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ईरान-अमेरिका शांति वार्ता: खाड़ी का कौन-सा देश ईरान के प्रति सबसे सख़्त और कौन-सा सबसे नरम?
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
ईरान और अमेरिका के बीच फ़िलहाल दूसरे दौर की बातचीत के कोई संकेत नज़र नहीं आ रहे हैं.
लेकिन इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची रविवार को एक बार फिर से पाकिस्तान पहुंचे हैं. अराग़ची शुक्रवार-शनिवार की रात भी इस्लामाबाद पहुंचे थे.
शनिवार को अराग़ची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से मुलाक़ात की.
इसके बाद अराग़ची ने ओमान की यात्रा की और अब वह ओमान से दोबारा पाकिस्तान आए हैं. हालांकि, शुक्रवार को एक्स पर एक पोस्ट में बताया था कि पाकिस्तान में बैठकों के बाद वह ओमान और रूस की यात्रा करेंगे.
बीबीसी उर्दू के मुताबिक़ ओमान के सुल्तान ने ईरानी विदेश मंत्री के साथ क्षेत्रीय घटनाक्रम और मध्यस्थता प्रयासों पर चर्चा की.
ओमान समाचार एजेंसी के मुताबिक, ओमान के शासक सुल्तान हैयथम बिन तारिक़ अल सईद ने मस्कट में ईरानी विदेश मंत्री अराग़ची से मुलाकात की.
इसी दौरान अराग़ची ने क़तर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से फोन पर बात भी की है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि अराग़ची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री से भी फोन पर बात की है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक सऊदी और कतर से विदेश मंत्रियों से फोन पर बातचीत के दौरान अराग़ची ने, "युद्ध को समाप्त करने और तनाव को कम करने के लिए ईरान के ताजा राजनयिक प्रयासों और कदमों के बारे में जानकारी दी."
ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को बनाया था निशाना
हालिया युद्ध के दौरान, ईरान ने क़तर और सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर बार-बार हमले किए थे.
इससे पहले जब 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते पर सहमत हुए, तो खाड़ी देशों ने राहत की सांस ली थी. इस घोषणा का मतलब था कि सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए जा रहे ईरान के जवाबी हमलों का हफ्तों बाद अंत हो गया.
इस पर खाड़ी देशों की प्रतिक्रियाएं भी एक जैसी ही थीं. उनकी युद्धविराम को लेकर प्रतिक्रियाओं में दो अहम बातें थीं- स्थायी समाधान और होर्मुज़ स्ट्रेट पर बिना किसी रुकावट के यातायात.
लेकिन संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान की कड़ी निंदा की थी. वहीं, ओमान ने अमेरिका की आलोचना और ईरान के साथ सीधे संपर्क की बात कही थी जो बाक़ी खाड़ी देशों के स्टैंड से अलग था.
अब मुख्य सवाल यह है कि क्या कोई भी अमेरिका-ईरान समझौता गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के सदस्य देशों की उम्मीदों को पूरा कर सकता है.
क़तर
युद्धविराम पर क़तर की प्रतिक्रिया तनाव कम करने, क्षेत्रीय भागीदारी और वैश्विक ऊर्जा प्रवाह की सुरक्षा पर केंद्रित थी.
14 अप्रैल को एक संवाददाता सम्मेलन में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा, "तत्काल प्राथमिकता "युद्धविराम को मजबूत करना और इसे स्थायी शांति में बदलना है."
क़तर ने खाड़ी देशों और सप्लाई चेन से जुड़े देशों को जोड़ते हुए बातचीत के लिए एक फ्रेमवर्क बनाने की मांग की.
मैरीटाइम सिक्योरिटी क़तर की प्रमुख मांग है. अंसारी ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर व्यापार के निरंतर प्रवाह को इंटरनेशनल सिक्योरिटी के लिए जरूरी बताया और इसे "दबाव या सौदेबाजी के उपकरण" के रूप में इस्तेमाल करने से इनकार किया.
21 अप्रैल को एक अन्य संवाददाता सम्मेलन में अंसारी ने कहा कि नेविगेशन सुनिश्चित करना सभी देशों की "साझा जिम्मेदारी" है, न कि किसी एक पक्ष की.
क़तर ने पाकिस्तान, अमेरिका और अन्य मध्यस्थों के साथ "उच्च-स्तरीय समन्वय" का हवाला देते हुए चल रहे मध्यस्थता प्रयासों का समर्थन किया. हालांकि उन्होंने किसी तरह की जानकारी नहीं दी.
सऊदी अरब
अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने के विज़न 2030 के लक्ष्यों के बावजूद तेल सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है.
लगातार संघर्ष का खतरा सऊदी अरब के विज़न 2030 के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है.
हालांकि युद्ध ने सऊदी अरब और ईरान के बीच 2023 में चीन की मध्यस्थता से हुए समझौते की सीमाओं को टेस्ट किया है. लेकिन दोनों देशों ने कुछ राजनयिक संपर्क बनाए रखा है.
हालांकि, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के अमेरिका पर ईरान पर हमले जारी रखने के लिए दबाव डालने की खबरें बताती हैं कि सऊदी सैन्य जीत को प्राथमिकता दे सकता है.
मोहम्मद बिन सलमान ने 2018 में चेतावनी दी थी, "अगर ईरान परमाणु बम विकसित करता है, तो हम भी जल्द से जल्द ऐसा ही करेंगे."
सऊदी अरब के लिए ईरान का क्षेत्रीय प्रॉक्सी, विशेष रूप से पड़ोसी यमन में हूती विद्रोहियों को दिया जा रहा समर्थन भी उतना ही चिंताजनक है.
अगर हूती बाब अल-मंडाब स्ट्रेट को बंद करने की अपनी धमकी को लागू करते हैं, तो खाड़ी देश एक महत्वपूर्ण तेल निर्यात मार्ग खो सकते हैं.
बहरीन
बहरीन ने युद्धविराम और होर्मुज़ स्ट्रेट के आंशिक रूप से फिर से खुलने का स्वागत किया. उसने "ईरान के सभी शत्रुतापूर्ण और अनुचित हमलों को तत्काल और व्यापक रूप से बंद करने" का आह्वान किया.
बहरीन के विदेश मंत्रालय ने 8 अप्रैल को "एक स्थायी समाधान की आवश्यकता" पर जोर दिया. हालांकि बहरीन ने इस बात पर भी जोर दिया कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों और अन्य हथियार बनाने की उसकी क्षमता बाधित हो.
बहरीन ने ईरान 'क्षेत्रीय प्रॉक्सी' के इस्तेमाल पर रोक लगाने की अपील की.
बहरीन ने एक ऐसे समझौते की अपील की जिसमें होर्मुज़ स्ट्रेट समेत अंतरराष्ट्रीय समुद्री और हवाई यात्राएं सुरक्षित रहें. इसके साथ ही "ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता और वैश्विक व्यापार के मुक्त प्रवाह" की जरूरत पर जोर दिया गया.
बहरीन ने ईरान से उसकी धरती पर हमलों से हुए नुकसान की भरपाई के लिए "पूर्ण, प्रभावी और तत्काल मुआवजा" देने का भी अनुरोध किया.
कुवैत
8 अप्रैल को कुवैत ने युद्धविराम का स्वागत किया. कुवैत ने मध्यस्थता के प्रयासों का समर्थन करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि इससे "एक व्यापक और स्थायी समाधान होना चाहिए जो सुरक्षा को बढ़ाए."
कुवैत ने ईरान और उसके सहयोगी गुटों से शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों को तुरंत रोकने, राज्य की संप्रभुता का सम्मान करने की अपील की. इसके अलावा ईरान से "क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करने वाली गतिविधियों से दूर रहने" का आह्वान किया गया.
कुवैत के विदेश मंत्री ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण करने के ईरानी प्रयासों का विरोध करते हुए कहा कि 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन के तहत आवागमन के अधिकार की गारंटी मिलती है.
17 अप्रैल को स्ट्रेट पर एक अंतरराष्ट्रीय बैठक में बोलते हुए, कुवैत ने मैरीटाइम सिक्योरिटी और ईरान के अंतरराष्ट्रीय कानून को मानने की जरूरत पर जोर दिया.
कुवैत ने खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचे और रणनीतिक संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए ईरान के बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के इस्तेमाल की निंदा की.
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)
जीसीसी देशों में से, संयुक्त अरब अमीरात ईरान का सबसे मुखर आलोचक रहा है. यूएई ने ईरान पर "बिना उकसावे के और गैरकानूनी आक्रामकता" का आरोप लगाया है और ईरान के अपने हमलों को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताने को सिरे से खारिज किया है.
युद्धविराम पर अपनी प्रतिक्रिया में यूएई ने "क्षेत्र में सभी शत्रुताओं को तत्काल समाप्त करने और होर्मुज़ स्ट्रेट को पूरी तरह और बिना शर्त फिर से खोलने के लिए ईरान की पूर्ण प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने" की मांग की.
यूएई ने ईरान की "परमाणु क्षमताओं, बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन, सैन्य क्षमताओं और प्रॉक्सी समूहों" पर "व्यापक कार्रवाई" की मांग की. उसने होर्मुज़ स्ट्रेट में ईरान की ओर से चलाए जा रहे "इकोनॉमिक वारफेयर" को खत्म करने की मांग की.
29 मार्च को एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में, यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार ने ईरान से मुआवजे की भी मांग की.
यूएई ने स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए अमेरिकी कार्रवाई में शामिल होने की धमकी दी, ताकि "एक ऐसी ताकत का सामना किया जा सके जो खाड़ी सुरक्षा के लिए प्राथमिक खतरा बन गया है."
ओमान
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से मध्यस्थ रहे ओमान ने आपसी तनाव कम करने का लगातार समर्थन किया है. ओमान ने इसे अपनी "सभी के मित्र और किसी के शत्रु नहीं" वाली विदेश नीति का हिस्सा बताया है.
ओमान अमेरिका का सबसे बड़ा आलोचक भी रहा है. विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी ने 28 फरवरी को युद्ध-पूर्व वार्ताओं को "कमज़ोर" करने के लिए अमेरिका पर अपनी "निराशा" जाहिर की.
ईरान पर हमले के ट्रंप के फैसले के पीछे इसराइल की भूमिका के आरोपों के बाद उन्होंने अमेरिका से कहा, "यह आपका युद्ध नहीं है."
ओमान जीसीसी की सदस्यता और ईरान के साथ अपने संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
उसने युद्धविराम का स्वागत किया, लेकिन क्षेत्र में "युद्ध की स्थिति को स्थायी रूप से समाप्त करने" का आह्वान किया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ओमान और ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट से समुद्री यातायात की निगरानी के लिए एक संयुक्त प्रोटोकॉल पर काम कर रहे हैं.
4 अप्रैल को, ओमान और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसके माध्यम से "सुचारू यातायात सुनिश्चित करने के लिए संभावित विकल्पों" पर चर्चा की.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.