निकालने की कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए उन्हें परिवार के उन सदस्यों के ख़िलाफ़ शिकायत करनी पड़ी, जो अब भी उस पंथ की शिक्षाओं में विश्वास करते हैं. वह कहते हैं, "मुझे अपनी दादी की शिकायत करनी पड़ी."

पंथ के नेता की शिक्षाओं के मुताबिक़, शिक्षा लेना मना था और आधुनिक चिकित्सा को "बुरा" माना जाता था.

डैन कहते हैं, "मैंने सात साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया था."

अब तटीय शहर मालिंदी में रहने वाले डैन मोटरसाइकिल टैक्सी चलाकर अपना और अपने छोटे भाई-बहनों का ख़र्च चलाते हैं.

उन्होंने बताया कि शहर के कुछ लोग अपने पिता के अपराधों की वजह से उनसे नाराज़ थे. लेकिन कुछ दूसरे लोगों ने "उन्हें स्वीकार कर लिया था क्योंकि उन्होंने खुद को उस जीवन से दूर कर लिया था."

डैन ने बीबीसी के न्यूजडे कार्यक्रम को बताया, "मुझे उम्मीद है कि यह फ़ैसला उन लोगों को कुछ राहत देगा जिन्होंने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को खो दिया है."

उपवास करने के लिए करता था मजबूर

मोम्बासा के बंदरगाह शहर में आठ घंटे तक फैसला सुनाते हुए जज डायना मोचाचे ने कहा कि मैकेंजी के अनुयायी मानते थे कि वह "यीशु के दूत" थे.

मामले के एक सह-अभियुक्त ने अदालत को बताया कि मैकेंजी ने कहा था कि जो कोई भी उपवास करने से इनकार करता है, उसे "लात-घूंसों से मारकर" स्वर्ग जाने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए.

जज ने कहा कि जिस जंगल में यह पंथ मौजूद था, वहां लाशों को दफ़नाने की प्रक्रिया को "शादी" कहा जाता था. मरने वाले लोगों को "यीशु के साथ विवाह करने वाले" के तौर पर देखा जाता था.

मैकेंजी और पंथ के अन्य नेताओं पर आतंकवाद, कट्टरता और बच्चों को शिक्षा से वंचित करने से जुड़े अलग-अलग मामलों में भी मुकदमा चल रहा है.

हत्या के मामले में आया यह फैसला मैंकेजी नाम के इस पादरी के ख़िलाफ़ लगे सबसे गंभीर आरोपों पर पहला फ़ैसला है. उन्हें 2023 में कीनिया के तट के पास शाकाहोला जंगल में उथली कब्रों में 400 से ज़्यादा शव मिलने के बाद गिरफ़्तार किया गया था.

उन्हें 6 नवंबर को सज़ा सुनाई जाएगी.

थॉमस मुकवाना की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ

हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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