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पीएम नरेंद्र मोदी के भाई प्रह्लाद मोदी क्यों हैं नाराज़?
- Author, सागर पटेल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
पीएम मोदी के भाई प्रह्लाद मोदी गुजरात सरकार के सामने अपनी कुछ माँगों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
प्रह्लाद मोदी गुजरात फे़यरप्राइस शॉप्स एन्ड कैरोसीन लाइसेंस होल्डर एसोसिएशन के प्रमुख हैं. उन्होंने दावा किया है कि सरकारी राशन वितरण को लेकर राज्य में कई अनियमिताएं हैं.
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि सरकारी राशन की दुकानों में डुप्लीकेट सॉफ्टवेर से कारोबार चल रहा हे और ये बात सरकारी अधिकारी भी जानते हैं. प्रह्लाद मोदी ने मांग की है कि इसकी जांच सरकार सीबीआई को सौंपे.
उन्होंने कहा कि कि सरकार ने पुराने राशन कार्ड वापस लेकर नये बायोमेट्रिक राशन कार्ड दिए हैं, लेकिन नया कार्ड बनाने का काम प्राइवेट एनजीओ को दिया गया है, इस प्रक्रिया में राशन दुकानदारों से बातचीत नहीं की गई है.
प्रह्लाद मोदी का दावा है कि कई बार ग्राहक के अंगूठे के निशान मैच नहीं करते, इसलिए ऑनलाइन राशन देने में दिक्क़तें होती हैं. उनकी मांग है कि ऑफ़लाइन राशन वितरण की मंज़ूरी देनी चाहिए.
इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार ने ग़लत आधार कार्ड लिंक किए हैं जिन्हें सुधारने का काम नहीं हो रहा है.
सरकार ने एक सितंबर को एक आदेश जारी कर ज़ोनल अफ़सरों को राशन की दुकानों के खुलने और बंद करने से जुड़े रिकॉर्ड रखने की ज़िम्मेदारी दी थी. इसका भी प्रह्लाद मोदी विरोध कर रहे हैं. विरोध के बाद फ़िलहाल गुजरात सरकार ने इस आदेश को वापस ले लिया है.
'पीएम से सीधे संपर्क में नहीं'
प्रह्लाद मोदी के मुताबिक़, उनका पीएम मोदी से कोई संपर्क नहीं है, इसलिए वो सड़क पर रहकर लड़ाई लड़ रहे हैं और उन्होंने पीएम को कभी सीधे तौर पर इसके लिए नहीं बोला.
वो कहते हैं, "हमारे भाई ने 1970 में घर छोड़ दिया था, वो भारत मां के लाल बन चुके हैं, हीराबा का लाल अब सिर्फ़ कहने के लिए है, वो परिवार के मामले में नहीं आते, किसी अच्छे या बुरे समय पर वो नहीं आते."
प्रह्लाद मोदी का कहना है कि पीएम के पास सीधे जाने का ख़्याल उनके मन में कभी नहीं आता. प्रहलाद मोदी इससे पहले दिल्ली के जंतर मंतर पर भी विरोध कर चुके हैं. हालांकि उनका कहना है कि वो विरोध सिर्फ़ पीएम मोदी के रहते नहीं करते बल्कि पिछली सरकारों के ख़िलाफ़ भी उन्होंने प्रदर्शन किए हैं.
उन्होंने कहा, "मनमोहन जी की सरकार में जो हो रहा था, उसके ख़िलाफ़ हमने उस समय ठाना था कि सरकार बदलनी है, सबने मिलकर काम किया और बीजेपी की सरकार बनी, लेकिन हमारी अपेक्षाओं पर बात नहीं हुई."
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पीएम हाउस क्यों नहीं जाते
ये पूछे जाने पर कि पीएम के भाई होते हुए भी वो सीधे पीएम हाउस क्यों नहीं जाते, प्रह्लाद मोदी कहते हैं, "पीएम हाउस सब्ज़ी मंडी नहीं है, इसलिए इस बात को मैं नहीं मानता कि मुझे वहां जाना चाहिए. हां पीएम हाउस से न्योता आएगा, तो हम जाएंगे."
हालांकि उनका कहना है कि अभी तक उन्हें ऐसा कोई न्योता नहीं मिला है.
गुजरात में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं. कई लोगों का मानना है कि प्रह्लाद मोदी के इस तरह से विरोध करने से नरेंद्र मोदी की छवि ख़राब हो सकती है और बीजेपी को इसका नुक़सान हो सकता है.
इसके जवाब में प्रह्लाद मोदी कहते हैं, "जो लोग कहते हैं वो आ जाएं सामने और बोलें कि मैं ग़लत हूं, मैं उनसे बात करूंगा."
उन्होंने कहा कि गुजरात में कई काम कई काम हो रहे हैं, लेकिन राशन दुकान वालों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा.
वो कहते हैं, "कोविड के समय सरकार ने आदेश दिया, काम हम लोगों ने किया, राशन दुकानदारों ने किया, अधिकारियों ने किया. कोविड पीड़ितों को भी हमने उनके हाथ में राशन दिया."
क्या सक्रिय राजनीति में आएंगे प्रह्लाद मोदी?
कई लोगों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन कर प्रह्लाद मोदी सक्रिय राजनीति में आना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने इससे इनकार किया है. उन्होंने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें दूसरी पार्टियां आने का न्योता देती हैं, लेकिन वो नहीं जाते.
कई लोगों का कहना है कि मोदी के भाई होने के कारण सरकारी अधिकारी उनसे डरते हैं. इस पर प्रह्लाद मोदी कहते हैं, "नरेंद्र मोदी ने आजतक किसी को फ़ोन किया है क्या. अगर नहीं किया तो डरने की क्या ज़रूरत है."
"नरेंद्र मोदी सीएम थे तब भी मैं हाईकोर्ट गया था क्योंकि मैं न्याय के लिए लड़ रहा हूं. अधिकारी सरकार में बैठे लोगों को सही बात नहीं बताते, इसलिए मैं हाईकोर्ट जाता था और जीत के आता था."
प्रह्लाद मोदी के आरोपों पर हमने गुजरात बीजेपी का पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन उनकी तरफ़ से हमें कोई जवाब नहीं मिला.
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