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लखनऊ के अस्पताल में डॉक्टर पर धर्मांतरण के आरोप का मामला, अपर्णा यादव की क्यों रही चर्चा
- Author, सैयद मोज़िज़ इमाम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) इन दिनों सुर्खियों में है. यहां की एक महिला डॉक्टर ने एक पुरुष डॉक्टर पर धर्मांतरण के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है.
शिकायत के बाद पुलिस ने डॉक्टर के साथ ही उनके माता-पिता को भी गिरफ़्तार कर लिया है.
केजीएमयू प्रशासन ने अभियुक्त डॉक्टर को निलंबित कर दिया है.
इस सबके बाद इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ़) को सौंप दी गई है, जो इस मामले के कथित व्यापक धर्मांतरण रैकेट से जुड़े होने की आशंका को देखते हुए जांच कर रही है.
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इधर पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधु और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अपर्णा यादव इस मामले को लेकर केजीएमयू प्रशासन से भिड़ गई हैं और दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं.
क्या है मामला?
केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग के डॉक्टर रमीज़ुद्दीन नायक के ख़िलाफ़ एक महिला डॉक्टर ने 23 दिसंबर को लखनऊ के चौक थाने में एफ़आईआर दर्ज कराई थी.
चौक थाने के इंस्पेक्टर नागेश उपाध्याय के मुताबिक़, रमीज़ुद्दीन के ख़िलाफ़ मुक़दमा संख्या 302 बीएनएस की धारा 69 (धोखा या झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाना), धारा 89 (महिला की सहमति के बिना गर्भपात कराना), धारा 351(1) (प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुंचाने की अपराधिक धमकी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है.
इसके साथ ही "उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5(1)" भी लगाई गई है.
पुलिस ने इस मामले में अभियुक्त के साथ ही उनके माता-पिता को गिरफ़्तार किया है.
डीसीपी विश्वजीत श्रीवास्तव ने कहा, "जांच में सामने आया है कि धर्म परिवर्तन के मामले में रमीज़ के माता-पिता की भूमिका भी थी, इसलिए उन्हें भी गिरफ़्तार किया गया है."
तहरीर के मुताबिक़, रमीज़ुद्दीन से उसकी दोस्ती जुलाई में हुई थी और इसके बाद दोनों रिलेशनशिप में आ गए थे. सितंबर में वह गर्भवती हो गई थी, जिसके बाद उसका जबरन गर्भपात कराया गया.
तहरीर में कहा गया है, "सितंबर में शिकायतकर्ता की मुलाक़ात एक अन्य महिला से हुई. उस महिला ने खुद को अभियुक्त डॉक्टर की पत्नी बताया."
तहरीर में शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि जो महिला उन्हें मिली थी, उसका दावा था कि धर्म परिवर्तन कराने के बाद फ़रवरी में रमीज़ से उसका निकाह हुआ था.
शिकायतकर्ता ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि जब उन्होंने रमीज़ पर शादी का दबाव बनाया, तो उसने धर्म परिवर्तन के बाद ही शादी करने की बात कही और निजी वीडियो वायरल करने की धमकी दी.
तहरीर के मुताबिक़, शिकायतकर्ता ने 17 दिसंबर को आत्महत्या का प्रयास किया था. इसके बाद 19 दिसंबर को केजीएमयू में शिकायत दर्ज कराई थी.
तहरीर के मुताबिक़, दोनों पुराने लखनऊ के अलग-अलग इलाक़ों में किराए के मकानों में रहते थे. दोनों का एक-दूसरे के यहां आना-जाना था. वे अधिक दूरी पर नहीं रहते थे.
हालांकि, इस मामले में अभियुक्त के जेल में होने के कारण उनका पक्ष सामने नहीं आ सका है.
जिस इलाके में रमीज़ुद्दीन रहते थे, वहां के लोगों का कहना है कि वह नए थे और किसी से ज़्यादा जान-पहचान नहीं थी. पड़ोसियों के अनुसार, उन्हें इस मामले की जानकारी तब हुई, जब मीडिया में मोहल्ले का नाम आया.
अभियुक्त के एक क़रीबी रिश्तेदार ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा, "उन्हें दोनों के आपसी संबंधों की जानकारी नहीं है. लेकिन धर्मांतरण के आरोप सही नहीं हैं."
(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)
केजीएमयू प्रशासन ने क्या उठाए क़दम?
धर्मांतरण का आरोप सामने आने के बाद केजीएमयू ने जूनियर रेज़िडेंट डॉक्टर रमीज़ुद्दीन नायक को 22 दिसंबर को ही निलंबित कर दिया था.
डीन एकेडमिक्स, वीरेन्द्र अतम, की तरफ़ से जारी प्रपत्र में कहा गया, "गंभीर आरोपों के मद्देनज़र तुरंत प्रभाव से निलंबन किया जाता है."
इसके बाद विश्वविद्यालय ने विशाखा कमेटी से जांच कराई है.
विशाखा कमेटी की अध्यक्ष डॉक्टर मोनिका ने कहा, "डॉक्टर ने पीड़िता से यह बात छिपाई कि वह शादीशुदा हैं. जांच में पाया गया कि आरोपी मानसिक और शारीरिक रूप से पीड़िता को परेशान कर रहा था और उसे बदनाम करने की धमकी दे रहा था."
कमेटी के अनुसार, जुलाई 2025 से दोनों अपनी सहमति से रिलेशनशिप में थे, निजी स्थानों पर साथ रहते थे.
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभियुक्त डॉक्टर के निष्कासन की सिफ़ारिश डीजीएमई (डायरेक्टर जनरल मेडिकल एजुकेशन) को भेज दी है.
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉक्टर केके सिंह ने कहा, "जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रही है. कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा."
एसटीएफ़ की जांच में क्या मिला?
एसटीएफ़ की जांच में सामने आया है कि केजीएमयू के रेज़िडेंट डॉक्टर रमीज़ुद्दीन नायक की पहले भी शादी हो चुकी है. इस पहलू की भी विस्तृत जांच की जा रही है.
एसटीएफ़ पीलीभीत के एक क़ाज़ी, ज़ाहिद, की तलाश कर रही है, जिनकी भूमिका कथित धर्मांतरण नेटवर्क में बताई जा रही है.
पुलिस के मुताबिक़, "जांच में यह बात भी सामने आई है कि रमीज़ की पहली पत्नी ने पहले रमीज़, उनके माता-पिता, क़ाज़ी और एक अन्य व्यक्ति पर उत्पीड़न और मारपीट के आरोप लगाए थे."
उनकी पहली पत्नी भी डॉक्टर हैं. उनका यह भी आरोप था कि धर्मांतरण का विरोध करने पर उनके साथ हिंसा की गई. हालांकि बाद में ये आरोप वापस ले लिए गए थे.
पुलिस का मानना है कि क़ाज़ी की गिरफ़्तारी से किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं.
यूपी एसटीएफ़ ने इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज़ लखनऊ पुलिस से ले लिए हैं.
डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने कहा, "कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है."
अपर्णा यादव और केजीएमयू में तनातनी
महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव 9 जनवरी को अपने समर्थकों के साथ केजीएमयू के कुलपति कार्यालय पहुंची थीं, जहां हंगामा हुआ.
इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात कर अपना पक्ष रखा.
उनका आरोप है कि केजीएमयू प्रशासन इस मामले को दबाने की कोशिश में है.
इस पर केजीएमयू की कुलपति डॉक्टर सोनिया नित्यानंद ने कहा, "मैंने उन्हें (अपर्णा यादव) अकेले आकर बातचीत करने के लिए बुलाया था, लेकिन वह तैयार नहीं थीं."
केजीएमयू प्रशासन ने अपर्णा यादव के साथ आए लोगों पर तोड़फोड़ का आरोप लगाते हुए चौक थाने में शिकायत दर्ज कराई थी.
इस हंगामे के विरोध में केजीएमयू स्टाफ़ ने ओपीडी के बहिष्कार की चेतावनी दी थी, जिसे प्रशासन से आश्वासन मिलने के बाद फिलहाल टाल दिया गया है.
अपर्णा यादव ने केजीएमयू प्रशासन के आरोपों को खारिज किया है. एक बयान में उन्होंने कहा, "केजीएमयू प्रशासन अपनी नाकामियां छिपाने के लिए उन पर आरोप लगा रहा है."
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद कुलपति डॉक्टर सोनिया नित्यानंद ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की.
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बीते गुरुवार को केजीएमयू का दौरा किया और कहा, "इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच की जाएगी."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.