बिहार : मोकामा के विधायक अनंत सिंह को जेडी (यू) ने पार्टी से निकाला, क्या है पूरा मामला

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बिहार में मोकामा के विधायक अनंत सिंह को नीतीश कुमार की पार्टी जेडी (यू) ने पार्टी से निष्कासित कर दिया है. उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए शनिवार को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया गया.

बीबीसी संवाददाता सीटू तिवारी ने बताया कि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को भी पार्टी से बाहर कर दिया है. साथ ही अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा भी विधानसभा अध्यक्ष से की है.

जेडी (यू) ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब एक दिन पहले ही बिहार की विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव संपन्न हुआ, जिसमें वह ग्रेजुएट निर्वाचक क्षेत्र भी शामिल था, जिसके लिए उन्होंने विरोधी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार किया था.

पटना स्नातक सीट पर जेडी (यू) ने नीरज कुमार को प्रत्याशी बनाया था, जबकि इस सीट पर जेडी (यू) के अनंत सिंह ने जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के लिए प्रचार किया था. यहां तक कि वे उनकी नामांकन यात्रा में भी शामिल हुए.

बता दें कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता रही है.

साल 2015 में जब नीतीश कुमार ने अनंत सिंह को टिकट नहीं दिया था और नीरज सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया, तब से दोनों के बीच कटुता है.

पटना की मोकामा विधानसभा सीट पर निर्दलीय चुनाव लड़कर तब अनंत सिंह ने नीरज कुमार को हरा दिया था.

वहां से अनंत सिंह का नाम इस विधानसभा सीट से जुड़ गया. बीते विधानसभा चुनाव में हत्या के आरोप के चलते जेल के अंदर होने के बाद भी उन्होंने जीत दर्ज की.

शुरूआत में अनंत सिंह के नीतीश से रिश्ते खटास भरे ज़रूर रहे. नीतीश के सत्ता में आने के बाद पहली बार 2015 में ही पुटुस हत्याकांड में अनंत सिंह जेल गए.

2017 में जेल से लौटने के बाद उन्होंने जेडी (यू) से नाता तोड़ लिया और लालू यादव की राजद से नज़दीकी बढ़ाई.

साल 2024 में पटना हाईकोर्ट के आदेश पर एक मामले में रिहा होने के बाद वे दोबारा साल 2025 में जेडी (यू) में शामिल हुए थे.

हाल में नीरज कुमार के साथ उनका झगड़ा सुलझाने का जिम्मा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को दिया गया था.

मगर 23 अक्तूबर को मीडिया के एक सवाल पर उन्होंने ललन सिंह को पहचानने से इनकार कर दिया.

स्थानीय मीडिया ने अनंत सिंह से पूछा- ललन सिंह किसके साथ हैं.

इसपर अनंत सिंह ने कहा, "कौन ललन सिंह की बात कर रहे हैं ? बिहार में 100 ललन सिंह हैं. हम उनको नहीं जानते हैं."

उन्होंने आगे कहा, "मैं नीतीश कुमार और पार्टी को अपना भगवान मानता हूं. हम कहीं भी रहेंगे नीतीश जी को मानते रहेंगे. सरकार के विरोध में चल रहे हैं, पुलिस कहीं-कहीं जुर्माना किया है. उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा."

जेडी (यू) अनंत सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी माना जाता था, मगर हालिया घटनाओं के बाद उनके ऊपर कार्रवाइयों की संभावना जताई जा रही थी.

'शीर्ष नेतृत्व के ख़िलाफ़ अपमानजनक भाषा'

जेडी (यू) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने शनिवार को अनंत सिंह के पार्टी निष्कासन के संबंध में कार्यालय आदेश जारी किया.

आदेश के अनुसार, पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने, शीर्ष नेतृत्व के प्रति अमर्यादित एवं अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और विधान परिषद चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के विरुद्ध काम करने के कारण अनंत सिंह पर कार्रवाई की गई है.

पार्टी का आरोप है कि अनंत सिंह ने जेडी (यू) प्रत्याशी के विरोध में प्रचार किया और दूसरे दल के प्रत्याशी का समर्थन किया.

इसी आधार पर उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए उन्हें छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है.

अनंत सिंह के पार्टी और जनसुराज से बनते-बिगड़ते रिश्ते

प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी की जिस स्नातक सीट के प्रत्याशी के लिए अनंत सिंह ने प्रचार करके पार्टी से बगावत कर ली, पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों के दौरान उसी जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी के समर्थक की हत्या के आरोप में उन्हें जेल भेजा गया था.

तब दुलारचंद यादव जनसुराज के पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे. 30 अक्तूबर की दोपहर तकरीबन तीन बजे तारतर गांव और बसावनचक नाम की जगह के बीच जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह के काफ़िले और पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों के बीच झड़प हुई. मौके पर दुलार सिंह की मौत हो गई थी.

अनंत सिंह ने जेल से ही चुनाव लड़ा, उनकी गैर मौजूदगी में मोकामा सीट पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और अब के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रचार किया था.

हालांकि हाल के दिनों में ललन सिंह के साथ उनके रिश्ते बिगड़ गए हैं. साथ ही वे सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए की वर्तमान सरकार के ख़िलाफ़ भी बयान देते रहे हैं.

वे कई बार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं.

इस साल मार्च महीने में उन्हें नियमित जमानत मिल गई थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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