कांग्रेस पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेस में आरोप लगाया कि आम लोग अपना इनकम टैक्स भर देते हैं, लेकिन "पांच करोड़ से ज़्यादा कमाने वाले बीजेपी की 'सी' टीम के लोग इनकम टैक्स नहीं भरते हैं."
कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने आरोप लगाया कि ऐसे लोग क़ानून से नहीं डरते हैं, क्योंकि उन्हें बीजेपी की सुरक्षा मिली हुई है.
शक्तिसिंह गोहिल ने कहा, "जिनकी आमदनी पांच करोड़ से ज़्यादा है, उन्हें पुराने टैक्स सिस्टम के मुताबिक़ 30% टैक्स देना होता. इस पर सरचार्ज और सेस लगा दें तो यह 42.7% टैक्स होता है. यानी अगर किसी की आमदनी 10 करोड़ हो तो उसे 4 करोड़ 27 लाख रुपये टैक्स भरना होता."
उन्होंने इस मामले में भारत की रजिस्टर्ड अनरिकग्नाइज़ पॉलिटिकल पार्टी (आरयूपीपी) का ज़िक्र किया और कहा कि उन्हें चंदा देने के नाम पर इनकम टैक्स में छूट हासिल की जाती है.
शक्तिसिंह गोहिल ने खोजी पत्रकारों की रिपोर्ट का ज़िक्र किया और कहा कि "मैं कुछ खोजी पत्रकारों का धन्यवाद करता हूं और एडीआर का जिन्होंने इस फ़र्ज़ीवाड़े को लोगों के सामने रखा."
इससे पहले बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने अपनी एक पड़ताल में भारत के उन काग़ज़ी राजनीतिक दलों के बारे बताया था, जिन्हें सैकड़ों करोड़ का चंदा मिलता है, लेकिन उन्हें चुनावी मैदान में कम ही देखा जाता है.
आरयूपीपी पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की रिपोर्ट पर विपक्ष के कई राजनीति दलों और नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है.
शक्तिसिंह गोहिल ने कहा, "भारत में 3260 आरयूपीपी हैं और अगर इनकम टैक्स के नियम '80 जीजीसी' के तहत कोई, किसी राजनीतिक दल को चंदा देता है तो उसे कोई इनकम टैक्स नहीं भरना होता है. इसी तरह अगर कोई कंपनी '80 जीजीबी' के तहत पॉलिटिकल पार्टी को डोनेशन दे देगी तो उसे कोई टैक्स नहीं देना होगा."
उन्होंने कहा, "आरयूपीपी ने अंदाज़न 10 हज़ार करोड़ का डोनेशन लिया. क़ानून सख़्त है और उसके लिए स्पष्ट लिखा है कि अगर कोई ऐसा फ़र्ज़ीवाड़ा करता है तो कार्रवाई करनी चाहिए."
शक्तिसिंह गोहिल ने इनकम टैक्स क़ानूनों का ज़िक्र करते हुए कहा, "अगर कोई ऐसा फ़र्ज़ीवाड़ा करता है तो उसे टैक्स में मिली छूट ख़त्म की जा सकती है, ब्याज समेत टैक्स चुकाना पड़ सकता है या 200% तक टैक्स चुकाना पड़ सकता है."
शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि ऐसे मामले में आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है.
उन्होंने बीजेपी पर ऐसे लोगों को संरक्षण देने का आरोप लगाया और कहा कि इसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट भी शामिल हैं.
उन्होंने इस मामले में चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाए और कहा कि पुराने इलेक्शन कमीश्नर पर कभी उंगली नहीं उठी थी.