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रवि शास्त्री ने 'सुल्तान ऑफ स्विंग' और शाहीन शाह अफ़रीदी पर जो कहा था क्या वो सच है
- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
क्या पाकिस्तानी तेज़ गेंदबाज़ शाहीन शाह अफ़रीदी उतने ही असरदार और ख़तरनाक़ हैं जितना वसीम अकरम थे?
पाकिस्तानी फैंस और कुछ क्रिकेट के जानकार भले ही अफ़रीदी की कितनी ही तारीफ़ क्यों ना करें लेकिन उनकी और अकरम की कोई तुलना नहीं हो सकती.
ऐसा कहा है पूर्व भारतीय कोच और कप्तान रवि शास्त्री ने.
अहमदाबाद में पाकिस्तान के खिलाफ़ मैच में जब भारतीय टीम बैटिंग कर रही थी तो कमेंट्री के दौरान शास्त्री ने अपने साथी कमेंटेटर्स से कहा कि वो शाहीन शाह का ज़्यादा शोर ना मचाएं.
रवि शास्त्री ने कहा, “शाहीन शाह अफ़रीदी से ज़्यादा डरने की ज़रूरत नहीं है. शाहीन वसीम अकरम नहीं हैं. वह एक अच्छे बॉलर हैं, लेकिन उनको इतना चढ़ाने की ज़रूरत नहीं है. वो एक ठीक-ठाक गेंदबाज़ हैं और उन्हें ऐसा ही कहना चाहिए. ज़बरदस्ती ऐसा बोलने की ज़रूरत नहीं है कि वह एक अविश्वसनीय गेंदबाज़ हैं.”
दरअसल पाकिस्तानी फ़ैंस लंबे अरसे से शाहीन शाह अफ़रीदी की तारीफ़ों के पुल बांधते रहे हैं.
वो कहते आए हैं कि ये दोनों विराट कोहली और रोहित शर्मा को आसानी से आउट कर देते हैं.
एक-दो पारियों में ऐसा भले ही हुआ होगा, लेकिन इन दोनों और दूसरे भारतीय बल्लेबाज़ों ने समय-समय पर इनकी बॉलिंग की पिटाई भी की है.
इस विश्व कप में अब तक अफ़रीदी का प्रदर्शन
इस विश्व कप में पाकिस्तान टीम की ताक़त हमेशा की तरह उनकी तेज़ गेंदबाज़ी को माना जा रहा है.
लेकिन पाकिस्तान के पेसर्स ने अभी तक खेले गए तीन मैचों में ऐसा कुछ नहीं किया है कि पाकिस्तान उनकी मदद से वर्ल्ड कप जीतने की उम्मीद कर सके.
नीदरलैंड्स जैसी क्रिकेट कम खेलने वाली टीम ने भी उनके खिलाफ़ रन बनाए. जबकि श्रीलंका जैसी कम अनुभवी टीम ने भी उनके विरुद्ध 50 ओवरों में 300 से अधिक का स्कोर खड़ा किया.
फिर जब भारत से मुक़ाबला हुआ तो टीम 43वें ओवर में ही 191 पर ऑलआउट हो गई.
पाकिस्तानी बॉलर्स भी कुछ खास नहीं कर पाए. भारत ने 19 ओवर्स रहते ही ये टार्गेट पूरा कर लिया.
पाकिस्तान को अपनी पेस तिकड़ी – शाहीन शाह अफ़रीदी, हसन अली और हारिस रऊफ़ से बहुत उम्मीद थी. लेकिन तीनों ने अब तक निराश ही किया है.
इसमें सबसे बड़ी भागीदारी इस पेस अटेक के लीडर अफ़रीदी की रही है.
इस बार वर्ल्ड कप की तीन पारियों में शाहीन शाह ने लगभग 35 के औसत से सिर्फ 4 विकेट लिए हैं.
इसके साथ शाहीन ने 6.31 रन प्रति ओवर की इकॉनमी मेन्टेन की है, जो उन्हें महान नहीं, एक महंगा गेंदबाज़ बनाती है.
नीदरलैंड्स के विरुद्ध उन्होंने 37 रन देकर एक विकेट लिया, श्रीलंका के ख़िलाफ़ एक विकेट लेने में उन्होंने 66 रन खर्च कर दिए जबकि भारत के ख़िलाफ़ उन्होंने 36 रन देकर दो विकेट लिए. ये दोनों ही विकेट बल्लेबाज़ों की गलतियों की वजह से गिरे.
अहमदाबाद के मैच में जब भारतीय ओपनर्स रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने आक्रामक शुरुआत की तब शाहीन शाह भी लाचार दिखे.
कम स्कोर वाले उस मैच में पाकिस्तान को जल्दी विकेट की ज़रूरत थी जो अफ़रीदी पूरा ना कर सके.
गिल का एक शानदार कैच प्वाइंट पर शादाब खान ने लपका जबकि रोहित शर्मा का विकेट भी सॉफ्ट डिसमिसल माना जाएगा.
इस मैच के बाद पाकिस्तान के पूर्व गेंदबाज शोएब अख्तर ने भी पाकिस्तानी गेंदबाज़ी की जमकर धुलाई की.
शोएब ने कहा कि 'रोहित शर्मा ने अकेले ही पूरी बॉलिंग को नीचा दिखा दिया और भारतीय टीम ने इस मैच में पाकिस्तान को बच्चों की तरह मारा!'
क्या पिच है वजह?
कुछ कमेंटटेर्स ने काली मिट्टी की पिच को गुनहगार ज़रूर ठहराया, जिस पर गेंद थोड़ी रुक कर आ रही थी. लेकिन ये वजह भी बेबुनियाद है क्योंकि उसी पिच पर बुमराह ने असरदार बॉलिंग की और 7 ओवर में सिर्फ 19 रन दिए. जबकि अफ़रीदी ने 6 ओवरों में 36 रन आए.
गौतम गंभीर ने उस मैच में बुमराह और अफ़रीदी की तुलना करते हुए कहा कि बुमराह अपनी टीम और कप्तान के लिए सबसे अहम खिलाड़ी हैं.
गौतम गंभीर ने ये भी कहा कि, “बुमराह दोपहर 2 बजे की तपती धूप में गेंदबाज़ी कर रहे थे जबकि शाहीन के पास शाम के वक्त बॉलिंग करने का मौका आया. ये स्विंग के लिए ज्यादा अनुकूल समय होता है. फिर बुमराह की गेंदबाज़ी में धार नज़र आई.”
अहमादाबाद की पिच का बहाना इसलिए भी नहीं बन सकता क्योंकि इसके पहले के दो मैच जो हैदराबाद में खेले गए, वहां पर भी शाहीन कुछ खास नहीं कर पाए.
इसके बावजूद कि हैदराबाद में ही पाकिस्तानी टीम ने प्रैक्टिस की और लंबा वक़्त बिताया. वहां खेले गए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ प्रैक्टिस मैच में भी शाहीन को कई विकेट नही मिल पाया था.
तो क्या ये कहें कि हैदराबाद का विकेट भी शाहीन को सूट नहीं कर पाया?
महान गेंदबाज़ वसीम अकरम से इस तरह के बहानों की उम्मीद बिल्कुल नहीं की जा सकती थी. क्योंकि वो हर विकेट पर और हर कंडीशंस में विकेट लेने में क़ाबिल गेंदबाज़ थे.
आंकड़ों में तुलना
ज़रा एक नज़र डालें वसीम अकरम और शाहीन शाह के आंकड़ों पर तो पाएंगे कि दोनों के बीच ज़मीन आसमान का अंतर है.
शाहीन शाह ने अब तक 27 टेस्ट मैचों में 25.58 की औसत से 108 विकेट लिए हैं.
47 वनडे मैचों में उन्हें 23.86 की औसत से 90 सफलताएं मिली हैं. वहीं 52 अंतरराष्ट्रीय टी20 मैचों में उन्हें 64 विकेट मिले हैं
उधर वसीम अकरम ने 104 टेस्ट मैचों में 23.6 की औसत से 414 विकेट लिए जबकि 356 वनडे में उन्हें 23.5 की औसत से 502 सफलताएं मिलीं.
एक तो विकेटों की संख्या बहुत ज़्यादा है और शाहीन अफ़रीदी को काफी लंबे समय तक पीक पर गेंदबाज़ी करनी होगी तब वो शायद उसके आसपास पहुंच पाएं.
दूसरी बात ये कि कम मैचों में बढ़िया औसत हो सकता है, लेकिन 100 से अधिक टेस्ट और 300 से अधिक वनडे मैचों में इतना कम औसत बनाए रखना वसीम अकरम जैसे गेंदबाज़ ही कर सकते थे.
वो किसी भी सपाट विकेट पर भी ज़बरदस्त स्विंग की मदद से विकेट ले सकते थे. कोई आश्चर्य नहीं उन्हें 'स्विंग का सुल्तान' कहा जाता था.
इससे पहले जब साल 2020 में भी एक पाकिस्तानी चैनल ने शाहीन शाह और नसीम शाह की तुलना वसीम अकरम और वक़ार यूनुस की जोड़ी से की थी. तब वक़ार ने कहा था कि 'उन्हें जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, ये दोनों अच्छे और विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं लेकिन अभी उस तुलना के काबिल नहीं हुए है.'
अफ़रीदी की दूसरी कमज़ोरियां
शाहीन अफ़रीदी की एक कमज़ोरी उनकी फिटनेस भी है. वो युवा हैं लेकिन अक्सर पीठ या साइड में खिंचाव या दर्द की वजह से उन्हें मैच मिस करने पड़ते हैं.
फिटनेस के इस मसले के साथ साथ उनकी स्पीड में भी फ़र्क आया है.
पहले वो लगभग 145 या 150 तक की स्पीड से गेंद डालते थे. अभी वो औसतन 130 की स्पीड से ही गेंद डाल रहे हैं जो कभी-कभी 136-137 की रफ्तार तक जाती है.
पूर्व पाकिस्तानी ऑलराउंडर अब्दुल रज्जाक मानते हैं कि स्पीड कम होने से उनकी बॉलिंग में भी फ़र्क आया है.
एक पाकिस्तानी चैनल के इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “पहले जब उनकी स्पीड अच्छी थी तब गेंद भी सही जगह पर गिरती थी और स्विंग भी मिलती थी. अहमदाबाद में अगर उनकी बॉलिंग देखें तो पाएंगे कि उन्हें स्विंग भी कम मिली और उनकी बॉलिंग में धार भी कम दिखी.”
सच यही है कि शाहीन शाह अभी 'वर्क इन प्रोग्रेस हैं.' यानी उनकी बॉलिंग पर काम अभी चालू है. वो वसीम अकरम की बराबरी कर सकते हैं ये वक्त बताएगा. लेकिन उसके लिए उन्हें कम से कम एक दशक और पूरी फिटनेस के साथ टॉप स्तर की गेंदबाज़ी करनी होगी.
साथ ही जिस तरह बल्लेबाज़ उन्हें आसानी से पढ़ रहे हैं, उन्हें अपनी गेंदबाज़ी में और वेरिएशंस लाने की ज़रूरत भी पड़ेगी.
और ये सब करते हुए उन्हें अपनी पेस भी बनाए रखनी होगी. क्या शाहीन शाह अफ़रीदी इसके लिए तैयार हैं?
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