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अभ्यर्थियों और सरकार के बीच हुई पहली बातचीत: जारी रहेगा प्रदर्शन, मंत्री ने क्या बताया?

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन जारी है.

लाइव कवरेज

चंदन कुमार जजवाड़े, अरशद मिसाल

  1. थाईलैंड: स्कूल में गोलीबारी में कम से कम 7 लोगों की मौत, क़रीब 15 घायल

    थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक से सटे नॉनथाबुरी प्रांत के बैंक क्रुआई ज़िले में एक स्कूल में गोलीबारी हुई है. इस गोलीबारी में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है.

    थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक़, आशंका है कि संदिग्ध ने स्कूल जाने से पहले अपने दादा और दादी की भी हत्या कर दी, क्योंकि उन दोनों के शव घर पर मिले हैं.

    थाइलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि स्कूल में हुई गोलीबारी में पांच शिक्षकों की मौत हुई है.

    संदिग्ध छात्र ने गोलीबारी करने के बाद ख़ुद को जिस बंदूक से गोली मारी, वह उसके दादा की थी, जो पहले एक स्कूल टीचर थे.

    थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने स्कूल में हुई इस घटना की आलोचना की है.

    उन्होंने कहा, "यह बहुत बुरा हुआ है. ऐसा नहीं होना चाहिए था. मैं केवल पीड़ितों के लिए दुखी नहीं हू बल्कि मुझे इस बात का भी अफ़सोस है कि यह नहीं होना था. ऐसा हमारे देश में कैसे हो सकता है?"

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, पुलिस ने हमलावर की पहचान स्कूल के एक स्टूडेंट के रूप में की है.

    पुलिस के अनुसार, स्थानीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे तक हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए थे.

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हमलावर ने बाद में खुद को भी गोली मार ली.

    नॉनथाबुरी प्रांत के पुलिस प्रमुख डेचरापी कोंगदी ने बीबीसी को बताया कि हमलावर नौवीं कक्षा का स्टूडेंट था.

    थाईलैंड में नौवीं कक्षा के स्टूडेंट्स की उम्र आमतौर पर क़रीब 14 वर्ष होती है. पुलिस ने पुष्टि की है कि हमलावर की भी मौत हो चुकी है.

  2. प्रयागराज में राहुल गांधी के कार्यक्रम का रास्ता साफ, कायस्थ पाठशाला ने बदला फ़ैसला, गौरव गुलमोहर, बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए

    कायस्थ पाठशाला ने कांग्रेस नेता और रायबरेली सांसद राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए केपी कॉलेज मैदान में कार्यक्रम की अनुमति दे दी है.

    इसके साथ ही राहुल गांधी के प्रयागराज दौरे से पहले कार्यक्रम स्थल को लेकर जारी विवाद फिलहाल ख़त्म हो गया है.

    राहुल गांधी कोटा और देहरादून के बाद प्रयागराज में 8 अगस्त को 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल होंगे.

    इससे पहले संस्था ने एक पत्र जारी करते हुए कार्यक्रम की अनुमति को निरस्त कर दिया था.

    कायस्थ पाठशाला के कार्यवाहक अध्यक्ष जितेंद्र नाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय को भेजे गए पत्र में कहा है कि ‘6 अगस्त 2026 को दिए गए उनके आश्वासन पत्र को देखते हुए 5 अगस्त 2026 का आदेश वापस लिया जाता है, जिसमें कार्यक्रम की अनुमति रद्द करने की बात कही गई थी.’

    पत्र में यह भी कहा गया है कि ज़िला प्रशासन से अनुमति मिलने और उसकी ओर से तय शर्तों का पालन किए जाने के बाद कार्यक्रम से संबंधित आगे की कार्यवाही की जा सकती है.

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "हमने उनकी (कायस्थ पाठशाला) की सभी शर्तों को मान लिया है. जिसमें मैदान की साफ-सफाई से लेकर अन्य शर्ते शामिल हैं. कांग्रेस पार्टी कार्यक्रम की तैयारी में जुटी है. हमें सबका प्यार और समर्थन मिल रहा है."

  3. सीरिया को लेकर तुर्की और इसराइल आए आमने-सामने

    इसराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि 'तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने इसराइल पर सीरिया को अस्थिर' करने का आरोप लगाया है, जबकि इसराइल ने केवल अपने नागरिकों को हमलों से बचाने के लिए ज़रूरी क़दम उठाए हैं.

    विदेश मंत्री गिदोन सार के बयान में कहा गया कि तुर्की के यही नेता दशकों से सीरिया की संप्रभुता का उल्लंघन करते रहे हैं और साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानून पर दूसरों को उपदेश देते रहे हैं.

    इसराइली विदेश मंत्री ने दावा किया कि तुर्की ने सीरिया के क़रीब पांच फीसदी हिस्से पर क़ब्जा कर रखा है और वह इसराइल की सुरक्षा को कमज़ोर करने के मक़सद से सीरिया में सैन्य ठिकाने स्थापित करना चाहता है.

    बयान में कहा गया कि इसके मुक़ाबले इसराइल केवल एक बफ़र ज़ोन पर नियंत्रण रखता है, जो सीरिया के कुल क्षेत्रफल का क़रीब 0.1 फीसदी है.

    उनके अनुसार, "यह कदम दक्षिणी सीरिया से सक्रिय उन आतंकवादी समूहों से सुरक्षा के लिए उठाया गया है, जो इसराइल पर हमला करना चाहते हैं."

    साथ ही बयान में दावा किया गया कि दिसंबर 2024 में सीरियाई लड़ाकों ने साल 1974 के इसराइल और सीरिया के बीच सैन्य बलों को अलग करने के समझौते का उल्लंघन करते हुए बफ़र ज़ोन में प्रवेश किया था.

    बयान में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के नेतृत्व में तुर्की पर सीरिया और इराक़ में कुर्द बलों के ख़िलाफ़ बड़े सैन्य अभियान चलाने, पड़ोसी देशों को बार-बार धमकी देने, पिछले 50 से ज़्यादा वर्षों से साइप्रस के क़रीब 36 फ़ीसदी हिस्से पर क़ब्जा बनाए रखने और मानवाधिकारों के रिकॉर्ड को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना झेलने के आरोप भी लगाए गए हैं.

    अंत में इसराइली विदेश मंत्री ने कहा, "विदेश मंत्री हाकान फिदान चाहते हैं कि इसराइल अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाना बंद कर दे, लेकिन ऐसा नहीं होगा. इसराइल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाना जारी रखेगा."

  4. हूती के हमलों में यमन की सेना के कम से कम 30 जवानों की मौत, डेविड ग्रीटन

    सेंट्रल यमन में हूती विद्रोहियों की ओर से सैन्य शिविरों पर किए गए हमलों में यमन की सरकारी सेना के कम से कम 30 जवानों के मारे जाने की ख़बर है.

    यह हाल के वर्षों में दोनों पक्षों के बीच हुई लड़ाई के सबसे घातक हमलों में से एक है.

    यमन के रक्षा मंत्रालय ने बताया, “मारिब और हदरामौत प्रांतों में कई सैन्य शिविरों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया. इन हमलों में कई सैनिकों की मौत हुई और कई घायल हुए.”

    हालांकि, मंत्रालय ने मृतकों की सटीक संख्या नहीं बताई.

    रक्षा मंत्रालय ने इन हमलों को "विश्वासघाती" बताया और कहा कि इस "आक्रामक कार्रवाई" का जवाब उचित समय और स्थान पर दिया जाएगा.

    उत्तर-पश्चिमी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने उन "बड़े सऊदी सैन्य जमावड़ों" को निशाना बनाया, जो कथित तौर पर सैन्य अभियान की तैयारी कर रहे थे.

    यमन के गृहयुद्ध के दौरान सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन सरकारी सेना का समर्थन करता रहा है.

    एक अलग हमले में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता ने कहा कि सऊदी अरब के नजरान सीमा क्षेत्र में 11 नागरिक घायल हुए हैं. उनके मुताबिक़, यह हमला हूती विद्रोहियों ने किया.

    गठबंधन की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा गया कि घायलों में सात सऊदी नागरिक शामिल हैं. इनमें एक महिला और चार साल का एक बच्चा भी है. अन्य चार घायल नागरिक यमन, पाकिस्तान और मिस्र के रहने वाले हैं.

    यमन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़, मध्य यमन में हूती विद्रोहियों के हमले गुरुवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 10:40 बजे हुए.

  5. कांग्रेस के समर्थन से चल रही झारखंड सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स से राहुल ने की बात

    झारखंड की राजधानी रांची में जेएसएससी और जेपीएससी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे छात्रों से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फ़ोन पर बात की.

    प्रदर्शन कर रहे स्डूडेंट लीडर पीयूष कुमार ने कहा, "परीक्षा रद्द करने, जांच और सुधार को लेकर जो हमारी मांगें हैं, हमने वह बताई हैं. राहुल गांधी ने कहा कि हम आपकी मांगों के साथ खड़े हैं. हम सरकार से इस संबंध में बात करेंगे कि आपकी मांगे मान ली जाएं."

    81 सदस्यों की झारखंड विधानसभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी के पास 34 विधायक हैं और वह कांग्रेस के 16 विधायकों के समर्थन के साथ चल रही है.

    इसके साथ ही राज्य में आरजेडी के चार विधायकों का समर्थन भी जेएमएम के साथ है. ऐसे में राहुल गांधी का प्रदर्शकारियों से बात करना और उन्हें आश्वासन देना राजनीतिक तौर पर भी काफ़ी अहम है.

    इस बीच रांची में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच छात्रों ने राज्य सरकार के साथ बातचीत के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल का गठन कर लिया है.

    हालाँकि पीयूष कुमार ने कहा कि उन्हें इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई है.

    इससे पहले दो जुलाई को झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) 14वीं की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम आए.

    कुल 2,204 अभ्यर्थियों ने मेंस यानी मुख्य परीक्षा के लिए क्वालीफाई किया. मुख्य परीक्षा की तारीख़ 18 से 20 जुलाई तय की गई.

    रिज़ल्ट आते ही सवालों का सिलसिला शुरू हो गया. कैटेगरी-वाइज़ कट ऑफ़ जारी नहीं हुई. इसी बीच एक अभ्यर्थी की कथित ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) शीट सोशल मीडिया पर वायरल हुई.

    कथित तौर पर इसमें उसने सिर्फ़ 48 सवाल भरे थे, फिर भी उसका चयन मुख्य परीक्षा के लिए हो गया था.

    साथ ही जो परिणाम जारी किए गए, उस पर जेपीएससी के अध्यक्ष, सचिव या सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे. जो कि नियमानुसार होने चाहिए थे.

    स्टूडेंट्स का आरोप है कि जेपीएससी के पेपर लीक किए गए, सीटें बेची गई हैं और उन्हें सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं है, मामले की जांच ईडी या सीबीआई को सौंपी जाए.

    इन्हीं मांगों को लेकर 25 जुलाई से रांची में छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है.

  6. परिसीमन विधेयक पर डीएमके क्या मोदी सरकार का साथ देगी?

    परिसीमन विधेयक को समर्थन देने के लिए डीएमके ने केंद्र सरकार के सामने अपनी शर्त रखी है. ये शर्तें ऐसे समय में सामने आई हैं, जब केंद्र सरकार विधेयक के लिए जरूरी समर्थन जुटाने के मकसद से विपक्षी दलों से संपर्क बढ़ा रही है.

    हालाँकि अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिन्दू' के मुताबिक़ डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि केंद्र सरकार ने अब तक उनसे संपर्क नहीं किया है.

    दरअसल केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार नए परिसीमन की प्रक्रिया लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की संभावना पर विचार कर रही है.

    ऐसे में डीएमके ने संकेत दिए हैं कि अगर सरकार अप्रैल में लोकसभा में पेश किए गए विधेयक में तीन अहम बदलाव करती है, तो पार्टी इस विधेयक का समर्थन करने पर विचार कर सकती है.

    अप्रैल में लाया गया यह विधेयक पारित नहीं हो सका था. दरअसल दक्षिण भारतीय राज्यों को आशंका है कि मौजूदा स्वरूप में परिसीमन लागू हो जाता है तो केंद्र सरकार के गठन में उसकी अहमियत कम हो जाएगी.

    फ़िलहाल साल 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा में सीटों की संख्या निर्धारित है और यह सीमा साल 2027 की जनगणना के बाद समाप्त हो जाएगी.

    डीएमके की मांग है कि लोकसभा में सीटों की यह संख्या अगले 25 साल तक न बदली जाए.

    द हिन्दू के मुताबिक़ साथ ही डीएमके चाहती है कि संविधान में संशोधन करके सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50% की एकसमान बढ़ोतरी की जाए.

    इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल में संसद में परिसीमन से जुड़ा बिल पेश करते समय मौखिक रूप से ऐसा करने का वादा किया था.

    द हिन्दू ने लिखा है कि ‘डीएमके सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चाहती है कि इस बिल में हर राज्य के लिए सीटों की संख्या की एक सूची भी शामिल हो’.

    डीएमके का कहना है कि वह बिल का स्वरूप और उसमें शामिल बातों की जानकारी मिलने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेगी.

  7. नमस्कार!

    बीबीसी हिंदी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा.

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