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नेपाल बाढ़ की वजहों को लेकर उठे सवाल, अब तक क्या-क्या पता है?
नेपाल-तिब्बत सीमा पर बड़े पैमाने पर भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. अब तक 165 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की ख़बर है और सैकड़ों लापता हैं.
तलाश और बचाव अभियान जारी है.
चीनी सरकारी मीडिया ने कहा है कि बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं. वहीं, नेपाली अधिकारियों ने "बड़े पैमाने पर नुक़सान" की आशंका जताई है.
मारे गए या लापता लोगों की संख्या अभी साफ़ नहीं है. लेकिन मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है. अब तक हमें ये जानकारी मिली है.
जानलेवा भूस्खलन की वजह क्या थी?
नेपाल के विदेश मंत्री ने शुरुआत में कहा था कि भूस्खलन से कुछ समय पहले तिब्बत-नेपाल सीमा पर भूकंप की ख़बर मिली थी. इससे संकेत मिला कि भूकंप की वजह से शायद ये आपदा आई.
लेकिन अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के विश्लेषण में कहा गया है कि वहां कोई भूकंप नहीं आया था. इससे सवाल उठ रहे हैं कि भूस्खलन की वजह क्या थी.
बड़ी मात्रा में मिट्टी और मलबा उत्तरी नेपाल के कस्बों की ओर बह गया. इनमें पर्वतारोहियों और तीर्थयात्रियों के बीच लोकप्रिय इलाक़े भी शामिल हैं. यह सीमा नेपाल की राजधानी काठमांडू से करीब 64 किलोमीटर उत्तर में है.
वीडियो में दिख रहा है कि मिट्टी और चट्टानों की एक दीवार इमारतों, सड़कों और गाड़ियों को बहा ले जा रही है. लोग नुवाकोट इलाक़े में तेज़ी से आगे बढ़ रहे मलबे से बचकर भागते दिख रहे हैं.
भोते कोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारे भीषण बाढ़ आई है.
सीमा के तिब्बती हिस्से के गांवों में भी मौतों की ख़बर है.
नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक़, लापता विदेशी नागरिकों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक शामिल हैं.
'मेरी आंखों के सामने परिवार के लोग बह गए'
बीबीसी ने नेपाल के नुवाकोट ज़िले में बचे लोगों से बात की है. यह इलाक़ा बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ों में से एक है.
नुवाकोट की कल्पना मल्ला कहती हैं, "मेरे परिवार के लोग मेरी आंखों के सामने बाढ़ में बह गए."
वह कहती हैं कि उनके पिता, मां, बहन और उनकी बहन के बच्चे, सभी बाढ़ के पानी में बह गए.
वह कहती हैं, "वे बाढ़ से बच नहीं सके. कोई मौक़ा ही नहीं था. इस बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया. लेकिन मैं और मेरा बेटा एक घर की छत पर चढ़ गए और बच गए. हमें ख़ुद समझ नहीं आया कि हम कैसे बच गए."
उनके बेटे सुगम मल्ला कहते हैं कि उन्होंने अपनी मां का हाथ खींचकर उन्हें बचाया.
वह कहते हैं, "इससे पहले, मैंने अपना फ़ोन अपनी बहन को दे दिया था, ताकि वह सुरक्षित रहे और मदद के लिए संपर्क कर सके. लेकिन अब उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है. मोबाइल बंद है. मुझे डर है कि वह भी बाढ़ में बह गई होगी."
एक अन्य महिला, गोमा पंडित कहती हैं कि उनकी भैंसें और बाकी सभी मवेशी बह गए हैं.
"मेरी खेती की ज़मीन भी बह गई. सरसों के बीजों की 10 बोरियां, कई टन मक्का और धान, सब चला गया. कुछ भी नहीं बचा."
'घर ढह गया है और बहन लापता है'
नेपाल के रसुवा ज़िले के रसुवा स्याब्रु बेन्सी गांव में रहने वाले सोनम दोरजी विदेशी पर्यटकों के लिए ट्रेकिंग गाइड हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया कि स्थानीय समय के मुताबिक़ सुबह 9 बजे उनके गांव में बाढ़ आई.
सोनम इससे एक घंटे पहले ही एक तय यात्रा के लिए काठमांडू जाने के लिए निकले थे.
लेकिन उनकी बहन डेचन तामांग लापता हैं. उनके पति और परिवार के कई अन्य सदस्य भी लापता हैं.
सोनम कहते हैं कि गांव से निकलते समय उन्हें बाढ़ की आवाज़ें सुनाई दी थीं.
वह कहते हैं, "ऐसा लग रहा था जैसे भूकंप आया हो. मेरा घर ढह गया है... मैंने उसकी एक तस्वीर देखी है."
वह बाढ़ को "अचानक आई और तबाही मचाने वाली" बताते हैं.
"अब कई लोग ऐसे हैं, जिनके पास रहने के लिए घर नहीं है. उन्हें तुरंत बचाने और सुरक्षित जगह पहुंचाने की ज़रूरत है. उन्हें खाना, अस्थायी ठिकाना और मेडिकल मदद भी चाहिए."
वह प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी बहन ज़िंदा मिल जाए. वह कहते हैं, "10 फ़ीसदी उम्मीद है. हम उम्मीद कर रहे हैं."
सरकारें क्या कर रही हैं?
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि "पूरा देश स्तब्ध और बेहद परेशान है". उन्होंने कहा कि अधिकारी राहत और बचाव अभियान में चीन के साथ मिलकर काम करेंगे.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत और तलाशी अभियान को पूरी ताक़त से चलाने की अपील की. उन्होंने आगे ऐसी घटनाओं के असर को रोकने के लिए निगरानी और पहले से चेतावनी देने वाली व्यवस्थाओं को मज़बूत करने का वादा किया.
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार "नेपाल को हर तरह की मानवीय मदद देने के लिए तैयार है".
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि ब्रिटिश सरकार नेपाल में मौजूद ब्रिटिश नागरिकों की मदद के लिए "हर संभव कोशिश" करेगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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