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होर्मुज़ स्ट्रेट: तनाव कम होने के बाद इलाक़े में कितनी सामान्य हुई ज़िंदगी, लोगों ने क्या बताया
- Author, नवाल अल-मग़ाफ़ी
- पदनाम, सीनियर इंटरनेशनल इन्वेस्टिगेशन्स कॉरेस्पोंडेंट, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
- ........से, बंदर अब्बास, ईरान
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 10 मिनट
भीषण गर्मी के दिन मछुआरे बंदरगाह पर अपना शिकार उतार रहे हैं. एक मछुआरा गर्व से अपने जाल में फंसे कई बेबी शार्क दिखाता है.
वह बताता है कि शार्क का सैंडविच यहां की स्थानीय डिश है. वहीं, दूसरा मछुआरा अपनी मोटरसाइकिल पर दो बड़ी मछलियां लादकर वहां से निकल जाता है.
पहली नज़र में यह एक सामान्य मछली पकड़ने वाला बंदरगाह लगता है. लेकिन यह बंदरगाह होर्मुज़ स्ट्रेट पर बसे ईरान के शहर बंदर अब्बास में है. यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है और अमेरिका-इसराइल तथा ईरान के बीच युद्ध का प्रमुख केंद्र भी बन चुका है.
संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार ब्रितानी प्रसारकों के पत्रकारों को इस समुद्री मार्ग के ईरानी हिस्से का दौरा करने का मौक़ा मिला है.
जब 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए, तब ईरानी सरकार ने जवाबी कार्रवाई में इसराइल और उन पड़ोसी खाड़ी देशों पर हमला किया, जहां अमेरिकी सैन्य बल तैनात हैं. साथ ही, उसने अपनी भौगोलिक स्थिति को रणनीतिक बढ़त के रूप में इस्तेमाल किया.
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बिना अनुमति होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने की कोशिश करने वाले व्यावसायिक जहाज़ों पर गोलीबारी शुरू कर दी. इससे यह समुद्री मार्ग लगभग बंद हो गया.
दुनिया भर के नाविक अलग-अलग जगहों पर फंस गए और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई. इससे ऊर्जा और ईंधन महंगे हो गए. साथ ही, समुद्र के रास्ते दुनिया भर में भेजे जाने वाले कई अन्य सामानों की कीमतें भी बढ़ गईं.
इसके जवाब में अमेरिका ने भी नाकेबंदी लागू की और ईरान के खाड़ी क्षेत्र के बंदरगाहों का इस्तेमाल करने वाले जहाज़ों को निशाना बनाया.
नतीजतन, इन समुद्री इलाक़ों में कई महीनों से मछली पकड़ना बेहद ख़तरनाक हो गया है. कई मछुआरों ने समुद्र में जाना बंद कर दिया, जबकि कुछ यह जानते हुए भी निकलते रहे हैं कि वे एक युद्ध क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं.
ईरान का अहम रणनीतिक हथियार
अब, कई हफ्तों बाद जब इसराइल और अमेरिका के साथ हुए संघर्षविराम समझौते के तहत ईरान ने होर्मुज़ को आंशिक रूप से फिर से खोलने की अनुमति दी, और यह समझौता अब तक काफ़ी हद तक लागू है, तो समुद्र एक बार फिर शांत है और मछुआरे वापस लौट रहे हैं.
ऐसे ही एक मछुआरे अब्दुल रहमान ने बीबीसी की टीम को समुद्री मार्ग के बीचों-बीच ले जाकर दिखाया कि युद्ध का असर बंदर अब्बास और उसके आसपास के लोगों की ज़िंदगी पर किस तरह पड़ा है.
जब हम इस स्ट्रेट से गुजर रहे थे, तब अप्रैल में संघर्ष के चरम के दौरान आईआरजीसी ने जिन दो कंटेनर जहाज़ों को अपने क़ब्ज़े में लिया था, वे दिखाई दिए.
उस समय आईआरजीसी का कहना था कि इन जहाज़ों ने ज़रूरी अनुमति के बिना संचालन किया और नेविगेशन सिस्टम में छेड़छाड़ कर समुद्री सुरक्षा को ख़तरे में डाला.
संघर्षविराम के बावजूद, पनामा और लाइबेरिया के झंडे वाले एमएससी फ्रांसेस्का और एपामिनोंडास जहाज़ों को अब तक रिहा नहीं किया गया है.
समुद्र में किनारे से कुछ दूरी पर दर्जनों अन्य मालवाहक जहाज़ भी खड़े दिखाई दिए, जो होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने के लिए ईरानी अधिकारियों की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं.
जब हम बंदर अब्बास के तट से क़रीब 8 किलोमीटर दूर स्थित होर्मुज़ द्वीप के पास पहुंचे, तो हमारे गाइड रहमान ने समुद्र की ओर नज़र रखने वाले एक पुराने क़िले की ओर इशारा किया.
उसकी पुरानी लाल दीवारें इस बात की याद दिलाती हैं कि इस स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर सदियों से संघर्ष होता रहा है.
16वीं सदी की शुरुआत में बने इस क़िले ने पुर्तगाली साम्राज्य को इस अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई थी.
हालांकि सन 1622 में फ़ारस के शाह अब्बास प्रथम ने पुर्तगालियों को यहां से बाहर कर दिया. बंदर अब्बास शहर का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया है.
आज भी बंदर अब्बास की रणनीतिक अहमियत पहले जैसी ही बनी हुई है. ईरान के दक्षिणी तट पर, होर्मुज़ स्ट्रेट के सबसे संकरे हिस्से के पास स्थित यह शहर ईरान की पारंपरिक नौसेना और आईआरजीसी की नौसैनिक शाखा का प्रमुख ठिकाना है.
शांतिकाल में दुनिया भर में होने वाली तेल और गैस की सप्लाई का क़रीब पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता रहा है. यही वजह है कि यह शहर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है.
साथ ही, यह ईरान की "विषम युद्ध" रणनीति का भी प्रमुख केंद्र है. उसने इसे अधिक ताक़तवर विरोधियों का मुक़ाबला करने के लिए तैयार किया है.
पूरे संघर्ष के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार युद्ध बढ़ने की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज़ को दोबारा नहीं खोला, तो "उसके पास देश ही नहीं बचेगा."
हालांकि, इन चेतावनियों और संघर्षविराम के बावजूद ईरान ने अब तक होर्मुज़ स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला है.
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते के लिए चल रही बातचीत में यह समुद्री मार्ग अब भी तेहरान के लिए दबाव बनाने का अहम जरिया बना हुआ है.
क्या हैं ताज़ा हालात
जब बीबीसी की टीम बंदर अब्बास शहर पहुंची, तो वहां ज़िंदगी धीरे-धीरे सामान्य होती दिखाई दी.
परिवार अपने घर लौट चुके हैं, दुकानें फिर से खुल गई हैं और सड़कों पर एक बार फिर वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है.
सदियों से समुद्र के रास्ते आने वाले सामान का प्रमुख केंद्र रहा यह बाज़ार, जहां से वस्तुएं दक्षिणी ईरान के अलग-अलग हिस्सों में भेजी जाती हैं, अब फिर से चहल-पहल से भर गया है.
लेकिन शहर के कुछ हिस्सों में युद्ध के निशान अब भी साफ़ दिखाई देते हैं.
बंदर अब्बास के मुख्य विश्वविद्यालय के पीछे स्थित खुशनूदी स्ट्रीट पर एक अपार्टमेंट की इमारत पूरी तरह तबाह हो चुकी है. 26 मार्च को इसराइल के हवाई हमले में यह इमारत निशाना बनी थी.
इमारत का आधा हिस्सा अब भी खड़ा है, जबकि बाक़ी आधा कंक्रीट और लोहे के ढेर में बदल चुका है.
कभी जिन कमरों और ड्रॉइंग रूम में परिवार रहते थे, वे अब खुले आसमान के नीचे दिखाई देते हैं. टूटी हुई इमारत पर ईरानी झंडे अब भी लहरा रहे हैं.
इस इमारत में कुछ दफ्तर भी थे. 40 वर्षीय कारोबारी फ़ातिमा वहीं काम करती थीं, लेकिन हमले के समय वह वहां मौजूद नहीं थीं.
उन्होंने कहा, "मैं यहां रहने वाले कई परिवारों को जानती थी."
उन्होंने बताया, "यहां कई मांएं और बच्चे रहते थे. हमले के समय वे सो रहे थे. कुछ लोग बच गए, लेकिन तीन लोगों की मौत हो गई. उनमें से एक सैन्य अधिकारी थे, जो अपने परिवार के साथ यहां रहता थे. लेकिन यह कोई सैन्य ठिकाना नहीं था."
इसराइल डिफेंस फोर्सेज का कहना था कि इस हमले का निशाना आईआरजीसी की नौसेना के कमांडर अलीरेजा तंगसीरी थे. हमले के चार दिन बाद ईरान ने पुष्टि की कि इसमें उनकी मौत हो गई थी.
ईरान की फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, इमारत पर दागी गई दो मिसाइलों के हमले में तीन लोगों की मौत हुई और सात अन्य घायल हुए.
ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार, होर्मुज़गान प्रांत में, जिसकी राजधानी बंदर अब्बास है, वहां अब तक 261 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें आम नागरिक और सैन्यकर्मी दोनों शामिल हैं.
यह हमला दिखाता है कि कई बार नागरिक और सैन्य गतिविधियां एक-दूसरे के बेहद क़रीब होती हैं. ऐसे में सैन्य ठिकानों और रिहायशी इलाक़ों के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है.
संघर्षों पर नज़र रखने वाले संगठन आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट (एसीएलईडी) के आंकड़ों के मुताबिक़, 28 फरवरी से 8 अप्रैल को संघर्षविराम लागू होने तक बंदर अब्बास और उसके आसपास कम से कम 96 अमेरिकी हमले हुए.
संगठन का कहना है कि इनमें से एक-तिहाई से ज्यादा हमलों का निशाना सैन्य ढांचा था. इनमें आईआरजीसी के ठिकाने, मिसाइल साइट, नौसैनिक संसाधन और बंदर अब्बास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का एयर बेस शामिल थे.
इनमें से कई स्थान रिहायशी इलाक़ों के बेहद क़रीब हैं.
हालांकि, एसीएलईडी अन्य हमलों में किन जगहों को निशाना बनाया गया, इसकी पुष्टि नहीं कर सका.
हमलों का ईरान के लोगों पर असर
युद्ध के दौरान अमेरिका और इसराइल के हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हुई. इनमें सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई भी शामिल थे. इन हमलों में ईरान के सैन्य और आर्थिक ढांचे को नुक़सान पहुंचा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भी बड़ा झटका लगा.
हालांकि, बंदर अब्बास के मेयर इस बात से सहमत नहीं हैं कि युद्ध ने ईरान को कमज़ोर कर दिया है.
सरकारी परिसर में बने सुनहरे मीनार वाले भवन से बीबीसी से बातचीत में मेहदी नोबानी ने कहा कि इसराइल और अमेरिका अपने सैन्य मक़सद पूरे करने में नाकाम रहे. इनमें ईरान में सत्ता परिवर्तन का उनका लक्ष्य भी शामिल था.
उन्होंने यह भी कहा कि अली ख़ामेनेई के बेटे यानी नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई की नियुक्ति से ईरान बंटने के बजाय और ज्यादा एकजुट हुआ है.
उन्होंने कहा, "अगर संघर्षविराम टूटता है, तो ईरान निश्चित रूप से होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद कर देगा."
बाज़ार में बीबीसी ने जिन लोगों से बात करने की कोशिश की, उनमें से कई बातचीत करने से हिचकिचा रहे थे. सभी ने इसकी वजह नहीं बताई, लेकिन कुछ लोगों का कहना था कि उन्हें इस बात पर भरोसा नहीं है कि मीडिया ईरान की तस्वीर सही तरीके से पेश करता है.
आख़िरकार, चीन में रह चुकी एक युवा महिला ने हमसे बात की. उन्होंने बताया कि संघर्ष के दौरान वह अपने परिवार के साथ रहने के लिए वापस ईरान लौट आई थी.
उसने कहा, "ईरान के लोग एक-दूसरे का साथ देने के लिए एकजुट हो गए हैं."
बाज़ार की घुमावदार गलियों में आगे बढ़ने पर 55 वर्षीय फ़ातेमेह आड़ू बेचती हुई मिलीं.
बाज़ार में लगभग हर तरह के सामान के अलग-अलग हिस्से हैं. इनमें उसी सुबह खाड़ी से पकड़ी गई ताजा मछलियां, दक्षिणी ईरान की खजूर, आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान, इत्र, घरेलू उपयोग का सामान और पारंपरिक बंदरी कपड़े शामिल हैं.
उन्होंने बताया कि युद्ध के दौरान उनके बेटे की नौकरी चली गई और अब पूरा परिवार उनकी दुकान से होने वाली कमाई पर निर्भर है.
उन्होंने कहा, "हम युद्ध नहीं चाहते थे. जब बमबारी होती है, तो हमें डर लगता है. ट्रंप युद्ध चाहते थे. उन्होंने अचानक हम पर हमला कर दिया. हम यह नहीं चाहते थे."
पास ही खड़ी 40 वर्षीय मासूमेह ने हमारी बातचीत सुनी और उसमें शामिल हो गईं.
उन्होंने कहा, "हर युद्ध अपने साथ मुश्किलें लेकर आता है. इसका असर अर्थव्यवस्था और लोगों की ज़िंदगी पर पड़ता है. लेकिन हमें धैर्य रखना होगा."
बातचीत का दौर जारी है और संघर्षविराम की लगातार परीक्षा हो रही है. ऐसे में होर्मुज़ स्ट्रेट, ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का अहम केंद्र बना रहने की संभावना है.
लेकिन यहां रहने वाले लोगों के लिए इस संघर्ष का मतलब कुछ और है. उनके लिए यह खोई हुई रोजी-रोटी, हवाई हमलों के डर में गुजरी रातें और इस उम्मीद की कहानी है कि यह नाजुक संघर्षविराम लंबे समय तक कायम रहे.
जैस्मिन डायर की अतिरिक्त रिपोर्टिंग.
नवाल अल-मग़ाफ़ी तेहरान से रिपोर्टिंग कर रही हैं, लेकिन इस शर्त पर कि उनकी किसी भी सामग्री का इस्तेमाल बीबीसी की फ़ारसी सेवा पर नहीं किया जाएगा. ये पाबंदियां ईरान में काम करने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों पर लागू हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.