राजस्थान के आईएएस-आईपीएस दंपति के 40 विला-कॉटेज ख़रीदने का मामला क्या है?

    • Author, मोहर सिंह मीणा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, जयपुर से
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

राजस्थान के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर पर उदयपुर और अलवर के अनंता रिसॉर्ट में 40 विला और कॉटेज ख़रीदने के आरोप लगे हैं.

आरोप है कि उन्होंने ये संपत्तियां रिसॉर्ट चलाने वाली गोयल फ़ैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से ख़रीदीं और सरकारी पदों पर रहते हुए कंपनी को नियमों के ख़िलाफ़ लाभ पहुंचाया.

मामला मीडिया में आने के बाद देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है.

राजस्थान सरकार ने इसकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी को सौंप दी है. पति-पत्नी को उनके पदों से हटाकर 'अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर' (एपीओ) कर दिया गया है. यानी वे अब नई पोस्टिंग का इंतज़ार कर रहे हैं.

राज्य सरकार ने दो नवंबर को आदेश जारी कर गोयल फ़ैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को दिए जा रहे सरकारी रियायतों पर भी रोक लगा दी.

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे भजनलाल शर्मा सरकार के कार्यकाल में सामने आया सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का मामला बताया है. उन्होंने इसकी जांच सीबीआई और ईडी से कराने की मांग की है.

अब तक क्या कार्रवाई हुई?

इस मामले में 28 अक्तूबर को दोनों अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया. फ़िलहाल उन्हें कोई नई ज़िम्मेदारी नहीं दी गई है.

इसके बाद 30 अक्तूबर को सरकार ने आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को मंज़ूरी दी. एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 31 अक्तूबर को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी फ़िलहाल अमेरिका में हैं. हमने फ़ोन के ज़रिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई है.

बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने अनंता रिसॉर्ट उदयपुर से भी फ़ोन कर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे भी बात नहीं हो सकी.

कुल कितने विला और कॉटेज ख़रीदे गए?

एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने एक प्रेस नोट जारी कर बताया कि होटल और रिसॉर्ट चलाने वाली गोयल फ़ैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से उदयपुर और अलवर में 40 विला और कॉटेज ख़रीदे गए.

इनमें उदयपुर ज़िले के बुझड़ा स्थित एक रिसॉर्ट के 20 कॉटेज और अलवर ज़िले के अजबगढ़ स्थित एक रिसॉर्ट के 20 विला शामिल हैं.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, उदयपुर के रिसॉर्ट में सितंबर 2023 में 20 कॉटेज ख़रीदे गए थे. आरोप है कि शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर ने ये कॉटेज 10-10 लाख रुपये में ख़रीदे.

एसीबी के प्रेस नोट में बताया गया है कि अलवर के रिसॉर्ट में मार्च 2026 में 20 विला ख़रीदे गए. इनमें आठ-आठ विला पति-पत्नी के नाम पर, दो विला उनके बेटों और दो प्रशाखा माथुर के माता-पिता के नाम पर ख़रीदे गए.

एक विला की क़ीमत लगभग 15 लाख से साढ़े 16 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है.

मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि सभी 40 विला और कॉटेज कुल 6.16 करोड़ रुपये में ख़रीदे गए.

जिस कंपनी से ख़रीदा, उसी को किराए पर दिया

इस ख़रीद से जुड़ी अहम बात यह है कि जिस कंपनी से ये 40 संपत्तियां ख़रीदी गईं, बाद में कथित रूप से उसी कंपनी को लीज़ पर दे दी गईं.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, उदयपुर के हर कॉटेज का सालाना किराया चार लाख रुपये और अलवर के हर विला का सालाना किराया पांच लाख रुपये है.

दैनिक भास्कर में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार, 20 कॉटेज से सालाना 80 लाख रुपये और 20 विला से एक करोड़ रुपये किराया मिल रहा है. इस तरह इन संपत्तियों से सालाना कुल 1.80 करोड़ रुपये किराया मिलने की बात कही गई है.

संपत्तियों की ख़रीद पर खर्च हुई रक़म के मुक़ाबले एक साल का किराया क़रीब 29 फ़ीसदी बैठता है.

इसी ख़रीद और लीज़ की प्रक्रिया के कारण सवाल उठे कि कंपनी ने अपनी संपत्तियां अधिकारियों के परिवार को बेचकर दोबारा लीज़ पर क्यों लीं और इन सौदों के समय संपत्तियों की वास्तविक बाज़ार क़ीमत क्या थी?

शिखर अग्रवाल पर कंपनी को लाभ पहुंचाने के आरोप

मामला सामने आने के बाद शिखर अग्रवाल की संपत्तियों और सरकारी पदों पर रहते हुए कंपनी को कथित लाभ पहुंचाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

एसीबी ने शुरुआती जांच को लेकर जारी प्रेस नोट में दावा किया कि शिखर अग्रवाल ने अलग-अलग पदों पर रहते हुए गोयल फ़ैशन्स के निदेशकों के साथ कथित मिलीभगत की और कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया.

शिखर अग्रवाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव भी रह चुके हैं. इसी वजह से विपक्ष इस मामले को लेकर राज्य सरकार को सीधे घेर रहा है.

एसीबी के मुताबिक़, शिखर अग्रवाल पर रिसॉर्ट में निर्माण से जुड़ी शर्तों में कथित छूट दिलाने, ज़रूरी प्रमाणपत्रों की जांच किए बिना मंज़ूरी देने और कंपनी को विशेष रियायती वित्तीय पैकेज दिलाने के आरोप हैं.

एसीबी का कहना है कि इससे राज्य सरकार को आर्थिक नुक़सान होने की आशंका है.

एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के मुताबिक़, ब्यूरो ने मीडिया रिपोर्टों, उद्योग विभाग से मिली तथ्यात्मक रिपोर्ट और गोपनीय सूत्रों से मिली जानकारी को देखा था.

इसके बाद पहली नज़र में जांच योग्य तथ्य सामने आने पर प्रारंभिक रिपोर्ट दर्ज करने का फ़ैसला किया गया.

मामला सामने कैसे आया?

यह मामला दैनिक भास्कर के खोजी पत्रकार अवधेश आकोदिया की एक रिपोर्ट के बाद सार्वजनिक हुआ.

वह बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं, "40 विला के इस मामले में 14 विला शिखर अग्रवाल के नाम पर होने की जानकारी सार्वजनिक पोर्टल से मिली. इसके बाद आगे की जांच में और जानकारियां सामने आईं."

वह बताते हैं, "पोर्टल पर 14 संपत्तियों की ख़रीद और उनसे मिलने वाले सालाना किराये की जांच करने पर पता चला कि केवल शिखर अग्रवाल ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी के नाम पर भी विला और कॉटेज हैं. लेकिन उनकी पत्नी के नाम की संपत्तियों की जानकारी आईपीआर पोर्टल पर नहीं दी गई है."

अधेश आकोदिया कहते हैं, "जांच में सामने आया कि उनके बेटों और सास-ससुर के नाम पर भी कॉटेज और विला ख़रीदे गए हैं. इसी से पूरे मामले का खुलासा हुआ."

अधेश आकोदिया ने अपनी ख़बर के लिए शिखर अग्रवाल का पक्ष भी लिया था.

उनके मुताबिक़, शिखर अग्रवाल ने कहा कि इसमें कुछ ग़लत नहीं है. संपत्तियों की जानकारी आईपीआर पोर्टल पर दी गई है और आयकर रिटर्न में भी इनका ज़िक्र किया गया है.

हालांकि पत्नी के नाम की संपत्तियों की जानकारी आईपीआर पोर्टल पर नहीं होने के सवाल पर शिखर अग्रवाल ने कहा कि वह शायद कहीं ग़लत जगह अपलोड हो गई होगी.

आकोदिया कहते हैं, "ऐसा नहीं होता कि जानकारी ग़लत जगह अपलोड हो गई हो, क्योंकि यह जानकारी सीधे पोर्टल पर भरी जाती है. इसमें कुछ अपलोड नहीं होता."

उनके मुताबिक़, साल 2023 में शिखर अग्रवाल की पत्नी आईपीएस डॉ. प्रशाखा माथुर के नाम पर उदयपुर में 10 कॉटेज ख़रीदे गए थे, लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी आरटीआई में भी नहीं दी.

आकोदिया का कहना है कि जब शिखर अग्रवाल से उनके बेटों और सास-ससुर के नाम की संपत्तियों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि सभी ने अपने-अपने स्तर पर इन्हें ख़रीदा है.

अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री से क्या पूछा?

मामला सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की बीजेपी सरकार को घेरा.

उन्होंने 30 अक्तूबर को जयपुर में अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में इसे भजनलाल शर्मा सरकार के कार्यकाल में सामने आया सबसे बड़ा घोटाला बताया.

गहलोत ने कहा कि केवल अधिकारी को एपीओ करना पर्याप्त नहीं है. मामले की जांच सीबीआई और ईडी से भी कराई जानी चाहिए.

उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि संबंधित कंपनी को लाभ पहुंचाने वाले फ़ैसलों के पीछे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठकों और मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की जांच होनी चाहिए.

तीन अक्तूबर को गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर भी मुख्यमंत्री से सवाल किए.

उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री जी, सवाल अब भी वही है. अनंता रिसॉर्ट को विशेष पैकेज दिए जाने में आपकी क्या भूमिका है? और इस प्रकरण की जांच एसीबी के बजाय सीबीआई को क्यों नहीं सौंप रहे?"

गहलोत ने सरकार से मामले पर स्पष्टीकरण देने और अब तक की गई कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करने की मांग भी की.

उनका कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए केवल एसीबी की जांच काफ़ी नहीं होगी. इससे जुड़े सभी फ़ैसलों और वित्तीय लेनदेन की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.

बीजेपी विधायक बालमुकुंदाचार्य ने मीडिया से कहा कि एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि यह ज़ीरो टॉलरेंस वाली सरकार है और अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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