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जमाल ख़ाशोज्जी हत्याकांड में पाँच को सज़ा-ए-मौत
सऊदी अरब की एक अदालत ने पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी हत्या के मामले में पांच लोगों को सज़ा-ए-मौत सुनाई है.
सोमवार को सऊदी अरब के सरकारी अभियोजक शलान अल-शलान ने बताया है कि इस मामले में उन पांच लोगों को मौत की सज़ा दी गई है जो सीधे तौर पर हत्या में शामिल थे. साथ ही तीन लोगों को कुल मिला कर 24 साल की जेल दी गई है.
उन्होंने बताया कि इस मामले में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सलाहकार सऊद अल-ख़तानी से पूछताछ की गई थी लेकिन उन पर किसी तरह को आरोप नहीं लगाए गए हैं.
उन्हें आख़िरी बार दो अक्तूबर 2018 को तुर्की के इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्यिक दूतावास के बाहर देखा गया था. तुर्की ने सऊदी अरब पर आरोप लगाया था कि दूतावास में जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या कर दी गई थी. लेकिन उनकी लाश नहीं मिली.
तुर्की का आरोप था कि सऊदी आला अधिकारियों के आदेश पर ख़ाशोज्जी की हत्या की गई है. हालांकि सऊदी अरब इससे इनकार करता रहा.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हत्या की कड़ी आलोचना हुई.
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए और पश्चिमी देशों की सरकारों ने कहा था कि सऊदी क्राउन प्रिंस ने ही ख़ाशोज्जी की हत्या का आदेश दिया था. लेकिन सऊदी के अधिकारी इस बात से इनकार करते रहे थे कि इसमें उनकी कोई भूमिका थी.
इस मामले में सऊदी अरब से तुर्की ने 18 संदिग्धों को प्रत्यार्पित करने की बात कही थी. इनमें से 15 वो एजेंट थे जो हत्या को अंजाम देने सऊदी से तुर्की पहुंचे थे. हालांकि सऊदी अरब ने तुर्की की इस मांग को ख़ारिज कर दिया.
इसी साल जनवरी में ख़ाशोज्जी की हत्या के मामले में रियाद में 11 अभियुक्तों पर मुक़दमे की सुनवाई शुरू हुई थी.
सितंबर में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सार्वजनिक तौर पर जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या की ज़िम्मेदारी ली थी और कहा था कि उनके रहते ही हत्या को अंजाम दिया गया है इस कारण वो इस हत्या की ज़िम्मेदारी लेते हैं.
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