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होटल या रेस्तरां खाना खाने के बाद सर्विस चार्ज मांगे तो क्या करें?
- Author, अनंत प्रकाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने सोमवार को होटलों, रेस्तरां और ढाबों आदि को खाने-पीने के बिल में सर्विस चार्ज लगाने से प्रतिबंधित कर दिया है.
ये पहला मौका नहीं है जब सर्विस चार्ज को लेकर बहस शुरू हुई हो. इससे पहले साल 2017 में भी केंद्र सरकार ने कहा था कि सर्विस चार्ज या सेवा शुल्क देने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता.
इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर आप किसी रेस्तरां में खाना खाने जाएं और रेस्तरां आपके बिल में खाने के साथ-साथ सेवा शुल्क का भी पैसा जोड़ दे तो आप सेवा शुल्क देने से मना कर सकते हैं.
लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना जारी होने के पांच साल बाद भी देश भर में ज़्यादातर रेस्तरां सेवा शुल्क ले रहे हैं. यही नहीं, केंद्र सरकार की मिनी-रत्न कंपनियों में शुमार आईआरसीटीसी भी सर्विस चार्ज वसूल रही है.
ऐसे में नए दिशा निर्देश जारी होने के बाद लोग सोशल मीडिया पर अपने खाने के बिल शेयर करके सवाल पूछ रहे हैं कि अब क्या बदल जाएगा. वहीं, होटल - रेस्तरां एसोसिएशन की ओर से इन दिशानिर्देशों को ग़ैर-ज़रूरी बताया जा रहा है.
सीसीपीए के दिशानिर्देश क्या हैं -
- होटल या रेस्तरां खाने के बिल में सेवा शुल्क नहीं जोड़ सकेगा
- किसी अन्य नाम से सेवा शुल्क नहीं लिया जा सकेगा
- होटल या रेस्तरां सेवा शुल्क का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं करेगा
- होटल या रेस्तरां स्पष्ट तौर पर बताएगा कि सेवा शुल्क देना ऐच्छिक, वैकल्पिक और उपभोक्ता का अधिकार है
- रेस्तरां सेवा शुल्क नहीं लगा पाने की वजह से सेवाएं देने से मना नहीं कर सकेगा
- सेवा शुल्क को खाने के बिल के साथ जोड़कर और कुल राशि पर जीएसटी लगाकर नहीं लिया जा सकेगा
- होटल या रेस्तरां दिशा निर्देशों का उल्लंघन करते हुए सेवा शुल्क लगा रहा है, तो उपभोक्ता संबंधित होटल या रेस्तरां से सेवा शुल्क को बिल राशि से हटाने का अनुरोध कर सकता है.
- उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) 1915 पर कॉल करके या एनसीएच मोबाइल ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकता है.
- उपभोक्ता अनुचित व्यापार कार्य प्रणाली के ख़िलाफ़ उपभोक्ता आयोग में शिकायत भी दर्ज करा सकता है.
- त्वरित और प्रभावी तरीके से निपटाने के लिए ई-दाखिल पोर्टल www.e-daakhil.nic.in के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भी शिकायत दर्ज की जा सकती है.
- उपभोक्ता जांच और सीसीपीए द्वारा आगे की कार्यवाही के लिए सम्बद्ध जिले के ज़िला कलेक्टर को शिकायत दर्ज करा सकता है.
- सीसीपीए को शिकायत ई-मेल com-ccpa@nic.in. पर भेजी जा सकती है.
20 रुपये की चाय पर 50 रुपये सर्विस चार्ज़
लेकिन सवाल उठता है कि उपभोक्ता हेल्पलाइन से लेकर ई-दाखिल पोर्टल की प्रक्रिया कितनी सहज और कारगर साबित होगी.
क्योंकि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने आईआरसीटीसी जैसी मिनी-रत्न कंपनी के बिल जारी किए हैं जिसमें 20 रुपये की चाय पर 50 रुपये सर्विस चार्ज के रूप में वसूले गए हैं.
कई लोगों ने अपनी रसीदों की तस्वीरें साझा करके दिखाया है कि सर्विस टैक्स 7 से 10 और 15 फ़ीसद की दर तक वसूला जाता है.
कई मामलों में देखा गया है कि रेस्तरां अपने गेट के बाहर एक बोर्ड लगाकर रख देते हैं जिसमें लिखा होता है - 'हम सर्विस चार्ज लेते हैं'.
ट्विटर यूज़र शैलेष कुमार ने इस बारे में ट्वीट करके बताया है, "गुड़गांव के सेक्टर 29 में सभी रेस्तरां दस फीसदी सर्विस चार्ज लेते हैं और गेट पर स्पष्ट रूप से लिखा है. अगर आप यह नहीं देना चाहते तो यहां मत आइए"
अगर आप ट्विटर पर सर्विस चार्ज लिखकर सर्च करें तो आपको ऐसे सैकड़ों - हज़ारों ट्वीट मिलेंगे जिसमें लोग सेवा शुल्क देने की अपनी कहानी बयां करते दिखेंगे.
कितने कारगर साबित होंगे नए नियम
ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि इन दिशानिर्देशों के जारी होने के बाद क्या बदल जाएगा. और साल 2017 में जारी की गयी गाइडलाइन की तुलना में ये गाइडलाइन कारगर साबित क्यों होगी.
पिछले तीन दशकों से उपभोक्ता मामलों पर लिख रहीं लेखक और वरिष्ठ पत्रकार पुष्पा गिरिमाजी मानती हैं कि इन दिशानिर्देशों से सूरते-ए-हाल बदलने की संभावनाएं हैं.
वह कहती हैं, "इस बार के दिशानिर्देश अलग और ज़्यादा प्रभावी हैं क्योंकि इन्हें उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 के तहत बनाए गए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने जारी किया है. इसका मुख्य काम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है. इन नियमों का उल्लंघन करने पर छह महीने की सज़ा और 20 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है."
लेकिन सवाल उठता है कि होटल या रेस्तरां की ओर से नियमों का उल्लंघन करने और उसकी शिकायत करने की प्रक्रिया कितनी सहज है.
क्योंकि भारत में उपभोक्ता मामलों में अक्सर लेट-लतीफ़ी की वजह से लोग उपभोक्ता मामलों को कोर्ट में ले जाने से बचते हैं.
इस पर पुष्पा गिरिमाजी कहती हैं, "ये सब कुछ उपभोक्ता पर निर्भर करता है. सरकारी कार्रवाई से ज़्यादा उपभोक्ताओं को सेवा शुल्क देने का विरोध करना है. इसे लेकर नाराज़ सब होते हैं लेकिन असहज स्थिति से बचने के लिए इसका विरोध करने से बचते हैं. लेकिन उपभोक्ताओं को इस स्वभाव को बदलना है. और जब सभी लोग ये कहने लगेंगे कि जहां सर्विस चार्ज लिया जाएगा, वहां हम खाना नहीं खाएंगे तो इससे स्थिति में बदलाव होगा. लेकिन इसके साथ ही सीसीपीए को भी ऐसे मामलों में सक्रियता के साथ त्वरित कार्रवाई करनी होगी."
क्या कहती है होटल एसोसिएशन
बीबीसी ने इस बारे में भारतीय होटल एवं रेस्तरां एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आदर्श शेट्टी से बात करके उनका पक्ष समझने की कोशिश की है.
आदर्श शेट्टी कहते हैं, "ये सब जानते हैं कि पहले भी सेवा शुल्क को देना अनिवार्य नहीं था. जिस उपभोक्ता को सर्विस अच्छी लगती थी, वह सर्विस चार्ज देता था, जिसे सर्विस पसंद नहीं आती थी, वह सर्विस चार्ज नहीं देता था. और आख़िरकार ये पैसा खाना परोसने और बनाने वालों को मिला करता था. ऐसे में ये कोई इतना बड़ा मुद्दा नहीं था. लेकिन अब जो नए नियम आए हैं, उनके बाद सेवा शुल्क नहीं लिया जा सकेगा. ऐसी स्थिति में कुछ रेस्तरां वाले सर्विस शुल्क लेना बंद कर देंगे और कुछ रेस्तरां-होटल वाले अपने वेटर्स और खानसामों को ध्यान में रखते हुए खाने-पीने के सामान के दाम बढ़ाएंगे."
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