मनीषा भानवाला ने रचा इतिहास, भारत को मिली पहली वर्ल्ड चैंपियन महिला रेसलर

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कज़ाख़स्तान के अस्ताना में शुक्रवार को मनीषा भानवाला ने इतिहास रच दिया. वह वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय महिला बन गईं.

29 वर्षीय मनीषा ने 59 किलोग्राम भार वर्ग के रोमांचक फ़ाइनल मुक़ाबले में शानदार वापसी करते हुए अमेरिका की अबीगेल नेट को 8-6 से हराया.

मनीषा ने गैर-ओलंपिक भार वर्ग में अपने अभियान की शुरुआत प्री-क्वार्टर फाइनल में कनाडा की लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को 'विक्ट्री बाय फॉल' के जरिए हराकर की.

क्वार्टर फ़ाइनल में भारतीय पहलवान ने मंगोलिया की बोलोरतुइया खुरेलखू को 6-0 से शिकस्त दी थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ इसके बाद सेमीफ़ाइनल में हरियाणा की इस पहलवान ने स्थानीय खिलाड़ी अल्टिन शगायेवा को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराकर फ़ाइनल में जगह बनाई.

प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाली मनीषा दूसरी भारतीय पहलवान हैं. उनसे पहले सुशील कुमार ने 2010 में मॉस्को में 66 किलोग्राम भार वर्ग में यह उपलब्धि हासिल की थी.

मौजूदा चैंपियनशिप में मनीषा महिला कुश्ती में पदक जीतने वाली चौथी भारतीय हैं. उनसे पहले नीलम सिरोही (रजत, 50 किग्रा), काजल ढोचक (रजत, 76 किग्रा) और तनु शर्मा (कांस्य, 72 किग्रा) पदक जीत चुकी हैं.

मनीषा की शानदार वापसी

शुरुआत में प्रतिद्वंद्वी पहलवान के दमदार प्रदर्शन के ख़िलाफ़ मनीषा टिकी रहीं.

मनीषा ने हार मानने के बजाय मुकाबले में वापसी करने पर पूरा दम लगाया.

दूसरे पीरियड में नए जोश और दृढ़ संकल्प के साथ मैट पर उतरीं मनीषा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबले का रुख़ पलट दिया और लगातार सात अंक हासिल किए.

जब नेट ने एक बार फिर मनीषा के पैरों पर हमला करने की कोशिश की, तो मनीषा ने फुर्ती दिखाते हुए उनके पीछे पहुंचकर टेकडाउन कर दिया.

अमेरिकी टीम ने इस फैसले को चुनौती दी. उसका तर्क था कि रेफ़री ने मुकाबले को रोकने के लिए सीटी बजा दी थी.

हालांकि, अमेरिकी टीम की चुनौती ख़ारिज हो गई और मनीषा को एक अतिरिक्त अंक मिल गया.

इसके बाद नेट को पार टेरे पोजीशन में रखा गया. मनीषा ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और गट रिंच तकनीक से अंक हासिल करते हुए स्कोर 6-6 से बराबर कर दिया.

अंक बराबर होने के बावजूद अमेरिकी पहलवान मानदंडों के आधार पर बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन अब मुकाबले पर मनीषा का नियंत्रण था.

उन्होंने एक और शानदार दांव लगाते हुए दो अंक हासिल किए और स्कोर 8-6 कर दिया.

मुकाबला खत्म होने में सिर्फ 27 सेकंड बाकी थे. इस दौरान थक चुकी नेट के ख़िलाफ़ मनीषा ने पूरी ताकत से अपना बचाव किया और अपनी बढ़त को बरकरार रखा.

जैसे ही मुकाबले का अंतिम सायरन बजा, मनीषा ने वह कर दिखाया जो अब तक कोई भारतीय महिला पहलवान नहीं कर पाई थी.

भारतीय कुश्ती को उसकी पहली महिला विश्व चैंपियन मिल गई थी. खुशी से झूमती मनीषा ने उछलकर जश्न मनाया, मैट के सामने सिर झुकाया और उसे चूम लिया.

यह मैट उनकी ज़िंदगी की सबसे यादगार उपलब्धि का गवाह बन चुका था.

पिता ने बढ़ाया था रेसलिंग में आगे

मनीषा हरियाणा के जींद जिले के सीवा गांव की रहने वाली हैं. किसान परिवार में जन्मीं मनीषा के घर में उनकी मां, बड़ी बहन और एक भाई हैं. उनके पिता का तीन साल पहले देहांत हो गया.

रोहतक के छोटू राम स्टेडियम में उनके कोच मनदीप सैनी ने बीबीसी संवाददाता शिवांगी जायसवाल को बताया कि जब मनीषा एशिया चैंपियनशिप खेलने के लिए जा रही थी, तो फ़्लाइट में चढ़ने से दो घंटे पहले उनके पिता सुरेश का देहांत हो गया था.

इस गहरे दुख के बीच भी मनीषा ने चैंपियनशिप पूरी की. उस साल उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था.

बीते आठ साल से मनीषा को प्रशिक्षण दे रहे कोच मनदीप बताते हैं कि मनीषा ने एशिया सीनियर चैंपियनशिप में अब तक तीन बार कांस्य और एक स्वर्ण पदक जीता है.

वे साल 2022 से लगातार ये चैंपियनशिप खेल रही थीं और साल 2025 में उन्होंने इसमें गोल्ड जीता.

29 साल की मनीषा साल 2012 से रोहतक आकर कुश्ती के गुर सीखने लगी थीं. कोच मनदीप के मुताबिक़, उनके पिता ने ही उन्हें रेसलिंग में आगे बढ़ाया था

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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