मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क के 19 महीने के चीते केएनजी22 का शिकार करने के आरोप में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने दो भाइयों को गिरफ्तार किया है. एसटीएफ ने शिकार में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी दो नाली टोपीदार बंदूक भी बरामद की है.
मध्यप्रदेश सरकार ने चीते को घायल अवस्था में पाए जाने और फिर उसके शरीर से गोलियों के छर्रे मिलने के बाद वन विभाग और पुलिस अधिकारियों को शामिल करके एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया था.
एसटीएफ की ओर से दो नवंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, गिरफ्तार अभियुक्त भाइयों की पहचान भगवान सिंह और प्रीतम सिंह के रूप में हुई है. दोनों मुरैना ज़िले के रहने वाले हैं.
एसटीएफ के मुताबिक, भगवान सिंह ने पूछताछ में बताया कि 24 अक्तूबर को वो प्रीतम सिंह के साथ श्योपुर ज़िले के विजयपुर के पास नितनवास गांव के जंगल में शिकार के इरादे से गया था. इसी दौरान भाइयों ने चीते को देखकर उस पर गोली चलाई थी.
एसटीएफ का कहना है कि गोली चलाने के बाद दोनों मौके से फरार हो गए थे. एसटीएफ ने पहले भगवान सिंह को गिरफ़्तार किया और फिर पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर भाई प्रीतम सिंह को भी हिरासत में लिया गया.
एसटीएफ ने दोनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट), 1972 की धारा 9 और 51 के तहत मामला दर्ज किया है. दोनों अभियुक्तों को दो नवंबर को विजयपुर की अदालत में पेश कर जेल भेजा गया.
19 महीने का नर चीता केएनजी22, कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता निर्वा से पैदा हुआ था.
वन विभाग के मुताबिक, 25 अक्तूबर को उसे श्योपुर के पास जंगलों में घायल हालत में पाया गया था. शुरुआती जांच में डॉक्टरों ने चीते के शरीर में फॉरेन ऑब्जेक्ट्स के होने की बात कही थी.
इसके बाद उसे बेहतर इलाज के लिए जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय भेजा गया.
सीटी स्कैन में चीते के आंतरिक अंगों, मांसपेशियों, हड्डियों और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई थी. आपातकालीन सर्जरी के दौरान उसके शरीर से बंदूक के पांच छर्रे निकाले गए. हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद 27 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई.
चीते की मौत के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने वन और पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए चार सदस्यीय स्पेशल टास्क फोर्स को यह मामला सौंपा था.
वहीं, केंद्र सरकार ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय टीम मध्य प्रदेश भेजी थी.
भारत में चीतों को फिर से बसाने की परियोजना सितंबर 2022 में शुरू हुई थी. इसके तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीते भारत लाए गए थे. वन विभाग के मुताबिक, केएनजी22 की मौत के बाद देश में चीतों की संख्या 58 रह गई है.