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अन्वी कामदार: सेल्फ़ी लेने की कोशिश में खाई में गिरकर हुई मौत, पर्यटन के दौरान दुर्घटनाओं से कैसे बचें?
महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले में कुंभे झरने के पास अपने दोस्तों के साथ घूमने गई अन्वी कामदार नाम की एक युवती की खाई में गिरने से मौत हो गई.
मुंबई की रहने वाली अन्वी कामदार महाराष्ट्र के रायगढ़ के कुंभे झरने के पास घूमने गई थीं. अन्वी इंस्टाग्राम रील बनाने के लिए झरने के पास गई थीं.
इस दौरान पैर फिसलने से वे 300 फीट गहरी खाई गिरीं और उनकी मौत हो गई. अन्वी कामदार एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर थीं जिनके इंस्टाग्राम पर दो लाख से अधिक फॉलोवर हैं.
सोशल मीडिया पर कुंभे झरने का वीडियो वायरल होने के बाद 16 जुलाई मंगलवार को अन्वी अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए वहां गई थीं.
मनगांव के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक निवृत्ति बोराडे के अनुसार, 16 जुलाई को सुबह 9 बजे के आस-पास रास्ते पर फिसलन होने की वजह से अन्वी का पैर फिसल गया और वह घाटी में गिर गईं.
कुछ दिन पहले लोनावला के भूंसी बांध के पास भी एक हादसा हुआ था, जिसमें एक परिवार कई लोग बह गए थे.
साल 2023 में लोनावाला के पास स्थित लोहागढ़ किले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. किले पर भारी भीड़ होने के कारण पर्यटक करीब चार घंटे तक मुख्य गेट के पास फंसे रहे थे.
हिलने-डुलने की जगह नहीं होने के कारण पर्यटक लगभग चार घंटे तक एक ही स्थान पर खड़े थे. गनीमत यह रही कि तेज़ बारिश में भी भगदड़ नहीं मची थी.
बारिश के मौसम में अक्सर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं.
सावधानी बरतने की सलाह
घूमने फिरने के दौरान आनंद लेने के साथ-साथ कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए
इस बारे में बीबीसी मराठी ने बचाव विशेषज्ञों, पर्यटन स्थल के पास रहने वाले लोगों और पर्यटकों से बात की.
उनसे सुरक्षा के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए, इसकी जानकारी ली. यात्रा की योजना बनाते समय और टूरिस्ट प्लेस चुनते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए
विशेषज्ञों ने बताया कि यात्रा पर निकले से पहले ये जरूर सोचें कि घूमने कहाँ जा रहे हैं. जिन जगहों पर पहुंचना आसान होता है उन जगहों पर छुट्टियों पर भारी भीड़ इकट्ठा हो जाती है.
महाराष्ट्र पर्वतारोही रेस्क्यू समन्वय सेंटर से जुड़े ओंकार ओक कहते हैं कि दुर्गम स्थानों पर जाने से पहले ये भी सोचें कि क्या वहां पर पहुंचना आसान है और वहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था है या नहीं.
ओंकार ओक ने बताया, "लोहागढ़ में जो हुआ वह कोई अकेली घटना नहीं है, छुट्टियों के दिनों में जिन जगहों पर पहुंचना आसान होता है, वहां अधिक भीड़ हो जाती है. कुछ जगहों पर तो भारी जाम भी लग जाता है."
उनके अनुसार, मॉनसून के दौरान भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना बेहतर होता है. बिना अनुभव के दुर्गम स्थानों पर जाना भी खतरनाक हो सकता है.
ओंकार ओक ने कहा कि जिस जगह पर आप घूमने की योजना बना रहे हैं, उसके बारे में आपको पूरी रिसर्च करनी चाहिए ताकि आवश्यक तैयारी की जा सके.
उनका कहना है कि घूमने जाने की योजना बनाते समय अपने किसी दोस्त या क़रीबी से ज़रूर बात करें, किसी को बिना बताए घूमने न जाएं.
वास्तव में आपको परिवार को जरूर बताना चाहिए कि आप कहां घूमने जा रहे हैं. अगर ऐसा संभव नहीं है तो आपको इस बात का अंदाजा होना चाहिए कि आप कहां जा रहे हैं और किसके साथ जा रहे हैं. चाहे वह दोस्त हो, रिश्तेदार हों या पड़ोसी हों.
ओंकार ओक ने कहा, "आपको अपने घर या दोस्तों को ये भी बताना चाहिए कि अगर आप उनसे 24-48 घंटों के भीतर संपर्क नहीं करते हैं तो वे स्थानीय बचाव दल या पुलिस से संपर्क करें. यह सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है."
क्या कहते हैं जानकार
जानकारों की एक अहम सलाह ये भी है कि सेल्फी, रील, फोटो लेने के चक्कर में सुरक्षा को अनदेखा न करें.
महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले का देवकुंड झरना एक ख़ूबसूरत पर्यटन स्थल है. हादसों के बाद से वहां का पर्यटन ठप हो गया था.
स्थानीय लोगों ने पर्यटकों की सुरक्षा और प्राकृतिक सुंदरता को बचाए रखने के लिए बीते वर्षों में कई प्रयास किए हैं. वहां के ग्रामीण पिछले सात सालों से लोगों के लिए गाइड और गार्ड के रूप में काम कर रहे हैं.
स्थानीय निवासी अर्जुन म्हामुनकर ने भी कहा कि झरने और घाटियों जैसी जगहों पर सेल्फी लेने या रील बनाने से बचना चाहिए.
उन्होंने कहा, "हमें पर्यटकों के लिए गाइड की सुविधा शुरू किए हुए सात साल हो गए हैं. हम रास्ता बताने से लेकर हर चीज़ की देखभाल करते हैं. शाम के बाद किसी को भी खाई के पास जाने की अनुमति नहीं है. झरने के पास रस्सियां लगाई गई हैं. लोग इसका आनंद सुरक्षित रूप से उठा सकते हैं. साथ ही हम किसी को भी शराब पीने की अनुमति नहीं देते हैं."
अर्जुन म्हामुनकर ने बताया कि अगर भारी बारिश होती है, तो देवकुंड पर्यटकों के लिए बंद कर दिया जाता है.
महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम ने भी पर्यटकों की सुरक्षा के लिए कुछ अपील की है.
विकास निगम ने कहा है, "बारिश के दौरान घूमते-फिरते समय खतरनाक स्थानों से बचने के लिए सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करना आवश्यक है."
महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक हरने ने कहा है, "निगम इस बात पर ज़ोर देता है कि जान जोखिम में डालकर सेल्फी लेने, फिसलन वाले झरनों पर जाने, अज्ञात जंगलों में घूमने से हर कीमत पर बचना चाहिए और निगम की तरफ़ से पर्यटकों को दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं."
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ट्रेकिंग के लिए विशेष दिशा निर्देश
जो लोग बरसात के मौसम में ट्रेकिंग का आनंद लेना चाहते हैं, उनके लिए अखिल महाराष्ट्र पर्वतारोहण महासंघ ने कुछ महत्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए हैं.
इन निर्देशों के मुताबिक, "हाल ही में हर साल मॉनसून के दौरान सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला से लेकर गडकोट किलों तक ट्रेकिंग के लिए जाने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. कुछ जगहों पर कई बार हादसे भी देखने को मिले हैं. इनमें से कई घटनाएं मानवीय भूल के कारण हुई हैं."
ऑल महाराष्ट्र क्लाइंबिंग फेडरेशन के अध्यक्ष उमेश ज़िरपे ने कहा, "यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ बातों का पालन किया जाना चाहिए."
पर्वतारोहियों के लिए पर्वतारोहण महासंघ के विशेष सुझाव:
- किसी परिचित और अनुभवी समूह के साथ ट्रेक पर जाएं.
- ट्रेक में लोगों की संख्या सीमित रखें, ट्रेकिंग ग्रुप के पास प्राथमिक चिकित्सा की सामग्री उपलब्ध हो
- ट्रेकिंग की जगह और ट्रेकिंग में जाने वाले अन्य लोगों की जानकारी परिवार और मित्रों से साझा करें
- ट्रेक करते समय पंक्ति में पहले आदमी और आख़िरी आदमी के बीच चलें.
- अपने साथ एक अच्छी टॉर्च रखें, संभव हो तो स्थानीय गाइड को साथ ले जाएं.
- ट्रेक पर जाने से पहले मौसम का पूर्वानुमान जरूर देखकर जाएं.
- मॉनसून के दौरान कोहरे के कारण गुम होने की संभावना रहती है. कोहरे में वाहन चलाते समय सावधान रहें.
- किले के प्राचीन दरवाज़ों और अन्य खंडहरों पर न चढ़ें, ढीले पत्थर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं.
- अपने साथ एक छड़ी रखें ताकि चढ़ना, उतरना और चलना आसान हो जाए.
- काई वाले स्थानों और सीढ़ियों पर सावधानी से चलें.
- मोबाइल का इस्तेमाल सावधानी से करें क्योंकि आपात की स्थिति इसका इस्तेमाल किया जा सके.
इसके अलावा बरसाती नदी या नालों में पानी का बहाव अचानक बढ़ने का डर रहता है इसलिए जल धाराओं, नालों और नदी में प्रवेश करने से बचें.
झरनों के नीचे भी खड़ा नहीं होना चाहिए क्योंकि ऊपर से पत्थरों के भी गिरने की संभावना बनी रहती है. पानी की गहराई का अनुमान नहीं होने पर नहर और बांध में उतरने से बचना चाहिए.