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तस्वीरों में- कंबोडिया में राजधानी का रुख़ कर रही महिला मज़दूर
कंबोडिया में इन दिनों निर्माण उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है. राजधानी नोमपेन्ह में चारों तरफ़ ऊंची-ऊंची इमारतें बन रही हैं.
काम की तलाश में राजधानी आने वाले प्रवासी मज़दूरों को कंपनियां बड़े पैमाने पर काम दे रही हैं.
इन मज़दूरों में से एक तिहाई महिलाएं हैं. फ़ोटोग्राफ़र चार्ल्स फॉक्स ने इन निर्माण साइटों पर जाकर इन महिला मज़दूरों की हालत जानने की कोशिश की.
इन महिला मज़दूरों में से कुछ ने नया-नया काम शुरू किया है. वहीं कुछ इस काम में माहिर हैं. इन मज़दूरों में ज़यादा संख्या उनकी है, जो 2014 में थाईलैंड सरकार की ओर से चलाए गए एक अभियान के बाद लौट कर आए हैं.
इनमें से कई महिला मज़दूर अपने परिवार और परिचितों के साथ नोमपेन्ह आई हैं.
इन महिला मज़दूरों को पुरुष मज़दूरों की तुलना में कम मज़दूरी मिलती है. इसके बाद भी ये महिला मज़दूर काफ़ी मेहनत करती हैं.
इन्हीं मज़दूरों में से एक सोक कॉर्न कहती हैं कि वो पांच साल पहले अपने पति और बेटे के साथ नोमपेन्ह आई थीं. गांवों में हमारे लिए कोई काम नहीं था. वहां हमारे लिए केवल एक काम था, साल में एक बार धान की खेती करना.
वो कहती हैं कि अगर यह आर्थिक रूप से संभव हुआ तो वो अपने गांव वापस लौट कर अपनी मां और अन्य बच्चों की देखभाल करेंगी.
हेंग सेन कहती हैं, "तीन साल पहले हुए तलाक और बीमारी ने उन्हें आर्थिक संकट में डाल दिया, मुझे अपना घर और ज़मीन बेच देने पड़े. लेकिन कर्ज को भरने के लिए यह काफी नहीं था. इसलिए मैं पैसे कमाने के लिए यहां आ गई."
वो कहती हैं कि यहां काम करने की सबसे अच्छी बात यह है कि हर हफ़्ते मज़दूरी मिल जाती है. अगर आप किसी कारखाने या होटल में काम करते हैं तो ऐसा नहीं होता है.
एक और मज़दूर केंग इव के पांच बच्चे और उनके पति निर्माण क्षेत्र में मज़दूरी करते हैं.
नूट सेरीमाम अपने पति के साथ एलिवेटर का शाफ़्ट बनाती हैं. वो बताते हैं कि उनका मैनेज़र लगातार उन्हें एक साइट से दूसरी साइट पर भेजते रहते हैं. इन साइटों पर हमें कई बार एक हफ़्ते और कई बार अधिक समय के लिए रहना पड़ता है.
सोक सोवाना कहती हैं कि उनके दोस्त कारखानों में काम करते हैं. लेकिन वो निर्माण साइट पर काम करने को प्राथमिकता देती हैं, क्योंकि यहां उनका पूरा परिवार है.
वो बताती हैं कि रात में शराब पीने के बाद उनके पुरुष साथी कई बार उन पर टिप्णियां करते हैं.
सोक उन तीन साल पहले नोमपेन्ह आई थीं. उसके बाद से ही वो निर्माण के काम में लगी हुई हैं. उनकी बेटी अपने दादा-दादी के साथ पैतृक गांव में रहती है.
वो कहती हैं कि वो पैसे बचाने की हरसंभव कोशिश करती हैं. इस वजह से वो खाना कम खाती हैं. पैसे बचाने के लिए वो साइट पर ही सो जाती हैं. पैसे बचाकर वो उसे अपने परिवार को भेजती हैं.
सोक पोउ इमारत निर्माण के काम में पिछले चार साल से लगी हुई हैं. उनका कहना है कि वो पूरे नोमपेन्ह में अलग-अलग साइट पर काम कर चुकी हैं.
वो कहती हैं कि उनके पुरुष सहकर्मियों की ओर से उन्हें टीका टिप्पणी सहनी पड़ती है, लेकिन क्या करें? उनके पास सोने की कोई और जगह नहीं है और वो अलग से कमरा नहीं ले सकती हैं.
सैम नांग निर्माण साइट पर पिछले क़रीब दो महीने से काम कर रही हैं.
परिवार की मदद करने के लिए दो बच्चों की मां नांग को सुबह से लेकर दिन ढलने तक काम करना पड़ता है. वो कहती हैं कि उनके पास खाना खाने का भी समय नहीं है और अक्सर उन्हें चक्कर आता रहता है.