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कोरोना से लड़ने के लिए कितनी तैयार है भारतीय सेना, आर्मी चीफ़ जनरल नरवणे ने दिया जवाब
भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा है कि ज़रूरत पड़ने पर आने वाले दिनों में कोरोना संक्रमण के ख़िलाफ़ लड़ाई में सेना अपनी भूमिका बढ़-चढ़कर और बख़ूबी निभाएगी.
यह बात उन्होंने अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस को ईमेल के ज़रिए दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कही.
कई यूरोपीय देशों में कोरोना संक्रमण से पैदा हुए हालात को संभालने के लिए सेना की मदद ली जा रही है. क्या भारत में भी ऐसा कुछ हो सकता है?
अख़बार के इस सवाल के जवाब में जनरल नरवणे ने कहा कि भारतीय सेना भारत की जनता के लिए ही है.
उन्होंने कहा, "ज़रूरत पड़ने पर भारतीय सेना प्रशासन की मदद करती है. अभी की ज़रूरतों को देखते हुए हमने मानेसर, जैसलमेर और जोधपुर में क्वरंटीन सेंटर बनाए हैं."
जनरल नरवणे ने कहा कि जब भी सरकार सेना के लिए कोई ख़ास काम निर्धारित करेगी, भारतीय सेना उसे बख़ूबी पूरा करेगी.
सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि कोरोना संक्रमण की वजह से भारतीय सेना के ऑपरेशन में कोई बदलाव नहीं आया है. सेना सरकार के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए अपना काम पहले की तरह जारी रखे हुए है.
चीन ने बाधित की कोरोना पर बैठक
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में कोरोना वायरस पैन्डेमिक पर होने वाली एक चर्चा को बाधित (ब्लॉक) कर दिया.
सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य एस्टोनिया ने पिछले हफ़्ते दुनिया भर में फैले कोरोना संक्रमण के बारे में चर्चा करने के लिए एक बैठक बुलाए जाने की मांग की थी.
एस्टोनिया ने ज़ोर देकर कहा था कि दुनिया में लगातार बढ़ता कोविड-19 संक्रमण अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा बन सकता है.
हालांकि एस्टोनिया के इस प्रस्ताव को चीन और रूस ने शुरुआत में ही ठुकरा दिया. अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य कोरोना वायरस के प्रभाव से जुड़ी बैठक करने के लिए बहुत ज़्यादा इच्छुक नहीं थे.
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक़ एस्टोनिया ने कोरोना संक्रमण से जुड़े मामलों से 'पारदर्शिता' की मांग की थी और चीन इस बारे में बात करने पर राज़ी नहीं था.
कोरोना वायरस संक्रमण की शुरुआत पिछले साल दिसंबर में चीन के वुहान से ही हुई थी.
सीएए समर्थक छात्रों को फ़ेल करने के ट्वीट पर जामिया प्रोफ़ेसर सस्पेंड
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी ने उस असिस्टेंट प्रोफ़ेसर को सस्पेंड कर दिया है जिन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा था कि 'उनके विषय में सभी छात्र पास हो गए थे, सिवाय उन 15 छात्रों के जो नागरिकता संशोशन क़ानून (सीएए) के समर्थक थे.'
हालांकि उन्होंने बाद में दावा किया था उनका वह ट्वीट 'तंज़' के लिए और 'बहुसंख्यकवाद को समझाने' के लिए किया था जिसका ग़लत मतलब निकाला गया.
सस्पेंड हुए असिस्टेंट प्रोफ़ेसर का नाम डॉक्टर अबरार अहमद है और ये यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पढ़ाते हैं.
हालांकि इसके बाद भी उनकी मुश्किलें कम नहीं हुईं और अगले ही दिन जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से उन्हें सस्पेंड किए जाने की जानकारी दी.
जामिया ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय और डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशंक को टैग करते हुए ट्वीट किया, "डॉक्टर अबरार अहमद ने सार्वजनिक मंच पर 15 ग़ैर मुसलमान छात्रों को फ़ेल करने की बात लिखी है...सीसीएस कंडक्ट नियमों के मुताबिक़ ये एक गंभीर दुर्व्यवहार है जिससे धार्मिक सद्भावना ख़तरे में पड़ सकती है. इसलिए यूनिवर्सिटी जांच लंबित रहने तक प्रोफ़ेसर अबरार को सस्पेंड करती है."
ये ख़बर इंडियन एक्सप्रेस में छपी है.
कोरोना: ऑनलाइन लग रही हैं संघ की शाखाएं
देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से खुले मैदानों और पार्कों में लगने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखाएं अब इन जगहों पर नहीं लग रही हैं.
दैनिक जागरण में छपी ख़बर के अनुसार देश में कई जगहों पर इन दिनों संघ की शाखाएं ऑनलाइन लग रही हैं और वीडियो कॉलिंग के ज़रिए स्वयंसेवक एक दूसरे से जुड़ रहे हैं.
इससे पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सभी स्वयंसेवकों से अपील की थी वो बाहर निकलने के बजाय अपने घरों में ही संघ की प्रार्थना करें.
ऑनलाइन शाखा लगाने के अलावा संघ घरों में स्वयंसेवकों को पढ़ने के लिए ऑनलाइन लिंक भी भेज रहा है.
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