कोरोना वायरस: भारत के ग्रामीण इलाकों की हालत ख़राब
तमाम सरकारी दावों के बावजूद भारत के ग्रामीण इलाकों की हालत कोरोना से बेहद ख़राब.
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दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब में दूसरी तिमाही में तेल की बिक्री से आने वाले राजस्व में 45 फ़ीसद की कमी देखी गई.
तमाम सरकारी दावों के बावजूद भारत के ग्रामीण इलाकों की हालत कोरोना से बेहद ख़राब.
पिछले 24 घंटे के दौरान भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के 47,704 नए मामले सामने आए हैं और 654 लोगों की मौत हो गई है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, इसी के साथ देश में अबतक कोविड पॉज़िटिव मामलों की संख्या 14 लाख 83 हज़ार 157 हो गई है. जिनमें एक्टिव केस की संख्या 4 लाख 96 हज़ार 988 है और 9,52,744 लोग ठीक हो चुके हैं. वहीं इस बीमारी से अबतक कुल 33,425 लोगों की मौत हो चुकी है.
आईसीएमआर के मुताबिक़, 27 जुलाई सोमवार को 5 लाख 28 हज़ार 82 सैंपल टेस्ट किए गए थे. 27 जुलाई तक देश भर में कुल 1 करोड़ 73 लाख 34 हज़ार 885 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं.
स्पेन के प्रधानमंत्री ने कहा है कि स्पेन से ब्रिटेन पहुंचने वाले सभी लोगों के लिए दो हफ़्ते का क्वारंटीन अनिवार्य करना "अन्यायपूर्ण" निर्णय है.
पेद्रो सांचेज़ ने कहा कि स्पेन के ज़्यादातर इलाक़ों में पर्यटक ब्रिटेन से ज़्यादा सुरक्षित रहेंगे और ब्रिटेन को अपने इस कदम पर दोबारा विचार करना चाहिए.
सोमवार को ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने स्पेन के लिए जारी ट्रेवल एडवाइज़ में ये भी जोड़ दिया कि नागरिक बहुत ज़रूरी होने पर ही स्पेन जाएं. ब्रिटेन की विपक्षी लेबर पार्टी ने भी सरकार की ओर से अचानक लगाए गए इन प्रतिबंधों की आलोचना की है.
लेकिन ब्रिटेन की सरकार का कहना है कि इन क्वारंटीन नियमों में बदलाव की उसकी कोई योजना नहीं है. प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के आधिकारिक प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि “महामारी के दौरान किसी भी तरह की यात्रा रिस्क-फ्री नहीं है.”
स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ का कहना है कि इन मुद्दों पर ब्रिटेन से बातचीत जारी है. उन्होंने टीवी पर एक इंटरव्यू के दौरान उम्मीद जताई कि ब्रिटेन सरकार अपना फ़ैसला बदलेगी.
उन्होंने कहा कि पूरे देश के इंफेक्शन रेट को आंकने में ब्रिटेन ने “ग़लती” की है. स्पेन के प्रधानमंत्री ने कहा कि 64.5% नए मामले सिर्फ दो क्षेत्रों में हैं “और बाक़ी ज़्यादातर स्पेन में कोविड-19 के मामलों की संख्या ब्रिटेन से कहीं कम है.”
डोनल्ड ट्रंप और उनके डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंदी जो बाइडन के बीच पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट 29 सिंतबर को ओहायो के क्लीवलैंड में होगी.
पहले ये इंडियाना के नोट्रे डेम विश्वविद्यालय में होने वाली थी. लेकिन कोरोना वायरस से जुड़ी चिंताओं की वजह से डिबेट की जगह को बदल दिया गया. अब इस डिबेट को केस वेस्टर्न रिज़र्व यूनिवर्सिटी और क्लीवलैंड क्लिनिक मिलकर करवाएंगे.
प्रेसिडेंशियल डिबेट से संबंधित अधिकारी ने बताया कि अब ये डिबेट वेस्टर्न रिज़र्व यूनिवर्सिटी के हेल्थ एजुकेशन कैंपस में होगी.
तीन नवंबर को होने वाले चुनाव से पहले ट्रंप और बाइडन के बीच कुल तीन डिबेट होगी. दूसरी प्रेसिडेंशियल डिबेट मियामी में होगी. जो पहले मिशिगन विश्वविद्यालय में होने वाली थी. वहीं तीसरी डिबेट नाश्विल में 22 अक्टूबर को होगी.
वॉशिंगटन पोस्ट-एबीसी न्यूज़ के एक पोल के मुताबिक़, बाइडन इस वक़्त 15 प्रतिशत प्वाइंट के साथ आगे चल रहे हैं. वहीं राष्ट्रपति की नेशनल अप्रूवल रेटिंग एक साल में गिरी हैं. इसकी वजह कोरोना वायरस और जॉर्ज फ्लॉयड की मौत को बताया जाता है.
अमरीका में रिपब्लिकन सांसदों ने प्रस्ताव रखा है कि कोरोना वायरस से हुए आर्थिक नुक़सान की भरपाई के लिए अतिरिक्त एक खरब डॉलर खर्च किए जाएं.
इस रिकवरी योजना में स्कूलों को 100 अरब डॉलर और अधिकांश अमरीकियों को 1,200 डॉलर तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है.
हालांकि इसमें हर हफ़्ते दिए जाने वाले 600 डॉलर के बेरोज़गारी भत्ते को फिलहाल कम करके 200 डॉलर करने का प्रस्ताव है. इस प्रस्ताव पर अब डेमोक्रेट्स के साथ चर्चा होगी जिन्होंने इसे “अपर्याप्त” बताया है.
अमरीका पहले ही अपने लोगों को राहत देने के लिए 2.4 खरब डॉलर से ज़्यादा खर्च कर चुका है. कारोबारों को संभालने के लिए और व्यक्तिगत घरों में अरबों डॉलर पहुंचाए गए हैं. लेकिन अर्थशास्त्री मानते हैं कि अभी और राहत की ज़रूरत होगी.
बेरोज़गारी भत्ते में कटौती इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे मिल रहे फायदे की वजह से लोग काम पर नहीं लौट रहे हैं. दरअसल ये भत्ता लेने वाले दो तिहाई लोग ऐसे हैं, जिन्हें काम करके जितने पैसे नहीं मिलते थे, उससे ज़्यादा बेरोज़गारी के चलते मिल रहे हैं.
गूगल ने कहा है कि उनके कर्मचारी अगले साल जून तक घर से ही काम करेंगे. इससे पहले कंपनी ने कहा था कि उनके कर्मचारी इस साल के अंत तक दफ़्तर लौटने लगेंगे.
लेकिन अब कंपनी के प्रमुख सुंदर पिचाई ने एक ईमेल में कहा है कि उनके ऐसे स्टाफ़ जिन्हें दफ़्तर आना ज़रूरी नहीं, वो अगले साल के मध्य तक घर से ही काम कर सकते हैं.
दुनिया भर में गूगल के 2,000 कर्मचारी हैं. गूगल ने मई में कहा था कि वो जून तक अलग-अलग जगहों पर अपने ऑफ़िस दोबारा खोलना शुरू करेगा.
लेकिन उसने साथ ही कहा था कि कंपनी के ज्यादातर कर्मचारियों के इस साल के अंत तक घर से ही काम करने की संभावना है.
कोरोना वायरस को लेकर दुनिया भर की अहम सुर्ख़ियां इस तरह हैं-
कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के क्रम में सोमवार को दुनिया का सबसे बड़ा ट्रायल शुरू हुआ. इस ट्रायल में 30 हज़ार लोगों ने हिस्सा ले रहे हैं. दुनिया भर में कोरोना वैक्सीन की खोज के लिए जो कोशिश हो रही है, उनमें जो वैक्सीन आख़िरी फ़ेज़ में हैं, उसमें अमरीका भी शामिल है.
हालांकि अभी तक इसकी कोई गारंटी नहीं है कि नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ एंड मॉडर्ना इंक के ज़रिए बनाई गई ये वैक्सीन सचमुच में कोरोना से बचा लेगी. वॉलंटियरों को ये भी नहीं बताया जाएगा कि उनको वास्तविक वैक्सीन दी गई है या फिर नक़ली वैक्सीन से टेस्ट किया गया है.
दो ख़ुराक दिए जाने के बाद वैज्ञानिक इस बात का बहुत नज़दीक से अध्ययन करेंगे कि अपने रोज़मर्रा के काम करने के दौरान कौन सा ग्रुप ज़्यादा संक्रमित होता है,
दुनिया भर में कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या 6.50 लाख के पार पहुंच गई है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक दुनिया भर में मरने वालों का आंकड़ा साढ़े छह लाख को पार कर गया है, वहीं जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के आंकड़ों से भी इसकी पुष्टि होती है.
दुनिया भर में कोरोना संक्रमण के कुल मामले एक करोड़ 63 लाख से ज़्यादा हो रहे हैं. अमरीका सबसे प्रभावित देश है जहां कोरोना संक्रमितों की संख्या 42 लाख 59 हज़ार हो चुकी है जबकि वहां अब तक एक लाख 47 हज़ार लोगों की मौत हुई है.
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