चीन की वैक्सीन के इस्तेमाल को WHO ने दी मंज़ूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चीन की कंपनी सिनोफ़ार्म की बनाई गई कोविड वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी है.

लाइव कवरेज

  1. पीएम मोदी से फ़ोन पर बात को लेकर हेमंत सोरेन की टिप्पणी चर्चा में

    मोदी

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई फ़ोन पर बातचीत को लेकर किया गया एक ट्वीट चर्चा में है.

    प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड-19 की स्थिति को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से गुरुवार को फ़ोन पर बात की.

    इस बातचीत के बाद सोरेन ने प्रधानमंत्री पर तंज कंसते हुए एक ट्वीट किया,‘’आज आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने फोन किया. उन्होंने सिर्फ़ अपने मन की बात की. बेहतर होता यदि वह काम की बात करते और काम की बात सुनते.‘

    दरअसल, 'मन की बात' प्रधानमंत्री मोदी का एक रेडियो कार्यक्रम है जिसमें प्रधानमंत्री अपनी बात जनता के सामने रखते हैं.

    समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाला से बताया है कि हेमंत सोरेन को इस फ़ोन कॉल के दौरान अपनी बात रखने का मौक़ा नहीं मिला जिससे वह नाराज़ हो गए.

    झारखंड कोविड से सबसे ज़्यादा प्रभावित 10 राज्यों में से एक है. गुरुवार को झारखंड में कोरोना के लगभग 7 हज़ार नए केस सामने आए हैं और 24 घंटों में 133 लोगों की मौत हुई है.

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  2. इमरान ख़ान बोले- अगर हम क्षमता नहीं बढ़ाते तो हमारी हालत भी हिन्दुस्तान जैसी होती

    पाकिस्तान

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने गुरुवार को कहा कि अगर उनकी सरकार सतर्क नहीं रहती तो पाकिस्तान की हालत भी हिन्दुस्तान की तरह होती.

    इमरान ख़ान ने ईद के पहले लोगों को आगाह करते हुए कहा, ''मैं सबसे कहूंगा कि आप मास्क ज़रूर पहनें. जो हालात आजकल हिन्दुस्तान में हैं, दिल्ली में और उनके बड़े शहरों में, अस्पतालों का जो हाल है, ऑक्सीजन नहीं मिल रही और बाहर सड़कों पर लोग कोरोना से मर रहे हैं. इसलिए मैं अपनी कौम से कहूंगा कि कोरोना की पहले की दो लहर में अल्लाह ने बाक़ी दुनिया की तुलना में हम पर करम किया.''

    ''अब हम तीसरी बड़ी ख़तरनाक लहर हैं. अगर हुकूमत अपनी क्षमता दोगुनी ना करती तो आज हमारे भी वही हालात होते जो हिन्दुस्तान में नज़र आ रहे हैं. आने वाले दो हफ़्ते हमारे लिए बहुत ही अहम हैं. हमें कोरोना के मामले नीचे लाने हैं. इसलिए मैं सबसे कहूंगा कि मास्क ज़रूर पहनें.''

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  3. कोरोना: भारत में दूसरी लहर क्या अब कमज़ोर पड़ चुकी है?

  4. ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना का कहर जारी, पिछले 24 घंटों में 4 लाख 14 हज़ार लोग संक्रमित, 3,915 मौतें

    कोरोना

    भारत में कोरोना का कहर जारी है. पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 4,14,188 नए मामले दर्ज किए गए हैं. इसके साथ ही भारत में कोरोना के सक्रिय मामले बढ़कर 36,45,164 हो गए हैं.

    पिछले 24 घंटों में 3,915 लोगों की कोरोना से मौत हुई है. अब भी भारत के अस्पताल कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण नाकाफी साबित हो रहे हैं और अदालतें सरकारों को हर दिन फटकार लगा रही हैं.

  5. भारत ने माना भयावह होती दूसरी लहर के पीछे लोकल म्यूटेंट

    वायरस

    भारत ने कहा है कि मार्च महीने में पाए जाने वाला कोरोना वायरस का नया वेरिएंट देश में भयावह होती कोरोना की दूसरी लहर के पीछे बड़ा कारण हो सकता है.

    कई राज्य जहां कोरोना के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, वहां के सैंपल में डबल म्यूटेंट या B.1.617 वेरिएंट पाया गया है.

    ये बात नेशनल सेंटर फॉर डिज़िज़ कंट्रोल के एक अधिकारी ने कही है. हालांकि उनका कहना है कि अब तक बढ़ते केस और नए म्यूटेंट के सह-संबंध को ‘पूरी तरह स्थापित नहीं’ किया जा सका है.

    दरअसल, डबल म्यूटेंट वो होता है जब एक ही वायरस में दो म्यूटेंट शामिल हो जाते हैं.

    बुधवार को भारत में 412,000 नए केस सामने आए हैं और 24 घंटों में 3,980 लोगों की मौत हुई है.

    सरकार के वरिष्ठ वैज्ञानिक सलाहकार ने भी चेताया है कि देश में तीसरी लहर आनी तय है.

    स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रेस कॉन्फ्रेंस में के.विजयराघवन ने माना कि जानकार इस का अंदाज़ा नहीं लगा पाए कि दूसरी लहर इतनी ‘प्रभावी’ होगी और इतने ज़्यादा लोगों को संक्रमित कर देगी.

    इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘’जिस तरह का संक्रमण फैल चुका है, उससे साफ़ है कि देश में आने वाली तीसरी लहर को कोई नहीं रोक सकता. हालांकि ये कब आएगी इसका कोई अंदाज़ा नहीं है लेकिन हमें इसके लिए तैयार रहना होगा. ’’

    मौजूदा वक़्त में भारत में कोरोना ने भयंकर हालात पैदा कर दिए हैं. स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, अस्पतालों में बेड नहीं है, जिन्हें बेड मिल गए हैं वो ऑक्सीज़न की कमी से जूझ रहे हैं.

    लगभग हर दिन राजधानी में कोई ना कोई अस्पताल ऑक्सीज़न के लिए एसओएस कॉल जारी करते हैं.

    विपक्ष सहित वायरोलॉजिस्ट देश में लॉकडाउन लगाने की सलाह दे रहे हैं.

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    डबल म्यूटेंट वेरिएंट कहां मिला?

    आठ राज्यों से लिए गए लगभग13,000 सैंपल सीक्वेंस करने पर 3,500 से ज्यादा सैंपल में परेशान करने वाले म्यूटेंट वायरस पाए गए हैं जिसमे B.1.617 भी शामिल है.

    B.1.617 वेरिएंट गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के सैंपल में पाए गए हैं. इन सभी राज्यों में संक्रमण बढ़ रहे हैं.

    बीते एक महीने से भारत इस नए वेरिएंट और बढ़ते केस के बीच किसी भी संबंध को मानने इंकार करता रहा है.

    हालांकि अब केंद्र सरकार ये मान रही है कि भारतीय वेरिएंट बढ़ते केस के पीछे की संभव वजह हैं लेकिन फिर भी इसे ‘पूरी तरह स्थापित’ ना किए जाने की भी बात की जा रही है.

    कुछ दिनों पहले बीबीसी से बात करते हुए वायरोलॉजिस्ट शाहीद जमील ने बताया था कि भारत कुल सेंपल का केवल 1% सेंपल सीक्वेंस कर रहा है, वहीं ब्रिटेन अपने पीक समय में 5-6% सैंपल सीक्वेंस करता था.

    हालांकि वे ये भी मानते हैं कि दोनों देशों की क्षमताओं में काफ़ी अंतर है तो रातोंरात इसे कम नहीं किया जा सकता.

    कोरोना
  6. ऑस्ट्रेलिया अपने नागरिकों को भारत से निकालेगा, घिरने पर लिया फ़ैसला

  7. भारत के जिस प्रस्ताव का अमेरिका ने किया समर्थन पर जर्मनी उतरा विरोध में

    जर्मनी

    जर्मनी ने अमेरिका के कोविड-19 की वैक्सीन का पेटेंट छोड़ने के प्रस्ताव का विरोध किया है. जर्मनी का कहना है कि इससे वैक्सीन के उत्पादन में कोई रूकावट नहीं आएगी.

    जर्मनी की सरकार का कहना है कि ‘’बौद्धिक संपदा की सुरक्षा किसी भी नए विचार का स्रोत होती है इसलिए इसे बनाए रखना चाहिए.‘’

    इससे पहले यूरोपीय संघ ने कहा था कि वह इस प्रस्ताव पर बात करने के लिए तैयार है और संघ के कुछ देशों ने प्रस्ताव का समर्थन भी किया था.

    इस योजना का समर्थन करने वालों की ओर से कहा जा रहा है कि पेटेंट हट जाने से कई निर्माता कंपनियां वैक्सीन बना सकेंगी. इससे ग़रीब देशों में वैक्सीन की पहुँच आसान और सुगम होगी.

    लेकिन इस प्रस्ताव का विरोध करने वाले, जिनमें कुछ दवा कंपनियां भी शामिल हैं, उनका कहना है कि इससे कोई ज़्यादा फर्क नहीं पड़ेगा.

    भारत का दिया गया आइडिया

    इस विचार का प्रस्ताव सबसे पहले भारत और दक्षिण अफ्रीका की ओर से रखा गया था जो विश्व व्यापार संगठन के 60 देशों के समूह का नेतृत्व करते हैं. ये समूह चाहता है कि वैक्सीन को बौद्धिक संपदा के पेटेंट के दायरे से अस्थायी रूप से हटा दिया जाए.

    इससे पहले जब ये प्रस्ताव पेश किया गया था उस वक्त अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने इसका विरोध किया था साथ ही ब्रिटेन और यूरोपीय संघ भी इसके विरोध में खड़े थे. लेकिन इस बार जब अमेरिका ने इस प्रस्ताव को समर्थन दे दिया तो भारत की इस मांग को और बल मिला.

    वीडियो कैप्शन, COVER STORY: क्या अमीर देशों की वजह से ग़रीब देशों को नहीं मिल रही वैक्सीन?

    विश्व व्यापार संगठन की प्रमुख एनगोज़ी उकान्ज़ो इकेला ने बीबीसी के न्यूज़आर कार्यक्रम के दौरान कहा कि वह अमेरिका के पेटेंट हटाने के समर्थन का स्वागत करती हैं. सदस्यों को बातचीत करके एक व्यवाहारिक समझौते तक पहुँचना चाहिए क्योंकि वर्तमान समय में वैक्सीन के निर्माण को लेकर काफ़ी असामनता है, जो की ‘ठीक नहीं’ है.

    वह मानती हैं कि वैक्सीन बनाने में कच्चे माल और तजुर्बे की कमी सबसे बड़ी परेशानी है लेकिन वह कहती हैं कि अर्थव्यस्था को बनाए रखने के लिए शुरुआत कहीं से तो करनी होगी.

    रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने पेटेंट छोड़ने के विचार का समर्थन किया है.

    ब्रिटेन की सरकार का कहना है कि वह‘विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्यों के साथ इस मुद्दे को सुलझाने की दिशा में काम कर रही है.’साथ ही वह‘अमेरिका और अन्य सदस्यों के साथ मिल कर कोविड की वैक्सीन के प्रोडक्शन को बढ़ाने को लेकर चर्चा कर रहा है.’.

    वहीं इस बीच जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री येन स्पान ने कहा है कि देश में एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन पर लगाई गई रोक के फ़ैसले को वापस लिया जा रहा है,अब इस वैक्सीन को हर वयस्क शख्स ले सकता है. इससे पहले कुछ लोगों में ख़ून का थक्का जमने की शिकायत के बीच 60 साल की उम्र से ऊपर के लोगों के सेवन के लिए ये वैक्सीन रोक दी गई थी.

    Vaccines

    क्यों इसे लेकर इतनी बहस हो रही है?

    कई विकासशील देशों का का मानना है कि पेटेंट और अन्य बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के नियमों से वैक्सीन और कोरोना के लिए ज़रूरी दवाओं के निर्माण में बाधा पैदा होती है.

    वैक्सीन से पेटेंट हटने पर ग़रीब देशों के लिए इसका निर्माण सस्ता हो पाएगा जहाँ वैक्सीन की काफ़ी कमी है.

    लेकिन इसका विरोध करने वाली,खास कर फ़ार्मा कंपनियों का मानना है कि इससे समस्या नहीं सुलझेगी.

    इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ फ़ार्मास्यूटिकल मैन्युफ़ैक्चर्स असोसिएशन के प्रमुख थॉमस कुएनी ने बीबीसी से कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी चिंता ये है कि‘पेटेंट हट जाने से वैक्सीन की सुरक्षा और गुणवत्ता पर संकट आ सकता है.’

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