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महाराष्ट्र: बीजेपी विधायक के थाने में गोली चलाने को लेकर चढ़ा सियासी पारा, घायलों में एक गंभीर
महाराष्ट्र में बीजेपी विधायक गणपत गायकवाड़ के एक पुलिस थाने में जाकर कथित तौर पर फायरिंग करने को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है.
शुक्रवार रात (दो फरवरी) हुई फायरिंग में एकनाथ शिंदे गुट के नेता महेश गायकवाड़ और उनके सहयोगी राहुल पाटिल घायल हो गए. पुलिस के मुताबिक गणपत गायकवाड़ ने चार गोलियां चलाईं और उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है. इस मामले में दो और लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने का आदेश दिया है.
डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बताया है कि घटना की जांच के लिए क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की गई है.
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने क़ानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंद से इस्तीफ़ा देने की मांग की है.
महेश गायकवाड़ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना के कल्याण शहर प्रमुख और पूर्व नगरसेवक हैं.
गणपत गायकवाड़ कल्याण (पूर्व) निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी विधायक हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक गोली चलाने की कथित घटना उल्हासनगर के हिल लाइन पुलिस स्टेशन के एक पुलिस इंस्पेक्टर के सामने हुई.
घायल हुए दोनों लोगों का इलाज ठाणे के ज्यूपिटर हॉस्पिटल में चल रहा है. महेश गायकवाड़ की हालत गंभीर बताई जा रही है.
पुलिस ने क्या बताया
शिंदे गुट के नेता महेश गायकवाड़ और बीजेपी विधायक गणपत गायकवाड़ ज़मीन विवाद को लेकर एक-दूसरे के ख़िलाफ शिकायत दर्ज कराने थाने आए थे. तभी दोनों के बीच बहस हो गई.
पुलिस ने बताया कि गणपत गायकवाड़ ने महेश गायकवाड़ पर कुल छह गोलियां चलाईं.
इसके बाद पुलिस ने विधायक गणपत गायकवाड़ समेत तीन लोगों को गिरफ़्तार कर लिया.
विधायक गणपत गायकवाड़ पर हत्या के प्रयास से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं.
ठाणे के एएसपी दत्ता शिंदे ने कहा कि उन पर आईपीसी की धारा 307, 120 (बी) 143, 147, 148, 149 लगाई गई है.
इस घटना के बाद उल्हासनगर और उसके आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.
एसआईटी करेगी जांच
इस बीच, उप मुख्यमंत्री और राज्य के गृह मंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा है कि मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच की एसआईटी का गठन किया गया है.
एसीपी नीलेश सोनावणे के नेतृत्व में मामले की जांच की जाएगी.
इस घटना को लेकर अजित पवार ने भी नाराज़गी जताई और कहा कि वे इस पर गृह मंत्री देवेंद्र फड़णवीस से बात करेंगे.
विधायक गणपत गायकवाड़ की फ़ायरिंग को ग़लत बताते हुए अजित पवार ने कहा, "उल्हासनगर की घटना सभी ने देखी है. विधायक गायकवाड़ एक हताश शख़्स की तरह बात कर रहे थे. उन्हें संविधान से मिले अधिकारों के दुरुपयोग करने को लेकर सावधान रहना चाहिए."
थाने में क्या हुआ था?
ज़मीन विवाद को सुलझाने के लिए दोनों नेता 2 फ़रवरी की रात क़रीब 9.30 बजे उल्हासनगर हिललाइन पुलिस स्टेशन पहुंचे थे.
पुलिस एफ़आईआर के मुताबिक, वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर के केबिन में विधायक गणपत गायकवाड़ और महेश गायकवाड़ के बीच बहस हो गई.
तभी अचानक गणपत गणपत गायकवाड़ और हर्षल केन ने बंदूकों से महेश गायकवाड़ और राहुल गायकवाड़ पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं.
पुलिस के मुताबिक गणपत गायकवाड़ ने महेश गायकवाड़ पर चार गोलियां चलाईं और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है.
वहीं, गणपत गायकवाड़ के समर्थकों ने महेश गायकवाड़ के समर्थकों के साथ गाली-गलौज की.
थाने के सीसीटीवी फ़ुटेज के मुताबिक फ़ायरिंग के बाद हंगामा देखा गया.
गृह मंत्री के इस्तीफ़े की मांग
थाने में ही हुई इस फायरिंग से पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है.
विपक्ष क़ानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है. उसने मांग की है कि देवेन्द्र फड़नवीस को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा, "अगर इस राज्य में एकनाथ शिंदे जैसा मुख्यमंत्री होगा तो यहां अपराधी ही पैदा होंगे."
उन्होंने कहा कि बीजेपी विधायकों को अब क़ानून का डर नहीं है.
एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने भी कहा कि देवेंद्र फड़णवीस को गृह मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
वे बोलीं, "क्या गृह मंत्री ने बीजेपी नेताओं को महाराष्ट्र में क़ानून-व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने का खुला लाइसेंस दे दिया है? पुणे में, बीजेपी विधायकों को पुलिस की कान के नीचे मार दिया जाता है और उल्हासनगर में पूर्व नगरसेवकों पर गोलियां चलाई जाती हैं."
उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र में क़ानून-व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है. बीजेपी का गुंडाराज चल रहा है. मुख्यमंत्री और गृह मंत्री चुपचाप ये सब देख रहे हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय को राज्य की बिगड़ती क़ानून व्यवस्था पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए. वो महाराष्ट्र सरकार को तुरंत बर्खास्त करे."
उधर, इस घटना के बाद गणपत गायकवाड़ ने मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर कई गंभीर आरोप लगाए और साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के इस्तीफ़े की मांग की.
उन्होंने आरोप लगाया, "एकनाथ शिंदे ने अब तक मुझसे मेरे पैसे ठगे हैं. विधायक निधि से किए गए कई कामों का श्रेय लेने के लिए श्रीकांत शिंदे ने परियोजना स्थलों पर जबरदस्ती अपने नाम का बोर्ड लगा दिया है. एकनाथ शिंदे ने अपराध को बढ़ावा दिया है."
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